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एरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट : गमाडा ने गांवों में लगाए नोटिस, भड़के किसान- कहा, जबरन हो रहा जमीन अधिग्रहण
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मोहाली। एयरपोर्ट के पास विकसित किए जाने वाले गमाडा के महत्वाकांक्षी एरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट के विस्तार को लेकर जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसमें बड़़ी, पत्तों, किशनपुरा, कुरड़ी, मटरां, सियाऊ, बाकरपुर और छत्त गांवों की कुल 3553 एकड़ जमीन को अधिग्रहित करने की पुष्टि कर संबंधित गांवों में नोटिस चिपका दिया है। इस कारण किसानों में रोष बढ़ गया है। भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने भूमि अधिग्रहण कानून 2013 की धारा-19 के तहत यह नोटिस जारी किया है। किसानों को इसकी जानकारी देने के लिए गांवों में मुनादी भी करवाई जा रही है, वहीं नोटिस की प्रतियां रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से घर-घर भेजी जा रही हैं।
इससे पहले 24 मार्च को भी सेक्शन-19 के तहत सार्वजनिक सूचना जारी की गई थी। इसमें जमीन का कब्जा लेने और माप-जोख (पैमाइश) की प्रक्रिया शुरू करने का जिक्र किया गया था। गमाडा की ओर से किसानों को 30 दिन के भीतर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए कहा गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया के तहत पहले के चरणों में प्राप्त आपत्तियों की सुनवाई पूरी कर ली गई है और अब अधिग्रहण की पुष्टि की जा रही है। निर्धारित समय सीमा के बाद 23 अप्रैल के बाद किसानों को जमीन के मुआवजे से संबंधित अवार्ड सुनाए जाने की संभावना है। किसानों को नकद मुआवजा या लैंड पूलिंग का विकल्प भी दिया गया है।
वहीं दूसरी ओर, प्रभावित गांवों के किसान इस कार्रवाई का लगातार विरोध कर रहे हैं। किसान नेताओं जग रूप सिंह कुरड़ी, गुरप्रताप सिंह बड़़ी, बलजीत सिंह, हरमिंदर सिंह, किरपाल सिंह सियाऊ और अन्य ने आरोप लगाया कि उनकी आपत्तियों पर न तो सुनवाई हुई और न ही समाधान किया गया। उनका कहना है कि गमाडा जल्दबाजी में जबरन जमीन अधिग्रहण कर रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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इससे पहले 24 मार्च को भी सेक्शन-19 के तहत सार्वजनिक सूचना जारी की गई थी। इसमें जमीन का कब्जा लेने और माप-जोख (पैमाइश) की प्रक्रिया शुरू करने का जिक्र किया गया था। गमाडा की ओर से किसानों को 30 दिन के भीतर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने के लिए कहा गया है। अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया के तहत पहले के चरणों में प्राप्त आपत्तियों की सुनवाई पूरी कर ली गई है और अब अधिग्रहण की पुष्टि की जा रही है। निर्धारित समय सीमा के बाद 23 अप्रैल के बाद किसानों को जमीन के मुआवजे से संबंधित अवार्ड सुनाए जाने की संभावना है। किसानों को नकद मुआवजा या लैंड पूलिंग का विकल्प भी दिया गया है।
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वहीं दूसरी ओर, प्रभावित गांवों के किसान इस कार्रवाई का लगातार विरोध कर रहे हैं। किसान नेताओं जग रूप सिंह कुरड़ी, गुरप्रताप सिंह बड़़ी, बलजीत सिंह, हरमिंदर सिंह, किरपाल सिंह सियाऊ और अन्य ने आरोप लगाया कि उनकी आपत्तियों पर न तो सुनवाई हुई और न ही समाधान किया गया। उनका कहना है कि गमाडा जल्दबाजी में जबरन जमीन अधिग्रहण कर रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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