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प्रोड्यूसर फराह खान के बिंदास बोल- मैं केवल वहीं चीज करती है, जिन्हें करना मुझे अच्छा लगता है
Sat, 21 Sep 2019 01:35 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 21 Sep 2019 01:35 PM IST
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फराह खान
- फोटो : अमर उजाला
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बॉलीवुड की प्रसिद्ध फिल्म डायरेक्टर, प्रोडयूसर व कोरियोग्राफर फराह खान शुक्रवार को शहर पहुंची। मौका था इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस में आयोजित लीडरशिप सम्मिट का। इस मौके उन्होंने कला के पीछे वाणिज्य विषय पर अपनी राय रखी। इतना ही नहीं वहां पर मौजूद लोगों के सवालों के जवाब भी दिए। उन्होंने अपने जवाबों से सबका दिल जीत लिया।
इस दौरान उन्होंने सिनेमा के पीछे के कई पहलुओं को उजागर किया। साथ ही इस क्षेत्र में अपने आपको कैसे स्थापित किया, इस पर भी उन्होंने खुलकर बात रखी। उन्होंने कहा कि सौभाग्य से मेरी रुचि व्यावसायिक फिल्मों में है। इसलिए जब लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या मैं इन फिल्मों को बनाने के लिए अपनी आत्मा बेच रही हूं।
तो मैं उन्हें बताती हूं कि मैं ऐसा बिल्कुल नहीं कर रही हूं, क्योंकि मैं उसी चीज को करती हूं जिसे करना मुझे अच्छा लगता है। वहीं, जब उनसे पूछा गया कि वह किस तरह की विरासत अपने पीछे छोड़ना चाहती है तो इस विषय पर उनका जवाब था कि वह चाहती है कि लोग उसे गर्व से एक महिला निर्देशक के रूप में याद करे। इस दौरान उन्होंने लोगों के सवालों के जवाब भी दिए।
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उन्होंने कहा कि वही काम करे, जिसे आपका दिल और आत्मा पसंद करता है। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर फिल्मों से समाज सीखता तो मुन्ना भाई एमबीबीएस के बाद पूरी सोसायटी को ही अच्छा हो जाना चाहिए था। समाज फिल्मों से सीखता है या फिल्म समाज से सीखता है, इसका कोई जवाब नहीं है। ये ठीक ऐसा ही सवाल है कि अंडा पहले आया या मुर्गी।
उन्होंने माना कि बहुत से राइटर या वर्कर्स कुछ समय के लिए अपना भाग्य आजमा कर लौट आते हैं। उन्होंने कहा कि अब कॅरियर के ऑप्शन बढ़ रहे हैं। अब पढ़ाई पहले जैसी नहीं रही है। अब जो एकेडमिक में अच्छा नहीं है, वह भी अन्य कोर्स करके आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि अब मौकों की कमी नहीं है।
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इस दौरान उन्होंने सिनेमा के पीछे के कई पहलुओं को उजागर किया। साथ ही इस क्षेत्र में अपने आपको कैसे स्थापित किया, इस पर भी उन्होंने खुलकर बात रखी। उन्होंने कहा कि सौभाग्य से मेरी रुचि व्यावसायिक फिल्मों में है। इसलिए जब लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या मैं इन फिल्मों को बनाने के लिए अपनी आत्मा बेच रही हूं।
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तो मैं उन्हें बताती हूं कि मैं ऐसा बिल्कुल नहीं कर रही हूं, क्योंकि मैं उसी चीज को करती हूं जिसे करना मुझे अच्छा लगता है। वहीं, जब उनसे पूछा गया कि वह किस तरह की विरासत अपने पीछे छोड़ना चाहती है तो इस विषय पर उनका जवाब था कि वह चाहती है कि लोग उसे गर्व से एक महिला निर्देशक के रूप में याद करे। इस दौरान उन्होंने लोगों के सवालों के जवाब भी दिए।
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उन्होंने कहा कि वही काम करे, जिसे आपका दिल और आत्मा पसंद करता है। इस दौरान उन्होंने कहा कि अगर फिल्मों से समाज सीखता तो मुन्ना भाई एमबीबीएस के बाद पूरी सोसायटी को ही अच्छा हो जाना चाहिए था। समाज फिल्मों से सीखता है या फिल्म समाज से सीखता है, इसका कोई जवाब नहीं है। ये ठीक ऐसा ही सवाल है कि अंडा पहले आया या मुर्गी।
उन्होंने माना कि बहुत से राइटर या वर्कर्स कुछ समय के लिए अपना भाग्य आजमा कर लौट आते हैं। उन्होंने कहा कि अब कॅरियर के ऑप्शन बढ़ रहे हैं। अब पढ़ाई पहले जैसी नहीं रही है। अब जो एकेडमिक में अच्छा नहीं है, वह भी अन्य कोर्स करके आगे बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि अब मौकों की कमी नहीं है।