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मनरेगा संशोधन बिल काला कानून, गरीबों और ग्रामीण मजदूरों पर पड़ेगा भारी : सौंद
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चंडीगढ़। पंजाब के कैबिनेट मंत्री तरुणप्रीत सिंह सौंद ने केंद्र सरकार की नई विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (VB-GRAM) को काला कानून करार दिया। उन्होंने कहा कि यह योजना गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों, अनुसूचित जाति समुदाय और ग्रामीण मजदूरों को बुरी तरह प्रभावित करेगी, जो जीविका के लिए मनरेगा पर निर्भर हैं।
सौंद ने आरोप लगाया कि केंद्र एक ही तीर से दो निशाने साध रहा है। पहला, गारंटीशुदा रोजगार को कमजोर करना और दूसरा, राज्यों पर वित्तीय बोझ डालकर संघीय ढांचे पर हमला करना। उन्होंने बताया कि केंद्र का दावा है कि नई योजना 125 दिनों का रोजगार मुहैया कराएगी, जबकि वास्तविकता में पिछले साल औसतन केवल 45 दिन का काम उपलब्ध कराया गया। मंत्री ने बताया कि पहले अकुशल मजदूरी के लिए पूरा फंड केंद्र द्वारा दिया जाता था, और सामग्री की लागत 75:25 के अनुपात में साझा होती थी। नई योजना में इसे बदलकर 60:40 कर दिया गया है।
सौंद ने केंद्र पर मनरेगा को कमजोर करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह गरीबों और मजदूरों के हितों के खिलाफ है और इसे वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने चेताया कि राज्य सरकार इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाएगी और मनरेगा के अधिकारों की रक्षा करेगी।
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सौंद ने आरोप लगाया कि केंद्र एक ही तीर से दो निशाने साध रहा है। पहला, गारंटीशुदा रोजगार को कमजोर करना और दूसरा, राज्यों पर वित्तीय बोझ डालकर संघीय ढांचे पर हमला करना। उन्होंने बताया कि केंद्र का दावा है कि नई योजना 125 दिनों का रोजगार मुहैया कराएगी, जबकि वास्तविकता में पिछले साल औसतन केवल 45 दिन का काम उपलब्ध कराया गया। मंत्री ने बताया कि पहले अकुशल मजदूरी के लिए पूरा फंड केंद्र द्वारा दिया जाता था, और सामग्री की लागत 75:25 के अनुपात में साझा होती थी। नई योजना में इसे बदलकर 60:40 कर दिया गया है।
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सौंद ने केंद्र पर मनरेगा को कमजोर करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह गरीबों और मजदूरों के हितों के खिलाफ है और इसे वापस लिया जाना चाहिए। उन्होंने चेताया कि राज्य सरकार इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाएगी और मनरेगा के अधिकारों की रक्षा करेगी।
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