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नव संवत के साथ चैत्र नवरात्र आज से, महामारी के चलते मंदिरों में नहीं होंगे भव्य आयोजन
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मोहाली। मंगलवार को प्रतिपदा (भारतीय नववर्ष) के साथ चैत्र नवरात्र की शुरुआत हो रही है। मां शक्ति की उपासना के साथ ही संवत 2078 की भी शुरुआत होगी। मंगलवार को ही वैसाखी है, जो खालसा पंथ का स्थापना दिवस है। कोरोना महामारी के चलते इस बार भी भव्य आयोजन नहीं हो पाएंगे। परंपराओं को जारी रखने के लिए मोहाली के मंदिरों व गुरुद्वारों में जरूरी इंतजाम कर लिए गए हैं।
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा यानी नव संवत तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है, जो नवमी तिथि तक चलती है। चैत्र नवरात्र 13 अप्रैल से शुरू होकर 21 अप्रैल (राम-नवमी) तक रहेंगे। इस बार नवरात्र मंगलवार से शुरू होंगे। नवरात्र में माता का वाहन घोड़ा है। घोड़े की सवारी से माता के आगमन को नए वर्ष में सामाजिक राजनैतिक और प्राकृतिक उठा-पटक कराने वाला माना गया है। हालांकि विकास कार्यों के लिए इसे शुभ माना जाता है। इस बार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन मृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग भी होंगे। कंद्रीय मंदिर पुजारी परिषद के अध्यक्ष पंडित जगदंबा प्रसाद रतूड़ी का कहना है कि नवरात्र में जो लोग अष्टमी को कन्या पूजन करते हैं, वे 20 अप्रैल को कन्या पूजन करें और जो लोग नवमी वाले दिन कन्या पूजन करते हैं, वे सभी लोग 21 अप्रैल को करें।
मंगलवार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी पहले नवरात्र वाले दिन सुबह से ही अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग शुरू हो जाएंगे। सुबह 7:38 से 9:34 के बीच स्थिर लग्न (वृष) होगा। घट स्थापना के लिए स्थिर लग्न सबसे अच्छा समय माना गया है।
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क्रेंदीय पुजारी परिषद के संस्थापक पंडित सुंदर लाल बिजलवान का कहना है कि ब्रह्मपुराण के अनुसार ब्रह्मा जी ने इसी तिथि को सृष्टि की रचना की थी। स्मृति कौस्तुंभकार के मतानुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रेवती नक्षत्र के विष्कुंभ योग में भगवान विष्णु ने मत्स्यावतार लिया था। सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के संवत्सर का यहीं से आरंभ माना जाता है। इस प्रकार न केवल पौराणिक बल्कि ऐतिहासिक रूप से भी इस तिथि का बहुत महत्व है।
स्वास्थ्य प्रभावित व मध्यम रहेगा कारोबार
इस संवत को राजा व मंत्री दोनों मंगल हैं। यह संवत राक्षस संवत्सर कहलाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार संवत 2078 में राजनैतिक कलह बढ़ेगी, रोगों के कारण लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित होगा व कारोबार मध्यम रहेगा। वर्ष राजा एवं मंत्री के पद एक ही ग्रह के पास हों उस वर्ष में राजनेता निरंकुश, स्वार्थपूर्ण एवं मनमाना आचरण करते हैं। अग्निकांड, भूकंप, बाढ़ आदि प्राकृतिक प्रकोप तथा सांप्रदायिक हिंसा एवं जातीय उपद्रव होने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि अच्छी वर्षा होने से चावल, गेहूं, चने, गन्ना, हरी सब्जियों व फलों का उत्पादन अच्छा रहेगा।
सैनिटाइज करवाए मंदिर
मोहाली के मंदिरों में चैत्र नवरात्र के लिए तैयारियां कर ली गई हैं। मंदिरों को सैनेटाइज करवाया गया है। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए सभी आयोजनों को सीमित रखा जा रहा है। पुजारी परिषद के प्रधान पंडित जगदंबा प्रसाद रतूड़ी ने बताया कि शहर के मंदिरों में सुबह 8 बजे घट स्थापना की जाएगी। नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन पूजा अर्चना होगी व शाम के समय महिला मंडलियां सीमित संख्या में दुर्गा सप्तशती का पाठ कर संकीर्तन करेंगी। नवमी पर परंपरा अनुसार हवन कर कंजक पूजन किया जाएगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि मंदिर में मास्क पहन कर आएं व शारीरिक दूरी के नियम का पालन करें। मंदिरों में सैनेटाइजर की व्यवस्था की गई है। फेज 3बी2 के हनुमान लक्ष्मी नारायण मंदिर में कमेटी के प्रधान प्रेम कुमार शर्मा ज्याति प्रज्ज्वलित कर घट स्थापना करवाएंगे।
