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प्रशासन के शहर में आतिशबाजी की मंडी न सजने देने के दावे हुए छूमंतर

Sun, 27 Oct 2019 01:42 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 27 Oct 2019 01:42 AM IST
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administrative decision of not sell crackers illegal is failure
कुराली। चंडीगढ़, पंजाब एवं हिमाचल प्रदेश राज्यों में आतिशबाजी की थोक एवं रिटेल मंडी के नाम से मशहूर कुराली में आतिशबाजी का कारोबार कर रहे वैध और अवैध व्यापारियों द्वारा उच्च अदालत एवं राज्य सरकार द्वारा आतिशबाजी बेचने एवं उसका भंडारण करने के लिए बनाए गए नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए रिहायशी एवं भीड़भाड़ वाले स्थानों पर न सिर्फबहुत बड़े स्तर पर आतिशबाजी का कारोबार किया जा रहा है बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से समय-समय पर शहर में अवैध आतिशबाजी का कारोबार न होने देने के किए जा रहे बड़े-बड़े दावों की पोल खोलकर रख दी है।
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बता दें कि लगभग पिछले एक महीने से जिला प्रशासन दावे कर रहा है कि शहर में किसी भी आतिशबाजी विक्रेता को सरकारी हिदायतें से बाहर जाकर आतिशबाजी का कारोबार करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। ऐसा करने वाले के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के किए जा रहे दावों के बावजूद शहर के मोरिंडा मार्ग एवं बडाली मार्ग की हर दूसरी दुकान पर चल रहा आतिशबाजी का वैध और अवैध कारोबार प्रशासनिक अधिकारियों का मुंह चढ़ा रहा है।
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रामलीला के लिए मंजूरी देने में सख्ती पर अब उतनी नहीं
यहां यह भी बताना उचित होगा कि शहर में हर साल खेली जाने वाली रामलीला को प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से सुरक्षा प्रबंधों में कमी के कारण रामलीला करवाने वाले क्लबों को इसलिए रामलीला नहीं करने दी गई क्योंकि उन्होंने रामलीला करवाने की सरकार से परमिशन नहीं ली थी। सरकार से देरी के साथ परमिशन मिलने के कारण शहर में रामलीला का मंचन दो दिन देरी के साथ शुरू हुआ था और सरकारी हिदायतों के अनुसार रामलीला करवा रहे दोनों क्लबों को अपने निश्चित स्थानों को बदलना पडा था क्योंकि वह स्थान सरकारी नियमों को पूरा नहीं करता था। यहां सोचने वाली बात है कि जहां जान-माल के नुक्सान होने का डर नाममात्र का था, वहां तो प्रशासन ने इतनी सख्ती की वहीं जहां हर समय जान-माल का खतरा है, वहां कम सख्ती की जा रही है। लोग तो कह रहे हैं कि जनता और धनवान के लिए कानून क्या अलग-अलग हैं।
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