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नए सेक्टरों को जगी विकास की उम्मीद
Mohali
Updated Wed, 09 May 2012 12:00 PM IST
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मोहाली। नगर निगम को बहाल करने के हाईकोर्ट के फैसले से नए सेक्टरों के लोगों को विकास की उम्मीद जगी है। इनमें कुछ पूरी तरह विकसित सेक्टर हैं, तो कुछ अभी विकसित हो रहे हैं। फिलहाल यह सेक्टर गमाडा के पास हैं। यहां तक कि काउंसिल भवन जिस सेक्टर में है, वह इलाका भी गमाडा के पास है।
नगर निगम के अस्तित्व में आने के बाद निवर्तमान नगर काउंसिल की हदें बढ़ाई जानी तय मानी जा रही हैं। क्योंकि निगम बनाने के लिए आवश्यक आबादी और वार्ड चाहिए। ऐसे में सबसे पहले शहर के उन सेक्टरों के नगर निगम में आने की उम्मीद है, जोकि अभी गमाडा के पास हैं। उसके बाद शहर में स्थित गांवों कुंभड़ा, सोहाना, बलौंगी को भी निगम में शामिल किया जा सकता है। जिसके बाद इन इलाकों का विकास और तेजी से हो सकेगा।
सेक्टर 66-69 अब पूरी तरह विकसित हो चुके हैं। लेकिन अभी तक गमाडा ने इन्हें नगर निगम को नहीं सौंपा है। यहां के लोग लंबे समय से मांग कर रहे थे कि उनके सेक्टर निगम के हवाले किए जाएं। क्योंकि लोगों का कोई जनप्रतिनिधि न होने से उन्हें कई तकनीकी समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं। इलाके में छोटे-छोटे विकास कार्यों के लिए जहां उन्हें गमाडा अफसरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। वहीं, राशन कार्ड, मैरिज रजिस्ट्रेशन, आयु प्रमाणपत्र जैसे कागजात हासिल करने के लिए उनके पास कोई जनप्रतिनिधि नहीं है, जो कि वैरीफाई कर सके। इसी तरह सेक्टर 76-80 अभी विकसित हो रहे हैं। यहां के लोगों की भी इसी तरह की समस्याएं हैं।
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नगर निगम के अस्तित्व में आने के बाद निवर्तमान नगर काउंसिल की हदें बढ़ाई जानी तय मानी जा रही हैं। क्योंकि निगम बनाने के लिए आवश्यक आबादी और वार्ड चाहिए। ऐसे में सबसे पहले शहर के उन सेक्टरों के नगर निगम में आने की उम्मीद है, जोकि अभी गमाडा के पास हैं। उसके बाद शहर में स्थित गांवों कुंभड़ा, सोहाना, बलौंगी को भी निगम में शामिल किया जा सकता है। जिसके बाद इन इलाकों का विकास और तेजी से हो सकेगा।
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सेक्टर 66-69 अब पूरी तरह विकसित हो चुके हैं। लेकिन अभी तक गमाडा ने इन्हें नगर निगम को नहीं सौंपा है। यहां के लोग लंबे समय से मांग कर रहे थे कि उनके सेक्टर निगम के हवाले किए जाएं। क्योंकि लोगों का कोई जनप्रतिनिधि न होने से उन्हें कई तकनीकी समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं। इलाके में छोटे-छोटे विकास कार्यों के लिए जहां उन्हें गमाडा अफसरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। वहीं, राशन कार्ड, मैरिज रजिस्ट्रेशन, आयु प्रमाणपत्र जैसे कागजात हासिल करने के लिए उनके पास कोई जनप्रतिनिधि नहीं है, जो कि वैरीफाई कर सके। इसी तरह सेक्टर 76-80 अभी विकसित हो रहे हैं। यहां के लोगों की भी इसी तरह की समस्याएं हैं।
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