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Mohali News: एफसीआई गोदाम में तैनात टीए अशोक कुमार की जमानत याचिका मंजूर
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मोहाली। एफसीआई गोदाम में चावल रखवाने की सुविधा के लिए रिश्वत लेने के मामले में तकनीकी सहायक (टीए) अशोक कुमार गिरफ्तारी के बाद जेल में बंद हैं। उसकी ओर से लगाई गई जमानत याचिका पर सीबीआई कोर्ट में मंगलवार को सुनवाई हुई। अदालत ने सरकारी और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अदालत की शर्तों पर आरोपी की जमानत याचिका मंजूर कर ली है।
आरोपी के वकील ने अदालत में तर्क रखा कि आरोपी को शिकायतकर्ता से 27 हजार रुपये का अनुचित लाभ मांगते और स्वीकार करते हुए गिरफ्तार किया गया था। आरोपी वर्तमान मामले में 30 अप्रैल 2025 से हिरासत में है। बरामदगी भी हो चुकी है। उसकी आवाज का नमूना और साथ ही हस्तलेख हस्ताक्षर पहले ही सीबीआई द्वारा प्राप्त किए जा चुके हैं और जांच पूरी होने में लंबा समय लगेगा। आरोपी की अब जांच के लिए जरूरत नहीं है। मामले की सुनवाई में काफी समय लगेगा। आवेदक को और अधिक कारावास में रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा, इसलिए इसकी जमानत याचिका मंजूर की जाए।
इसके बाद अदालत ने शर्तों के साथ उसकी जमानत याचिका मंजूर कर ली। आरोपी को 50 हजार रुपये की राशि में व्यक्तिगत बांड और समान राशि में एक जमानतदार प्रस्तुत करना होगा। वह हर सुनवाई पर अदालत में पेश होगा। वह अपनी रिहाई के सात दिनों के भीतर न्यायालय में अपना पासपोर्ट जमा कर देगा, अन्यथा अगर उसके पास पासपोर्ट नहीं है तो वह शपथ पत्र दाखिल करेगा और न्यायालय की अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं करेगा।
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आरोपी के वकील ने अदालत में तर्क रखा कि आरोपी को शिकायतकर्ता से 27 हजार रुपये का अनुचित लाभ मांगते और स्वीकार करते हुए गिरफ्तार किया गया था। आरोपी वर्तमान मामले में 30 अप्रैल 2025 से हिरासत में है। बरामदगी भी हो चुकी है। उसकी आवाज का नमूना और साथ ही हस्तलेख हस्ताक्षर पहले ही सीबीआई द्वारा प्राप्त किए जा चुके हैं और जांच पूरी होने में लंबा समय लगेगा। आरोपी की अब जांच के लिए जरूरत नहीं है। मामले की सुनवाई में काफी समय लगेगा। आवेदक को और अधिक कारावास में रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा, इसलिए इसकी जमानत याचिका मंजूर की जाए।
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इसके बाद अदालत ने शर्तों के साथ उसकी जमानत याचिका मंजूर कर ली। आरोपी को 50 हजार रुपये की राशि में व्यक्तिगत बांड और समान राशि में एक जमानतदार प्रस्तुत करना होगा। वह हर सुनवाई पर अदालत में पेश होगा। वह अपनी रिहाई के सात दिनों के भीतर न्यायालय में अपना पासपोर्ट जमा कर देगा, अन्यथा अगर उसके पास पासपोर्ट नहीं है तो वह शपथ पत्र दाखिल करेगा और न्यायालय की अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं करेगा।
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