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Ludhiana News: पंजाब के स्कूलों में धमकी दहशत फैलाने की कोशिश, सतर्क रहने की जरूरत

Mon, 15 Dec 2025 06:31 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 15 Dec 2025 06:31 PM IST
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There are attempts to spread threats and fear in Punjab schools; vigilance is needed.
-भारतीय सेना के रिटायर्ड कैप्टन राजिंदर सिंह लिट्ट बोले- कॉल्स का उद्देश्य मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना
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कंवरपाल
हलवारा। पंजाब में एक के बाद एक धमकी भरे फोन कॉल्स और संदेशों ने स्कूलों में दहशत का माहौल बना दिया है। सोमवार को जालंधर में भी कई स्कूलों को विस्फोटक सामग्री से संबंधित धमकियां मिलीं, जिसके बाद सरकार और प्रशासन ने सुरक्षा को लेकर आवश्यक कदम उठाए। हालांकि, इन धमकियों के बाद कोई विस्फोटक सामग्री बरामद नहीं हुई, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर से सुरक्षा के मुद्दे को खड़ा कर दिया। इन घटनाओं ने न केवल छात्रों और अभिभावकों में डर पैदा किया, बल्कि एक गंभीर सवाल भी उठाया कि आखिरकार इन धमकियों के पीछे का उद्देश्य क्या है।
भारतीय सेना के तोपखाना रेजिमेंट के रिटायर्ड कैप्टन राजिंदर सिंह लिट्ट से इस मुद्दे पर विशेष बातचीत की गई। उन्होंने कहा कि ऐसे धमकी भरे संदेश और कॉल्स कई बार पाकिस्तान जैसे देशों द्वारा मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए दिए जाते हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान अपनी कमजोरी महसूस कर रहा है और वह पंजाब के युवाओं को भड़काकर दहशत फैलाने की कोशिश कर सकता है। इसके साथ ही, गैंगस्टर समूह भी इन धमकियों का इस्तेमाल अपनी आपराधिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कर सकते हैं, जैसे कि फिरौती वसूलने या नशा व हथियार तस्करी के धंधे को बढ़ावा देना।
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मनोवैज्ञानिक रणनीति और पुलिस की भूमिका
कैप्टन लिट्ट ने कहा कि हालांकि भारत की तीनों सेनाओं और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों को धमकी भरे संदेश आमतौर पर मिलते रहते हैं, लेकिन इन धमकियों को तभी सार्वजनिक किया जाता है जब आम नागरिकों की जान को खतरा हो। जब स्कूलों, सार्वजनिक संस्थाओं या नेताओं को धमकी मिलती है, तो मीडिया में इन घटनाओं की रिपोर्टिंग से समाज में भय का वातावरण बन जाता है।
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स्कूलों को बंद करना आवश्यक कदम
राजिंदर सिंह लिट्ट ने कहा कि स्कूलों को बंद करना कोई अतिप्रतिक्रिया नहीं थी, बल्कि यह राज्य का संवैधानिक दायित्व था। बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और इस मामले में जोखिम की कोई गुंजाइश नहीं हो सकती। उन्होंने बताया कि कई बार अपराधी अपनी पहचान छिपाने के लिए और सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया को परखने के लिए इस तरह की धमकियां देते हैं। यही नहीं, डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से गुमनाम संदेश भेजना अपराधियों के लिए अब और भी आसान हो गया है, क्योंकि इससे उन्हें पकड़ने के जोखिम में कमी आती है।


साइबर फोरेंसिक जांच और पारदर्शिता की आवश्यकता
कैप्टन लिट्ट ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के अपराधों के स्रोत का पता लगाने के लिए त्वरित साइबर फोरेंसिक जांच अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को इन धमकियों के स्रोत का पता लगाने के लिए सख्ती से काम करना चाहिए और साथ ही जनता के साथ पारदर्शी संवाद भी स्थापित करना चाहिए। जब जनता को सही जानकारी मिलती है, तो घबराहट और अफवाहों पर काबू पाया जा सकता है।
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