{"_id":"694d4cfac61116cf050e5050","slug":"the-move-to-sell-the-assets-of-power-companies-is-being-strongly-opposed-gobindgarh-news-c-284-1-ptl1001-10525-2025-12-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ludhiana News: बिजली निगमों की संपत्तियों को बेचने के कदम का कड़ा विरोध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ludhiana News: बिजली निगमों की संपत्तियों को बेचने के कदम का कड़ा विरोध
विज्ञापन
-पावर सेक्टर में मनमानी और तदर्थवाद रोकने को दखल दें सीएम मान: एआईपीईएफ -
-- -
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने पंजाब के मुख्यमंत्री से पावर सेक्टर में बढ़ती मनमानी, तदर्थवाद और राजनीतिक हस्तक्षेप को रोकने के लिए तत्काल दखल देने की अपील की है। फेडरेशन ने बिजली निगमों की स्थिरता बनाए रखने, तकनीकी नेतृत्व कायम रखने और गलत फैसलों को पलटने की मांग की है।
आईपीईएफ के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि पावर सेक्टर में वरिष्ठ इंजीनियरों और अधिकारियों के मनमाने ट्रांसफर और सस्पेंशन से तकनीकी अखंडता और संस्थागत स्थिरता प्रभावित हो रही है। उन्होंने इसे गलत प्रबंधन और बदले की भावना से प्रेरित करार दिया। फेडरेशन ने इन आदेशों को तुरंत रद्द करने का अनुरोध किया। फेडरेशन ने पावरकाम और ट्रांसको की संपत्तियों की बिक्री का भी कड़ा विरोध किया। उनका कहना है कि ये संपत्तियां भविष्य में ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी हैं। संपत्तियों की बिक्री से निगमों की वित्तीय स्थिति कमजोर होगी और यह बिजली अधिनियम 2003 के प्रावधानों का उल्लंघन है।
सीएमडी नियुक्तियों और तकनीकी नेतृत्व में छेड़छाड़ पीएसईबी के बंटवारे के समय दोनों निगमों में सीएमडी और निदेशकों की नियुक्ति तकनीकी योग्यता के आधार पर तय की गई थी। फेडरेशन ने कहा कि अब सचिव स्तर के IAS अधिकारियों की नियुक्ति और अनुभव मानदंडों में ढील से संस्थागत व्यावसायिकता खतरे में है। उन्होंने नियमित चयन प्रक्रिया के माध्यम से पूर्णकालिक टेक्नोक्रेट सीएमडी की शीघ्र नियुक्ति की मांग की।
विज्ञापन
बिजली (संशोधन) बिल-2025 का विरोध
फेडरेशन ने केंद्र सरकार से बिजली (संशोधन) बिल-2025 को वापस लेने की भी अपील की। उनका कहना है कि यह बिल राज्य सरकारों की निर्णय प्रक्रिया और स्वायत्तता को कमजोर करता है, जिससे प्राइवेट कंपनियों को फायदा होगा और आम जनता पर महंगे टैरिफ का दबाव बढ़ेगा। फेडरेशन ने चेतावनी दी कि यदि राज्य और केंद्र सरकार इस पर तुरंत ध्यान नहीं देती, तो इससे पावर सेक्टर की दीर्घकालिक स्थिरता और उपभोक्ताओं के हितों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
विरोध के मुख्य बिंदु
-पावर सेक्टर में मनमानी ट्रांसफर और सस्पेंशन से तकनीकी स्थिरता खतरे में।
-पावरकाम और ट्रांसको की संपत्तियों की बिक्री पर आपत्ति।
-सीएमडी नियुक्ति में तकनीकी योग्यता की अनदेखी।
-बिजली (संशोधन) बिल-2025 से राज्य सरकार की स्वायत्तता कमजोर होगी।
-फेडरेशन ने राज्य सरकार और केंद्र से तत्काल दखल की मांग की।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (एआईपीईएफ) ने पंजाब के मुख्यमंत्री से पावर सेक्टर में बढ़ती मनमानी, तदर्थवाद और राजनीतिक हस्तक्षेप को रोकने के लिए तत्काल दखल देने की अपील की है। फेडरेशन ने बिजली निगमों की स्थिरता बनाए रखने, तकनीकी नेतृत्व कायम रखने और गलत फैसलों को पलटने की मांग की है।
आईपीईएफ के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा कि पावर सेक्टर में वरिष्ठ इंजीनियरों और अधिकारियों के मनमाने ट्रांसफर और सस्पेंशन से तकनीकी अखंडता और संस्थागत स्थिरता प्रभावित हो रही है। उन्होंने इसे गलत प्रबंधन और बदले की भावना से प्रेरित करार दिया। फेडरेशन ने इन आदेशों को तुरंत रद्द करने का अनुरोध किया। फेडरेशन ने पावरकाम और ट्रांसको की संपत्तियों की बिक्री का भी कड़ा विरोध किया। उनका कहना है कि ये संपत्तियां भविष्य में ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन प्रोजेक्ट्स के लिए जरूरी हैं। संपत्तियों की बिक्री से निगमों की वित्तीय स्थिति कमजोर होगी और यह बिजली अधिनियम 2003 के प्रावधानों का उल्लंघन है।
विज्ञापन
सीएमडी नियुक्तियों और तकनीकी नेतृत्व में छेड़छाड़ पीएसईबी के बंटवारे के समय दोनों निगमों में सीएमडी और निदेशकों की नियुक्ति तकनीकी योग्यता के आधार पर तय की गई थी। फेडरेशन ने कहा कि अब सचिव स्तर के IAS अधिकारियों की नियुक्ति और अनुभव मानदंडों में ढील से संस्थागत व्यावसायिकता खतरे में है। उन्होंने नियमित चयन प्रक्रिया के माध्यम से पूर्णकालिक टेक्नोक्रेट सीएमडी की शीघ्र नियुक्ति की मांग की।
विज्ञापन
बिजली (संशोधन) बिल-2025 का विरोध
फेडरेशन ने केंद्र सरकार से बिजली (संशोधन) बिल-2025 को वापस लेने की भी अपील की। उनका कहना है कि यह बिल राज्य सरकारों की निर्णय प्रक्रिया और स्वायत्तता को कमजोर करता है, जिससे प्राइवेट कंपनियों को फायदा होगा और आम जनता पर महंगे टैरिफ का दबाव बढ़ेगा। फेडरेशन ने चेतावनी दी कि यदि राज्य और केंद्र सरकार इस पर तुरंत ध्यान नहीं देती, तो इससे पावर सेक्टर की दीर्घकालिक स्थिरता और उपभोक्ताओं के हितों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।
विरोध के मुख्य बिंदु
-पावर सेक्टर में मनमानी ट्रांसफर और सस्पेंशन से तकनीकी स्थिरता खतरे में।
-पावरकाम और ट्रांसको की संपत्तियों की बिक्री पर आपत्ति।
-सीएमडी नियुक्ति में तकनीकी योग्यता की अनदेखी।
-बिजली (संशोधन) बिल-2025 से राज्य सरकार की स्वायत्तता कमजोर होगी।
-फेडरेशन ने राज्य सरकार और केंद्र से तत्काल दखल की मांग की।