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Mohali News: फेज-3बी2 में हादसे का खतरा, 50 फुट ऊंचा पेड़ झुका, आसपास की जमीन धंसी, प्रशासन मौन
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मोहाली। फेज- 3बी2 में एक बार फिर कार्मेल कॉन्वेंट जैसी घटना की आशंका गहराने लगी है। मकान नंबर 1466, 1467, 1468 और 1447 के पास लगभग 50 फुट ऊंचा पेड़ पिछले एक साल से खतरनाक ढंग से झुका हुआ है, हालिया बारिश ने इसकी जड़ों को और कमजोर कर दिया है। पेड़ के नीचे से गुजर रही स्टॉर्म वॉटर ड्रेन धंस चुकी है, जिससे मिट्टी बैठ रही है और एक बड़ा गड्ढा (सिंकहोल) भी बन गया है। निवासियों का कहना है कि ड्रेन धंसने और पेड़ झुकने की शिकायतें कई बार नगर निगम और संबंधित विभागों तक पहुंचाई गईं, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। चूहों का प्रकोप भी बढ़ गया है, जिससे पेड़ की जड़ों और आसपास की संरचना पर और असर पड़ रहा है।
स्थानीय निवासी बताते हैं कि यह पेड़ अब बिजली की लाइनों और पास खड़े बिजली के खंभों के लिए भी खतरा बन गया है। यदि यह पेड़ गिरा, तो न सिर्फ 3-4 पोल और आसपास के मकान प्रभावित होंगे, बल्कि राहगीर, बच्चे और खड़ी गाड़ियां भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
कार्रवाई नहीं हुई तो होगा बड़ा हादसा
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार मिट्टी धंसने, ड्रेन के टूटने और पेड़ के झुकने से यह क्षेत्र संभावित हादसे का केंद्र बन चुका है। लोगों को डर है कि अगर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई नहीं की, तो यह मामला चंडीगढ़ के कार्मेल कॉन्वेंट हादसे की तरह बड़ा रूप ले सकता है। गौरतलब है कि उस घटना में एक विशाल पेड़ गिरने से स्कूल में अफरा-तफरी मच गई थी। बाद में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने चंडीगढ़ प्रशासन को 1.5 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था और प्रशासन की ईश्वर की इच्छा वाली दलील को खारिज करते हुए उसे लापरवाही का दोषी ठहराया था। निवासियों ने मांग की है कि नगर निगम और वन विभाग तत्काल निरीक्षण कर पेड़ को सुरक्षित ढंग से हटाएं या सहारा दें, ताकि किसी अनहोनी से पहले स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
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स्थानीय निवासी बताते हैं कि यह पेड़ अब बिजली की लाइनों और पास खड़े बिजली के खंभों के लिए भी खतरा बन गया है। यदि यह पेड़ गिरा, तो न सिर्फ 3-4 पोल और आसपास के मकान प्रभावित होंगे, बल्कि राहगीर, बच्चे और खड़ी गाड़ियां भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।
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कार्रवाई नहीं हुई तो होगा बड़ा हादसा
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार मिट्टी धंसने, ड्रेन के टूटने और पेड़ के झुकने से यह क्षेत्र संभावित हादसे का केंद्र बन चुका है। लोगों को डर है कि अगर प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई नहीं की, तो यह मामला चंडीगढ़ के कार्मेल कॉन्वेंट हादसे की तरह बड़ा रूप ले सकता है। गौरतलब है कि उस घटना में एक विशाल पेड़ गिरने से स्कूल में अफरा-तफरी मच गई थी। बाद में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने चंडीगढ़ प्रशासन को 1.5 करोड़ रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था और प्रशासन की ईश्वर की इच्छा वाली दलील को खारिज करते हुए उसे लापरवाही का दोषी ठहराया था। निवासियों ने मांग की है कि नगर निगम और वन विभाग तत्काल निरीक्षण कर पेड़ को सुरक्षित ढंग से हटाएं या सहारा दें, ताकि किसी अनहोनी से पहले स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।
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