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चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा यानी नव संवत तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है, जो नवमी तिथि तक चलती है। चैत्र नवरात्र 13 अप्रैल से शुरू होकर 21 अप्रैल (राम-नवमी) तक रहेंगे। इस बार नवरात्र मंगलवार से शुरू होंगे। नवरात्र में माता का वाहन घोड़ा है। घोड़े की सवारी से माता के आगमन को नए वर्ष में सामाजिक राजनैतिक और प्राकृतिक उठा-पटक कराने वाला माना गया है। हालांकि विकास कार्यों के लिए इसे शुभ माना जाता है। इस बार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन मृत सिद्धि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग भी होंगे। कंद्रीय मंदिर पुजारी परिषद के अध्यक्ष पंडित जगदंबा प्रसाद रतूड़ी का कहना है कि नवरात्र में जो लोग अष्टमी को कन्या पूजन करते हैं, वे 20 अप्रैल को कन्या पूजन करें और जो लोग नवमी वाले दिन कन्या पूजन करते हैं, वे सभी लोग 21 अप्रैल को करें।
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मंगलवार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा यानी पहले नवरात्र वाले दिन सुबह से ही अमृत सिद्धि और सर्वार्थ सिद्धि योग शुरू हो जाएंगे। सुबह 7:38 से 9:34 के बीच स्थिर लग्न (वृष) होगा। घट स्थापना के लिए स्थिर लग्न सबसे अच्छा समय माना गया है।
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क्रेंदीय पुजारी परिषद के संस्थापक पंडित सुंदर लाल बिजलवान का कहना है कि ब्रह्मपुराण के अनुसार ब्रह्मा जी ने इसी तिथि को सृष्टि की रचना की थी। स्मृति कौस्तुंभकार के मतानुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रेवती नक्षत्र के विष्कुंभ योग में भगवान विष्णु ने मत्स्यावतार लिया था। सम्राट चंद्रगुप्त विक्रमादित्य के संवत्सर का यहीं से आरंभ माना जाता है। इस प्रकार न केवल पौराणिक बल्कि ऐतिहासिक रूप से भी इस तिथि का बहुत महत्व है।
स्वास्थ्य प्रभावित व मध्यम रहेगा कारोबार
इस संवत को राजा व मंत्री दोनों मंगल हैं। यह संवत राक्षस संवत्सर कहलाएगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार संवत 2078 में राजनैतिक कलह बढ़ेगी, रोगों के कारण लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित होगा व कारोबार मध्यम रहेगा। वर्ष राजा एवं मंत्री के पद एक ही ग्रह के पास हों उस वर्ष में राजनेता निरंकुश, स्वार्थपूर्ण एवं मनमाना आचरण करते हैं। अग्निकांड, भूकंप, बाढ़ आदि प्राकृतिक प्रकोप तथा सांप्रदायिक हिंसा एवं जातीय उपद्रव होने की संभावना बढ़ जाती है। हालांकि अच्छी वर्षा होने से चावल, गेहूं, चने, गन्ना, हरी सब्जियों व फलों का उत्पादन अच्छा रहेगा।
सैनिटाइज करवाए मंदिर
मोहाली के मंदिरों में चैत्र नवरात्र के लिए तैयारियां कर ली गई हैं। मंदिरों को सैनेटाइज करवाया गया है। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए सभी आयोजनों को सीमित रखा जा रहा है। पुजारी परिषद के प्रधान पंडित जगदंबा प्रसाद रतूड़ी ने बताया कि शहर के मंदिरों में सुबह 8 बजे घट स्थापना की जाएगी। नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन पूजा अर्चना होगी व शाम के समय महिला मंडलियां सीमित संख्या में दुर्गा सप्तशती का पाठ कर संकीर्तन करेंगी। नवमी पर परंपरा अनुसार हवन कर कंजक पूजन किया जाएगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की कि मंदिर में मास्क पहन कर आएं व शारीरिक दूरी के नियम का पालन करें। मंदिरों में सैनेटाइजर की व्यवस्था की गई है। फेज 3बी2 के हनुमान लक्ष्मी नारायण मंदिर में कमेटी के प्रधान प्रेम कुमार शर्मा ज्याति प्रज्ज्वलित कर घट स्थापना करवाएंगे।