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सुविधा : सिविल अस्पताल को मिलेंगे डॉक्टर, मर्ज होगा छूमंतर
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मोहाली। वीआईपी जिले के लोगों को इलाज के लिए अब किसी निजी अस्पताल जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मरीज को हर बीमारी का इलाज आधुनिक सुविधाओं से लेस डॉ. बीआर आंबेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (पहले जिला सिविल अस्पताल) में मिल जाएगी। यह बात मेडिकल कॉलेज की डायरेक्टर ऑफ प्रिंसिपल डॉ. भवनीत भारती ने कही। उन्होंने बताया कि विभाग ने 19 डॉक्टरों के पैनल को मंजूरी दे दी है। इनके आने के बाद बड़ी से बड़ी बीमारी का इलाज शहर में मिल जाएगा।
जानकारी के मुताबिक डॉ. बीआर आंबेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में लंबे समय से डॉक्टरों की भारी कमी है। इस कारण इलाज के लिए अस्पताल आने वालों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। डॉक्टरों की कमी का आलम यह है कि अस्पताल में आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर बाकी सभी सेवाएं दोपहर 3 बजे के बाद बंद हो जाती हैं। इसके बाद मरीज को अगर इलाज चाहिए तो उसे अगले दिन तक इंतजार करना पड़ता है।
रोज 1000 से अधिक लोगों की होती है ओपीडी
डॉ. बीआर आंबेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में प्रतिदिन एक हजार से अधिक लोग ओपीडी में पहुंचते हैं। वहीं डॉक्टरों की कमी के चलते लंबी कतारें लग जाती हैं। इसका असर यह होता है कि अधिकतर लोग ज्यादा देर तक कतार में खड़े न होकर बिना जांच करवाए लौट जाते हैं। लोगों की इन परेशानियों को देखते हुए विभाग द्वारा एक प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है।
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अधिकारियों ने किया था आकलन
अस्पताल में आने वाले मरीजों को इलाज न मिलने की शिकायतों के बाद सेहत विभाग के आलाधिकारियों की टीम ने दौरा किया। इस दौरान टीम के सदस्यों ने स्थिति का आकलन किया और साथ ही लोगों से इलाज को लेकर आ रही मुश्किलों को लेकर बातचीत की। वहीं लोगों से मिले सुझावों के बाद अधिकारियों की टीम ने अपनी रिपोर्ट बनाकर विभाग को सौंप दी थी।
क्या कहते हैं अधिकारी
अस्पताल में मरीजों की संख्या के मुताबिक डाक्टरों की भारी कमी है। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर विभाग को भेजा गया था। जहां से अभी 19 डॉक्टरों के पैनल को मंजूरी मिली है। जल्द ही ये डॉक्टर अस्पताल में अपना कार्यभार संभाल लेंगे। -डॉ. भवनीत भारती, प्रिंसिपल ऑफ डायरेक्टर, डॉ. बीआर आंबेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज
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जानकारी के मुताबिक डॉ. बीआर आंबेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में लंबे समय से डॉक्टरों की भारी कमी है। इस कारण इलाज के लिए अस्पताल आने वालों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। डॉक्टरों की कमी का आलम यह है कि अस्पताल में आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर बाकी सभी सेवाएं दोपहर 3 बजे के बाद बंद हो जाती हैं। इसके बाद मरीज को अगर इलाज चाहिए तो उसे अगले दिन तक इंतजार करना पड़ता है।
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रोज 1000 से अधिक लोगों की होती है ओपीडी
डॉ. बीआर आंबेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में प्रतिदिन एक हजार से अधिक लोग ओपीडी में पहुंचते हैं। वहीं डॉक्टरों की कमी के चलते लंबी कतारें लग जाती हैं। इसका असर यह होता है कि अधिकतर लोग ज्यादा देर तक कतार में खड़े न होकर बिना जांच करवाए लौट जाते हैं। लोगों की इन परेशानियों को देखते हुए विभाग द्वारा एक प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है।
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अधिकारियों ने किया था आकलन
अस्पताल में आने वाले मरीजों को इलाज न मिलने की शिकायतों के बाद सेहत विभाग के आलाधिकारियों की टीम ने दौरा किया। इस दौरान टीम के सदस्यों ने स्थिति का आकलन किया और साथ ही लोगों से इलाज को लेकर आ रही मुश्किलों को लेकर बातचीत की। वहीं लोगों से मिले सुझावों के बाद अधिकारियों की टीम ने अपनी रिपोर्ट बनाकर विभाग को सौंप दी थी।
क्या कहते हैं अधिकारी
अस्पताल में मरीजों की संख्या के मुताबिक डाक्टरों की भारी कमी है। इसके लिए प्रस्ताव बनाकर विभाग को भेजा गया था। जहां से अभी 19 डॉक्टरों के पैनल को मंजूरी मिली है। जल्द ही ये डॉक्टर अस्पताल में अपना कार्यभार संभाल लेंगे। -डॉ. भवनीत भारती, प्रिंसिपल ऑफ डायरेक्टर, डॉ. बीआर आंबेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज