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एम्स पीडियाट्रिक वार्ड : उद्घाटन के बाद भी इलाज शुरू नहीं, 50 बेड का वार्ड अब तक गैर-ऑपरेशनल
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मोहाली। बाल दिवस (14 नवंबर) पर धूमधाम से उद्घाटन किया गया एम्स मोहाली का नया पीडियाट्रिक वार्ड आज भी मरीजों के इंताजार में है। डेढ़ महीने से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी प्रशासनिक उदासीनता और तकनीकी देरी के चलते 50 बिस्तरों का यह वार्ड चालू नहीं हो सका है।डायरेक्टर प्रिंसिपल एवं एमएस डॉ. नवदीप सैनी ने बताया कि सोमवार सुबह पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रमुख (एचओडी) के साथ एक समीक्षा बैठक होगी, जिसमें वार्ड को चालू करने की अंतिम तैयारियों और समय सीमा पर चर्चा की जाएगी।
इसकी वजह से अस्पताल के पुराने वार्डों पर अत्यधिक भीड़ और दबाव बना हुआ है, जिससे मरीजों को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन ने अब तक कई बार वार्ड चालू करने की समय सीमा तय की, लेकिन हर बार यह टाल दी गई। पिछले आश्वासन के अनुसार वार्ड 23 दिसंबर तक चालू होना था, लेकिन यह संभव नहीं हुआ। अस्पताल के एसडीओ दिनेश कुमार ने बताया कि उनके हिस्से का तकनीकी काम पूरा हो चुका है, लेकिन फायर एग्जिट के आकार को बढ़ाने का काम अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि यह काम कभी भी हो सकता है और बाकी अस्पताल प्रशासन वार्ड चालू कर सकता है। वहीं, एम्स के मेडिकल सुपरिटेंडेंट (एमएस) डॉ. नवदीप सैनी ने एक नई समय सीमा बताकर कहा था कि पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रमुख से बातचीत के बाद उम्मीद है कि यह वार्ड अगले तीन-चार दिनों में शुरू हो जाएगा। लेकिन ये उम्मीद भी पूरी न हो सकी।
ठेकेदार का दावा : काम पूरा, प्रशासन शिफ्ट कर सकता है
शनिवार को ठेकेदार विकास मित्तल ने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से सारा काम पूरा कर लिया गया है। सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं और फायर अलार्म भी पहले ही लग चुका है। मित्तल ने कहा कि हमने अस्पताल प्रशासन से कहा है कि वो शिफ्ट कर सकते हैं। रैंप बनाने का काम मेरे टेंडर में शामिल नहीं है। बाकी सब कुछ पूरा है।
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पुराने वार्डों पर बढ़ रहा दबाव
नए वार्ड के लंबे समय तक चल रहे काम का सीधा असर अस्पताल की मौजूदा सुविधाओं पर पड़ रहा है। पुराने वार्डों में बेड की कमी और भीड़ के कारण मरीजों और उनके परिजनों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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इसकी वजह से अस्पताल के पुराने वार्डों पर अत्यधिक भीड़ और दबाव बना हुआ है, जिससे मरीजों को गंभीर असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन ने अब तक कई बार वार्ड चालू करने की समय सीमा तय की, लेकिन हर बार यह टाल दी गई। पिछले आश्वासन के अनुसार वार्ड 23 दिसंबर तक चालू होना था, लेकिन यह संभव नहीं हुआ। अस्पताल के एसडीओ दिनेश कुमार ने बताया कि उनके हिस्से का तकनीकी काम पूरा हो चुका है, लेकिन फायर एग्जिट के आकार को बढ़ाने का काम अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि यह काम कभी भी हो सकता है और बाकी अस्पताल प्रशासन वार्ड चालू कर सकता है। वहीं, एम्स के मेडिकल सुपरिटेंडेंट (एमएस) डॉ. नवदीप सैनी ने एक नई समय सीमा बताकर कहा था कि पीडियाट्रिक्स विभाग के प्रमुख से बातचीत के बाद उम्मीद है कि यह वार्ड अगले तीन-चार दिनों में शुरू हो जाएगा। लेकिन ये उम्मीद भी पूरी न हो सकी।
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ठेकेदार का दावा : काम पूरा, प्रशासन शिफ्ट कर सकता है
शनिवार को ठेकेदार विकास मित्तल ने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से सारा काम पूरा कर लिया गया है। सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं और फायर अलार्म भी पहले ही लग चुका है। मित्तल ने कहा कि हमने अस्पताल प्रशासन से कहा है कि वो शिफ्ट कर सकते हैं। रैंप बनाने का काम मेरे टेंडर में शामिल नहीं है। बाकी सब कुछ पूरा है।
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पुराने वार्डों पर बढ़ रहा दबाव
नए वार्ड के लंबे समय तक चल रहे काम का सीधा असर अस्पताल की मौजूदा सुविधाओं पर पड़ रहा है। पुराने वार्डों में बेड की कमी और भीड़ के कारण मरीजों और उनके परिजनों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।