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मोहाली के बेटे ने लिमका बुक में दर्ज कराया नाम
Mohali
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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मोहाली। कैंसर जैसे घातक रोगों के प्रति 32 देशों की यात्रा कर लोगों को जागरूक करने वाले शहर के बेटे इंदरपाल सिंह शेरगिल के नाम एक और उपलब्धि जुड़ गई है। इस मुहिम के चलते उनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो गया है। वहीं, अब इंदरपाल ने इस घातक रोग से लोगों को बचाने के लिए रोको कैंसर संस्था के सहयोग से मोगा में 200 बिस्तर का कैंसर अस्पताल बनाने के प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया है। यह अस्पताल बैसाखी तक बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएगा। इस अस्पताल की विशेषता यह रहेगी कि इसमें विदेशों के माहिर डॉक्टर मरीजों का इलाज करेंगे। वहीं, जहां तक हो सके लोगों का इलाज भी मुफ्त में होगा। उन्होंने इस नेक काम के लिए एनआरआईज से भी सहयोग देने की अपील की है।
मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान उन्होंने बताया कि इसके अलावा उनकी संस्था की तरफ से पांच मोबाइल बसें भी चलाई गई हैं। जो कि पंजाब के गांव-गांव जाकर लोगों की कैंसर की जांच करती हैं। उन्होंने बताया कि कोई भी व्यक्ति अपने गांव के सारे लोगों कैंसर की स्क्रीनिंग कराना चाहता है, तो उनकी संस्था के पास 50 हजार जमा कराएं तो यह बसें संबंधित व्यक्ति के गांव में जाकर सारे व्यक्तियों क ा कैंसर की स्क्रीनिंग करेगी। उन्होंने बताया कि अप्रैल तक यह बसें बुक हैं। वहीं, अपनी यात्रा के बारे में शेरगिल ने बताया कि 28 सितंबर को ग्लासगो से बाई रोड जागरूकता यात्रा शुरू की गई थी। जो कि हाल ही में 32 देशों की 22 हजार किलोमीटर का सफर पूरा कर गोवा में संपन्न हुई। जिसके बाद वह अपने घर मोहाली पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि कार अब घर पर ही रहेगी। जबकि वह वापस विदश्ेा जा रहे हैं।
-- बॉक्स
बीबीसी पर दिखेगी डॉक्यूमेंट्री, यादें लेगी किताब का रूप
इंदरपाल ने बताया कि उन्होंने अकेले ही यात्रा की है। इस दौरान उनकी कार में दो कैमरे लगे थे। जिसमें सफर का एक-एक पल दर्ज है। अब यह सारा सफर एक डॉक्यूमेंट्री के रूप में बीबीसी पर दिखाया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने अपने सफर की यादों को सहजेने के लिए किताब लिखना भी शुरू कर दी है। जिसे उन्होंने जर्नी ऑफ होप का नाम दिया है। जनवरी तक यह पूरी तरह तैयार हो जाएगी।
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मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान उन्होंने बताया कि इसके अलावा उनकी संस्था की तरफ से पांच मोबाइल बसें भी चलाई गई हैं। जो कि पंजाब के गांव-गांव जाकर लोगों की कैंसर की जांच करती हैं। उन्होंने बताया कि कोई भी व्यक्ति अपने गांव के सारे लोगों कैंसर की स्क्रीनिंग कराना चाहता है, तो उनकी संस्था के पास 50 हजार जमा कराएं तो यह बसें संबंधित व्यक्ति के गांव में जाकर सारे व्यक्तियों क ा कैंसर की स्क्रीनिंग करेगी। उन्होंने बताया कि अप्रैल तक यह बसें बुक हैं। वहीं, अपनी यात्रा के बारे में शेरगिल ने बताया कि 28 सितंबर को ग्लासगो से बाई रोड जागरूकता यात्रा शुरू की गई थी। जो कि हाल ही में 32 देशों की 22 हजार किलोमीटर का सफर पूरा कर गोवा में संपन्न हुई। जिसके बाद वह अपने घर मोहाली पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि कार अब घर पर ही रहेगी। जबकि वह वापस विदश्ेा जा रहे हैं।
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बीबीसी पर दिखेगी डॉक्यूमेंट्री, यादें लेगी किताब का रूप
इंदरपाल ने बताया कि उन्होंने अकेले ही यात्रा की है। इस दौरान उनकी कार में दो कैमरे लगे थे। जिसमें सफर का एक-एक पल दर्ज है। अब यह सारा सफर एक डॉक्यूमेंट्री के रूप में बीबीसी पर दिखाया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने अपने सफर की यादों को सहजेने के लिए किताब लिखना भी शुरू कर दी है। जिसे उन्होंने जर्नी ऑफ होप का नाम दिया है। जनवरी तक यह पूरी तरह तैयार हो जाएगी।
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