{"_id":"56fc2cde4f1c1b227ef005e4","slug":"congress-akali-councillor-foundation-name-plete-kurali","type":"story","status":"publish","title_hn":"नींव पत्थरों को लेकर कांग्रेसी-अकाली पार्षद भिड़े","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नींव पत्थरों को लेकर कांग्रेसी-अकाली पार्षद भिड़े
अमर उजाला ब्यूरो, कुराली
Updated Thu, 31 Mar 2016 09:29 AM IST
विज्ञापन
कांग्रेसी-अकाली पार्षद भिड़े
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नगर काउंसिल की बैठक में नींव पत्थरों पर नाम न लिखे जाने का मामला पूरी तरह से गरमा गया। हाल यह हुआ कि इस मुद्दे पर कांग्रेसी और अकाली पार्षदों में पहले नोक-झोंक हुई। इसके बाद मामला हाथापाई तक पहुंच गया। कुछ पार्षदों ने बीच करके मामले को शांत करवाया। हालांकि, इस बीच में शहर के विकास के लिए 7.95 करोड़ के बजट को मंजूरी दी गई। काउंसिल की प्रधान कृष्णा देवी की अध्यक्षता में हुई मीटिंग में हलका विधायक जगमोहन सिंह कंग भी मौजूद रहे।
काउंसिल की मीटिंग दौरान उस समय हंगामा हुआ, जबकि कांग्रेसी पार्षद शिव वर्मा और भाजपा के पार्षद भानू प्रताप ने शहर में रखे जा रहे नींव पत्थरों पर पार्षदों के नाम लिखे जाने में किए जा रहे भेदभाव की प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त करनी चाही। इस दौरान शिव वर्मा ने कांग्रेसी पार्षदों के वार्डों में होने वाले कार्यों पर पार्षदों का नाम न लिखे जाने पर एतराज किया। इस पर अकाली पक्ष के पार्षद परमजीत सिंह पम्मी, दविंदर सिंह ठाकुर और राजदीप सिंह के साथ तीखी नोक-झोंक हुई। अकाली पार्षदों ने कड़े शब्दों में केवल सत्ताधारी पक्ष के पार्षदों के नाम लिखे जाने को पहल दिए जाने की बात कही। इस पर उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की ओर से दी गई ग्रांट पर विरोधी पार्षदों का कोई हक नहीं है। इस लिए उनके नाम लिखे जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता है।
कौन खर्च करता है नींव पत्थरों पर
मीटिंग दौरान जब नींव पत्थरों के संबंध में कांग्रेसी पार्षदों ने पूछा तो काउंसिल के एसओ ने बताया कि नींव पत्थरों के निर्माण का खर्चा काउंसिल नहीं उठाती। यह नींव पत्थर कहां से आते हैं और इनका खर्च कौन करता है। इसके बारे में उनको कुछ नहीं पता। जब कांग्रेसी पार्षदों ने काउंसिल की प्रधान कृष्णा देवी से नींव पत्थरों पर कांग्रेसी पार्षदों के नाम न लिखे जाने के संबंध में पूछा तो काउंसिल की प्रधान कृष्णा देवी कोई जवाब नहीं दे पाईं।
विज्ञापन
गत वर्ष तय लक्ष्य नहीं कर पाई हासिल
काउंसिल गत वर्ष 2015-16 दौरान तय किए लक्ष्य को पूरा करने में असफल रही। काउंसिल की ओर से वर्ष 2015-16 के लिए 7.78 करोड़ की आमदनी वाला बजट पेश किया गया था। जबकि इस वर्ष काउंसिल को केवल 6.18 करोड़ की आमदनी हो सकी। इस तरह काउंसिल को 1.59 करोड़ का घाटा सहन करना पड़ा। काउंसिल ने वर्ष 2015-16 दौरान विकास कार्यों पर 4.17 करोड़ रुपये खर्च करने की अनुमति दी। लेकिन, काउंसिल इस समय दौरान 29 मार्च 2016 तक केवल 2.98 करोड़ रुपये खर्च कर सकी। इस दौरान वर्ष 2016-17 वित्तीय वर्ष के लिए 7.95 करोड़ रुपये बजट हाउस में पेश किया गया।
ऐसे होगी काउंसिल को आमदनी
काउंसिल को इस वर्ष सब से ज्यादा आमदनी वैट से होगी। आंकड़ों अनुसार काउंसिल को वेट से 5.2 करोड़, संपत्ति टैक्स से 40 लाख, बिजली चुंगी से 45 लाख, एक्साइज ड्यूटी से 50 लाख, पानी के बिल से 35 लाख, रेंट से तहबाजारी से 7.5 लाख, लाइसेंस फीस से एक लाख, बिल्डिग एप्लीकेशन फीस से 75 लाख, इश्तहारों से 2 लाख और फुटकर साधनों से 20 लाख रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है। इसमें से 48 फीसदी खर्चा काउंसिल के स्टाफ पर खर्च होगा, जबकि 47.5 फीसदी शहर के विकास कार्यों पर खर्च होगा।
कहां होगा कितना खर्च
