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शिअद में उथल-पुथल: पंथक एकता के नाम पर बढ़ी अंदरूनी खींचतान

Wed, 24 Dec 2025 07:12 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 24 Dec 2025 07:12 PM IST
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Turmoil in SAD: Internal power struggle intensifies in the name of Panthic unity.
-अकाली दल बादल और अकाली दल पुनर्गठन के बीच बढ़ती तनावपूर्ण राजनीति
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-वरिष्ठ नेताओं में नाराजगी और संभावित विलय की चर्चाओं ने पार्टी में हलचल
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पंकज शर्मा
अमृतसर। पंजाब की अकाली राजनीति आगामी दिनों में बड़े राजनीतिक भूचाल की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के विभिन्न गुटों में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आने लगी है। एक ओर पंथक एकता के नाम पर चर्चाएं तेज हुई हैं, वहीं दूसरी ओर इस अभियान ने अकाली दल बादल और अकाली दल पुनर्गठन में असंतोष और रोष को जन्म दिया है।
सूत्रों के अनुसार अकाली दल पुनर्गठन के कई वरिष्ठ नेता अपने और अपने बच्चों के राजनीतिक भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्हें लगता है कि मौजूदा ढांचे में उनकी राजनीतिक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं है। इसी कारण आधा दर्जन से अधिक नेता सुखबीर सिंह बादल के सीधे संपर्क में बताए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि कुछ नेताओं ने पंथक एकता के नाम पर सार्वजनिक तौर पर अकाली एकता का ढिंढोरा भी पीटना शुरू कर दिया है। इस कदम से दोनों गुटों में वर्करों और नेताओं के बीच नाराजगी बढ़ी है। पुनर्गठन खेमे के कई नेता इसे पीठ पीछे की राजनीति करार दे रहे हैं।
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अकाली दल पुनर्गठन की हालिया कार्यकारिणी बैठक में वरिष्ठ नेता ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने नाराजगी जाहिर करते हुए त्यागपत्र देने की पेशकश तक की थी, हालांकि बाद में वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप से मामला फिलहाल शांत हुआ।
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दोनों अकाली गुटों के विलय की संभावना भी बढ़ी
सूत्रों का कहना है कि अकाल तख्त साहिब के माध्यम से पंथक एकता के नाम पर दोनों अकाली गुटों के विलय की संभावना भी बढ़ रही है। ऐसे में पुनर्गठन खेमे के कई नेता बादल समूह में लौट सकते हैं। वहीं, कुछ नेता मानते हैं कि सुखबीर सिंह बादल की अध्यक्षता छोड़ने के बाद ही वास्तविक पंथक एकता संभव है। कुल मिलाकर शिअद की राजनीति निर्णायक मोड़ पर खड़ी है और आने वाले दिनों में पंथक एकता की आड़ में चल रही अंदरूनी राजनीति पार्टी की दिशा तय कर सकती है।
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