मोहाली। स्वामित्व के दावों और कब्जे के विवादों से जुड़ा पारिवारिक भूमि विवाद मोहाली की अदालत में सुलझा लिया गया है। अतिरिक्त जिला न्यायाधीश की अदालत ने वीरवार को निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखकर लखबीर कौर के अपने देवर जसप्रीत सिंह के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया है। इस मामले में लखबीर कौर ने दावा किया था कि वह सेक्टर-61 स्थित एक घर की एकमात्र मालिक है। अपने देवर जसप्रीत सिंह को उसके रास्ते में बाधा डालने से रोकने के लिए स्थायी निषेधाज्ञा की मांग कर रही थी। दूसरी ओर, प्रतिवादी जसप्रीत सिंह ने अपनी मां की पंजीकृत वसीयत के आधार पर संपत्ति पर एकमात्र स्वामित्व का दावा किया था। लखबीर कौर ने प्रस्तुत जमाबंदी दस्तावेजों से साबित किया कि वह एकमात्र मालिक नहीं, बल्कि सह-भागीदार (प्रतिवादी सहित) थी। अदालत ने कानून के इस महत्वपूर्ण प्रावधान को दोहराया कि सिद्धांत रूप में, एक सह-भागीदार दूसरे सह-भागीदार के खिलाफ महज ‘रोक लगाने’ का मुकदमा दायर नहीं कर सकता, भले ही संपत्ति के एक हिस्से पर उसका कब्जा हो। अदालत ने कहा कि जब दो सह-भागीदारों के बीच कब्जे या अधिकारों को लेकर विवाद होता है, तो कानून के अनुसार सही समाधान केवल ‘शेयरों का मुकदमा’ दायर करना है, न कि साधारण ‘निषेधाज्ञा’ मांगना। अदालत ने पाया कि लखबीर कौर अपने अनन्य स्वामित्व के दावे को साबित करने में बुरी तरह विफल रही, जिसके कारण निचली अदालत का फैसला बिल्कुल सही था। इस फैसले से जसप्रीत सिंह को बड़ी राहत मिली है, जबकि लखबीर कौर की अपील खारिज कर दी गई है। यह मामला पंजाब भर के सह-भागीदारों को स्पष्ट संदेश देता है कि ऐसे विवादों का समाधान महज इंजक्शन ‘निषेधाज्ञा’ नहीं, बल्कि कानूनी रूप से बन रहा है।