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Mohali News: बदलता मौसम, बढ़ता खतरा... खांसी, सांस और लूज मोशन के पीड़ित बढ़े
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पीडियाट्रिक ओपीडी में रोज 25-30 बच्चे पहुंच रहे, व्हीजिंग व वायरल इन्फेक्शन के मरीज ज्यादा
मोहाली। मौसम में बदलाव के साथ बच्चों में खांसी, अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूआरआई), व्हीजिंग और लूज मोशन की परेशानी देखने को मिल रही है। एम्स मोहाली की पीडियाट्रिक ओपीडी में रोजाना करीब 25 से 30 बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा बच्चे खांसी, वायरल इन्फेक्शन और व्हीजिंग की शिकायत लेकर आ रहे हैं। इसके अलावा लूज मोशन के मामले भी सामने आ रहे हैं। इस मौसम में बच्चों में सांस और छाती से जुड़ी परेशानी में व्हीजिंग घरघराहट प्रमुख रूप से देखने को मिल रही है। डॉक्टरों के अनुसार मौसम में बदलाव के कारण कई बच्चों में सांस संबंधी लक्षण अचानक बढ़ सकते हैं। खासकर पहले से अस्थमा या सांस की परेशानी वाले बच्चों में समस्या ज्यादा बढ़ने की आशंका रहती है। संवाद
केस-1 : व्हीजिंग में सांस लेते समय घरघराहट
व्हीजिंग में बच्चे के सांस लेने के दौरान घरघराहट या सीटी जैसी आवाज सुनाई दे सकती है। कुछ बच्चों में इसके साथ खांसी, सीने में जकड़न या सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है। खासकर पहले से अस्थमा या सांस संबंधी परेशानी वाले बच्चों में लक्षण ज्यादा बढ़ सकते हैं। अगर बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो रही है तो मेडिकल जांच करवाना जरूरी है।
केस-2 : वायरल इन्फेक्शन में बुखार-खांसी वायरल इन्फेक्शन में बच्चों को बुखार, खांसी, नाक बहना और गले में खराश जैसे लक्षण हो सकते हैं। कई मामलों में यह संक्रमण कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। हर वायरल इन्फेक्शन में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। अभिभावकों को डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चों को एंटीबायोटिक नहीं देनी चाहिए।
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केस-3 : लूज मोशन के बाद कमजोरी ओपीडी में लूज मोशन की शिकायत लेकर भी बच्चे पहुंच रहे हैं। लगातार लूज मोशन होने पर शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। बच्चा ज्यादा सुस्त हो, पानी कम पी रहा हो या पेशाब कम आ रहा हो तो डिहाइड्रेशन का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
कोट
मौसम में बदलाव के दौरान बच्चों में वायरल इन्फेक्शन, खांसी, यूआरआई और व्हीजिंग के मामले बढ़ सकते हैं। इन दिनों पीडियाट्रिक ओपीडी में रोजाना करीब 25 से 30 बच्चे पहुंच रहे हैं। अभिभावकों को बच्चों में सांस लेने में परेशानी और डिहाइड्रेशन के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बच्चों को पर्याप्त तरल पदार्थ दें और बिना डॉक्टर की सलाह के दवा या एंटीबायोटिक न दें। -डॉ. साहिल विकास, बाल रोग विशेषज्ञ, फेज-6 एम्स मोहाली
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मोहाली। मौसम में बदलाव के साथ बच्चों में खांसी, अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (यूआरआई), व्हीजिंग और लूज मोशन की परेशानी देखने को मिल रही है। एम्स मोहाली की पीडियाट्रिक ओपीडी में रोजाना करीब 25 से 30 बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें सबसे ज्यादा बच्चे खांसी, वायरल इन्फेक्शन और व्हीजिंग की शिकायत लेकर आ रहे हैं। इसके अलावा लूज मोशन के मामले भी सामने आ रहे हैं। इस मौसम में बच्चों में सांस और छाती से जुड़ी परेशानी में व्हीजिंग घरघराहट प्रमुख रूप से देखने को मिल रही है। डॉक्टरों के अनुसार मौसम में बदलाव के कारण कई बच्चों में सांस संबंधी लक्षण अचानक बढ़ सकते हैं। खासकर पहले से अस्थमा या सांस की परेशानी वाले बच्चों में समस्या ज्यादा बढ़ने की आशंका रहती है। संवाद
केस-1 : व्हीजिंग में सांस लेते समय घरघराहट
व्हीजिंग में बच्चे के सांस लेने के दौरान घरघराहट या सीटी जैसी आवाज सुनाई दे सकती है। कुछ बच्चों में इसके साथ खांसी, सीने में जकड़न या सांस लेने में परेशानी भी हो सकती है। खासकर पहले से अस्थमा या सांस संबंधी परेशानी वाले बच्चों में लक्षण ज्यादा बढ़ सकते हैं। अगर बच्चे को सांस लेने में परेशानी हो रही है तो मेडिकल जांच करवाना जरूरी है।
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केस-2 : वायरल इन्फेक्शन में बुखार-खांसी वायरल इन्फेक्शन में बच्चों को बुखार, खांसी, नाक बहना और गले में खराश जैसे लक्षण हो सकते हैं। कई मामलों में यह संक्रमण कुछ दिनों में ठीक हो जाता है। हर वायरल इन्फेक्शन में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। अभिभावकों को डॉक्टर की सलाह के बिना बच्चों को एंटीबायोटिक नहीं देनी चाहिए।
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केस-3 : लूज मोशन के बाद कमजोरी ओपीडी में लूज मोशन की शिकायत लेकर भी बच्चे पहुंच रहे हैं। लगातार लूज मोशन होने पर शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। बच्चा ज्यादा सुस्त हो, पानी कम पी रहा हो या पेशाब कम आ रहा हो तो डिहाइड्रेशन का संकेत हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
कोट
मौसम में बदलाव के दौरान बच्चों में वायरल इन्फेक्शन, खांसी, यूआरआई और व्हीजिंग के मामले बढ़ सकते हैं। इन दिनों पीडियाट्रिक ओपीडी में रोजाना करीब 25 से 30 बच्चे पहुंच रहे हैं। अभिभावकों को बच्चों में सांस लेने में परेशानी और डिहाइड्रेशन के संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बच्चों को पर्याप्त तरल पदार्थ दें और बिना डॉक्टर की सलाह के दवा या एंटीबायोटिक न दें। -डॉ. साहिल विकास, बाल रोग विशेषज्ञ, फेज-6 एम्स मोहाली