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Mohali News: आशा व मिड-डे-मील वर्करों ने किया प्रदर्शन, मानदेय दोगुना करने की मांग
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मोहाली। मानदेय में बढ़ोतरी, न्यूनतम वेतन और सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा की मांग को लेकर हजारों आशा, फैसिलिटेटर और मिड-डे-मील वर्करों ने मंगलवार को प्रदर्शन किया। उन्होंने मुख्यमंत्री के चंडीगढ़ स्थित आवास की ओर मार्च किया, जिसे पुलिस ने सीमा पर रोक दिया। प्रशासन ने 9 सितंबर को कैबिनेट सब-कमेटी के साथ बैठक का आश्वासन दिया, जिसके बाद मार्च समाप्त हुआ।
मानदेय वर्कर्स मोर्चा पंजाब के नेतृत्व में रैली मोहाली के फेज-8 स्थित अंब साहिब गुरुद्वारा के पास शुरू हुई। मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ते समय पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच खींचतान हुई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने चुनाव से पहले मानदेय दोगुना करने का वादा किया था। लेकिन सरकार बनने के बाद इन वादों पर अमल नहीं हुआ। साढ़े चार साल बीतने के बावजूद मानदेय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई। वर्कर नेताओं ने कहा कि कम मानदेय में महंगाई के बीच परिवार चलाना मुश्किल है। योजना कर्मियों को नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। उन्होंने सरकार से सभी स्कीम वर्करों को न्यूनतम वेतन के दायरे में लाने की मांग की।
प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने मानदेय दोगुना करने की मांग की। उन्होंने पिछले साढ़े चार साल का बकाया भी देने को कहा। सेवानिवृत्ति पर पांच लाख रुपये ग्रेच्युटी और नौ हजार रुपये मासिक पेंशन देने की मांग उठाई गई। ईएसआई व ईपीएफ सुविधा लागू करने की भी मांग की गई। आशा और मिड-डे-मील वर्करों के लिए पांच लाख रुपये के मुफ्त बीमा की मांग भी की गई।
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आंदोलन को समर्थन और चेतावनी
कर्मचारी संगठनों और किसान नेताओं ने भी वर्करों के आंदोलन का समर्थन किया। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रशासन द्वारा 9 सितंबर को कैबिनेट सब-कमेटी के साथ बैठक का आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शनकारी शांत हुए। यह बैठक 9 सितंबर को होनी तय हुई है।
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मानदेय वर्कर्स मोर्चा पंजाब के नेतृत्व में रैली मोहाली के फेज-8 स्थित अंब साहिब गुरुद्वारा के पास शुरू हुई। मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ते समय पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच खींचतान हुई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी ने चुनाव से पहले मानदेय दोगुना करने का वादा किया था। लेकिन सरकार बनने के बाद इन वादों पर अमल नहीं हुआ। साढ़े चार साल बीतने के बावजूद मानदेय में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई। वर्कर नेताओं ने कहा कि कम मानदेय में महंगाई के बीच परिवार चलाना मुश्किल है। योजना कर्मियों को नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। उन्होंने सरकार से सभी स्कीम वर्करों को न्यूनतम वेतन के दायरे में लाने की मांग की।
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प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारियों ने मानदेय दोगुना करने की मांग की। उन्होंने पिछले साढ़े चार साल का बकाया भी देने को कहा। सेवानिवृत्ति पर पांच लाख रुपये ग्रेच्युटी और नौ हजार रुपये मासिक पेंशन देने की मांग उठाई गई। ईएसआई व ईपीएफ सुविधा लागू करने की भी मांग की गई। आशा और मिड-डे-मील वर्करों के लिए पांच लाख रुपये के मुफ्त बीमा की मांग भी की गई।
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आंदोलन को समर्थन और चेतावनी
कर्मचारी संगठनों और किसान नेताओं ने भी वर्करों के आंदोलन का समर्थन किया। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रशासन द्वारा 9 सितंबर को कैबिनेट सब-कमेटी के साथ बैठक का आश्वासन मिलने के बाद प्रदर्शनकारी शांत हुए। यह बैठक 9 सितंबर को होनी तय हुई है।