काउंसिल की ओर से सड़कों के निर्माण और मरम्मत पर 30 लाख रुपये, पार्को के निर्माण पर 5 लाख रुपये, स्लम क्षेत्रों के विकास के लिए 10 लाख रुपये, गलियां और नालियों पर 90 लाख रुपये, श्मशानघाट के निर्माण पर 10 लाख रुपये, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए 10 लाख रुपये, स्ट्रीट लाइटों पर 20 लाख रुपये, फुटकर कार्यों पर 36 लाख, गोशाला के लिए 10 लाख रुपये, स्ट्रीट लाइटों के बिल पर 30 लाख रुपये, ट्यूबवेलों के बिलों की अदायगी के लिए 95 लाख और वाटर सप्लाई प्रबंधों के लिए 30 लाख रुपये के खर्च की योजना तैयार की गई।
विज्ञापन
काउंसिल की मीटिंग दौरान उस समय हंगामा हुआ, जबकि कांग्रेसी पार्षद शिव वर्मा और भाजपा के पार्षद भानू प्रताप ने शहर में रखे जा रहे नींव पत्थरों पर पार्षदों के नाम लिखे जाने में किए जा रहे भेदभाव की प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त करनी चाही। इस दौरान शिव वर्मा ने कांग्रेसी पार्षदों के वार्डों में होने वाले कार्यों पर पार्षदों का नाम न लिखे जाने पर एतराज किया। इस पर अकाली पक्ष के पार्षद परमजीत सिंह पम्मी, दविंदर सिंह ठाकुर और राजदीप सिंह के साथ तीखी नोक-झोंक हुई। अकाली पार्षदों ने कड़े शब्दों में केवल सत्ताधारी पक्ष के पार्षदों के नाम लिखे जाने को पहल दिए जाने की बात कही। इस पर उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की ओर से दी गई ग्रांट पर विरोधी पार्षदों का कोई हक नहीं है। इस लिए उनके नाम लिखे जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता है।
विज्ञापन
कौन खर्च करता है नींव पत्थरों पर
मीटिंग दौरान जब नींव पत्थरों के संबंध में कांग्रेसी पार्षदों ने पूछा तो काउंसिल के एसओ ने बताया कि नींव पत्थरों के निर्माण का खर्चा काउंसिल नहीं उठाती। यह नींव पत्थर कहां से आते हैं और इनका खर्च कौन करता है। इसके बारे में उनको कुछ नहीं पता। जब कांग्रेसी पार्षदों ने काउंसिल की प्रधान कृष्णा देवी से नींव पत्थरों पर कांग्रेसी पार्षदों के नाम न लिखे जाने के संबंध में पूछा तो काउंसिल की प्रधान कृष्णा देवी कोई जवाब नहीं दे पाईं।
विज्ञापन
गत वर्ष तय लक्ष्य नहीं कर पाई हासिल
काउंसिल गत वर्ष 2015-16 दौरान तय किए लक्ष्य को पूरा करने में असफल रही। काउंसिल की ओर से वर्ष 2015-16 के लिए 7.78 करोड़ की आमदनी वाला बजट पेश किया गया था। जबकि इस वर्ष काउंसिल को केवल 6.18 करोड़ की आमदनी हो सकी। इस तरह काउंसिल को 1.59 करोड़ का घाटा सहन करना पड़ा। काउंसिल ने वर्ष 2015-16 दौरान विकास कार्यों पर 4.17 करोड़ रुपये खर्च करने की अनुमति दी। लेकिन, काउंसिल इस समय दौरान 29 मार्च 2016 तक केवल 2.98 करोड़ रुपये खर्च कर सकी। इस दौरान वर्ष 2016-17 वित्तीय वर्ष के लिए 7.95 करोड़ रुपये बजट हाउस में पेश किया गया।
ऐसे होगी काउंसिल को आमदनी
काउंसिल को इस वर्ष सब से ज्यादा आमदनी वैट से होगी। आंकड़ों अनुसार काउंसिल को वेट से 5.2 करोड़, संपत्ति टैक्स से 40 लाख, बिजली चुंगी से 45 लाख, एक्साइज ड्यूटी से 50 लाख, पानी के बिल से 35 लाख, रेंट से तहबाजारी से 7.5 लाख, लाइसेंस फीस से एक लाख, बिल्डिग एप्लीकेशन फीस से 75 लाख, इश्तहारों से 2 लाख और फुटकर साधनों से 20 लाख रुपये की आमदनी होने की उम्मीद है। इसमें से 48 फीसदी खर्चा काउंसिल के स्टाफ पर खर्च होगा, जबकि 47.5 फीसदी शहर के विकास कार्यों पर खर्च होगा।
कहां होगा कितना खर्च
काउंसिल की ओर से सड़कों के निर्माण और मरम्मत पर 30 लाख रुपये, पार्को के निर्माण पर 5 लाख रुपये, स्लम क्षेत्रों के विकास के लिए 10 लाख रुपये, गलियां और नालियों पर 90 लाख रुपये, श्मशानघाट के निर्माण पर 10 लाख रुपये, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए 10 लाख रुपये, स्ट्रीट लाइटों पर 20 लाख रुपये, फुटकर कार्यों पर 36 लाख, गोशाला के लिए 10 लाख रुपये, स्ट्रीट लाइटों के बिल पर 30 लाख रुपये, ट्यूबवेलों के बिलों की अदायगी के लिए 95 लाख और वाटर सप्लाई प्रबंधों के लिए 30 लाख रुपये के खर्च की योजना तैयार की गई।