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मौज भी, बोझ भी : छुट्टियों में आराम कम, विंटर होमवर्क ज्यादा

Wed, 24 Dec 2025 01:27 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 24 Dec 2025 01:27 AM IST
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Both fun and a burden: Less relaxation, more winter homework during the holidays
मोहाली। सर्दी की छुट्टियों की घंटी बजते ही विद्यार्थियों के चेहरे पर आई मुस्कान उस समय फीकी पड़ने लगती है, जब उन्हें अंतिम पलों में विंटर होमवर्क की मोटी-मोटी फाइलें और प्रोजेक्ट्स सौंपे जाते हैं। इस बार सरकारी और निजी दोनों ही स्कूलों में छुट्टियों का कैलेंडर अलग-अलग है, लेकिन होमवर्क का बोझ एक समान है।
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सरकारी स्कूलों की छुट्टियां 24 से 31 दिसंबर तक यानी मात्र एक सप्ताह की है, जबकि कई निजी स्कूलों में छुट्टियों का सिलसिला 8 जनवरी तक चलेगा। इस छोटी-बड़ी अवधि के बावजूद दोनों तरह के स्कूलों के विद्यार्थी अवकाश की खुशी के साथ पुस्तकों का बोझ भी ढो रहे हैं। होलीडे होमवर्क के नाम पर विद्यार्थियों को सिर्फ किताबी अभ्यास ही नहीं, बल्कि मॉडल बनाना, चार्ट तैयार करना, पर्यावरण प्रोजेक्ट और क्रिएटिव राइटिंग जैसे गृह कार्य दिए गए हैं।
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छात्र-छात्राओं और अभिभावकों की प्रतिक्रिया इस बोझ को लेकर मिलीजुली है। कई माता-पिता का मानना है कि यह होमवर्क बच्चों को नियमित अध्ययन से जोड़े रखने और समय के सदुपयोग के लिए जरूरी है। वहीं, बच्चों और कुछ शिक्षाविदों की राय अलग है। कक्षा सातवीं की विद्यार्थी निशिमा बतातीं है कि स्कूल में तो बस होमवर्क बांटकर छुट्टियां करा दी गईं। दो किताबों की समरी लिखनी है, साइंस प्रोजेक्ट बनाना है। हर दिन 20 गणित के सवाल हल करने हैं। छुट्टियों में मौज-मस्ती के लिए वक्त ही नहीं बचेगा। अनन्या जो कक्षा दसवीं की छात्रा है, का कहना है कि इस समय उन पर बोर्ड परीक्षा की तैयारी का दबाव है।
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एक तरफ कोचिंग और स्व-अध्ययन का समय चाहिए। मनोवैज्ञानिक डॉ. गुरमुख सिंह के अनुसार छुट्टियों का मुख्य उद्देश्य बच्चों को शैक्षणिक दबाव से मानसिक विश्राम देना और नए रचनात्मक अनुभवों के लिए प्रेरित करना होना चाहिए। अगर हम उन पर पढ़ाई का और अधिक भार डालेंगे, तो इससे उनकी रुचि और सीखने की क्षमता दोनों प्रभावित हो सकती हैं। होमवर्क गुणवत्ता पर ध्यान देने की जरूरत है, मात्रा पर नहीं। मनोचिकित्सक डॉ. गुरमुख सिंह के अनुसार छुट्टियों का मुख्य उद्देश्य बच्चों को शैक्षणिक दबाव से मानसिक विश्राम देना और नए रचनात्मक अनुभवों के लिए प्रेरित करना होना चाहिए। अगर हम उन पर पढ़ाई का और अधिक भार डालेंगे, तो इससे उनकी रुचि और सीखने की क्षमता दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
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