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सेहत विभाग की 18 टीमें 24 घंटे कर रहीं सैंपल लेने का काम

Tue, 04 Aug 2020 02:21 AM IST
Mohali Bureau मोहाली ब्‍यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2020 02:21 AM IST
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18 teams of health department doing sample work for 24 hours
मोहाली। ट्राइसिटी का हिस्सा होने के साथ ही मोहाली व्यापारिक व औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण केंद्र है। लिहाजा कम्यूनिटी ट्रांसमिशन की स्टेज में कोरोना के खिलाफ जंग यहां उतनी सहज नहीं है। यही वजह है कि मोहाली के सेहत विभाग को अतिरिक्त सजगता बरतते हुए व्यापक रणनीति के साथ काम करना पड़ रहा है। इसी कड़ी में 9 फ्लू क्लीनिक बनाए गए हैं। जहां 18 टीमें 24 घंटे काम कर रही हैं। इसके साथ ही एयरपोर्ट, रेल व सड़क के जरिए आने वाले यात्रियों पर नजर रखी जा रही है। हरियाणा व हिमाचल से लगती सीमा पर अतिरिक्त चौकसी बरती जा रही है।
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मोहाली ट्राइसिटी का हिस्सा है। यहां कई बड़ी आईटी कंपनियों के साथ ही ट्रैक्टर व रेलवे पार्ट्स इंडस्ट्री भी है। ऐसे में यहां चंडीगढ़ व पंजाब, हरियाणा व हिमाचल सहित देश के अन्य हिस्सों से लोगों का आना जाना रहता है। इन हालातों के बीच कम्यूनिटी ट्रांसमिशन की स्टेज में सेहत विभाग को अतिरिक्त चौकसी बरतनी पड़ रही है। मोहाली सेहत विभाग की टीमें रोजाना 450 से 500 लोगों के सैंपल ले रही हैं। यह आंकड़े मोहाली में करोना वायरस के संक्रमण की स्थिति को साफ करते हैं जिनसे निपटने के लिए सेहत विभाग की टीमें 24 घंटे काम कर रही हैं। इसके साथ ही सिविल प्रशासन व पुलिस विभाग भी करोना के खिलाफ जारी जंग में डटा हुआ है।
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सीमा पर की जा रही अतिरिक्त चौकसी
मोहाली के सिविल सर्जन डॉ. मनजीत सिंह का कहना है कि मोहाली के औद्योगिक, व्यापारिक व रिहाइशी महत्व को देखते हुए यहां करोना के खिलाफ लड़ाई एक अहम जंग बन गई है। ट्राइसिटी का हिस्सा व महत्वपूर्ण जिला होने के कारण मोहाली में न सिर्फ पंजाब बल्कि चंडीगढ़, हरियाणा व हिमाचल बल्कि देश के अन्य हिस्सों से लोगों का आना जाना लगा हुआ है। इंटरनेशनल एयरपोर्ट होने के कारण बाहरी यात्रियों की आमद भी हो रही है। ऐसे में हमें व्यापक रणनीति बनाकर काम करना पड़ रहा है। इसमें बड़े स्तर पर टेस्टिंग, ट्रेसिंग व मॉनिटरिंग, रैपिड एक्शन के साथ मोहाली की अन्य जिलों व राज्यों से लगती सीमा पर अतिरिक्त चौकसी को शामिल किया गया है। इसके साथ ही लोगों को मानवीय संपर्क के खतरे सहित अन्य बचाव उपायों के बारे में लगातार जागरूक किया जा रहा है।
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राज्य का पहला कंटेनमेंट जोन बना था जवाहरपुर
करोना वायरस के संक्रमण के पंजाब में फैलाव के शुरूआती दौर में ही मोहाली के गांव जवाहरपुर को कंटेनमेंट जोन घोषित करना पड़ा था। जवाहरपुर पंजाब का पहला ऐसा पहला क्षेत्र था, जिसे संक्रमण के चलते कंटेनमेंट जोन घोषित किया था। 2500 लोगों की आबादी वाले गांव जवाहरपुर में संक्रमण के फैलाव को काबू करने के बारे में सिविल सर्जन डॉ. मनजीत सिंह का कहना है कि सेहत विभाग के साथ सिविल प्रशासन व पुलिस का संयुक्त रैपिड एक्शन इस गांव को बचाने की रणनीति का अहम हिस्सा साबित हुआ। जवाहरपुर में करोना संक्रमण के 46 मामले सामने आए थे। हर 48 घंटे में गांव का डॉक्टरी सर्वे किया गया था। संक्रमण के लक्षण वाले लोगों को तेजी से क्वारंटीन किया गया वहीं, गांव में 350 पीसीआर टेस्ट व 200 रैपिड टेस्ट किए गए।
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