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सीएम से बैठक न होने पर टीचरों ने की खुदकुशी की कोशिश
ब्यूरो,अमर उजाला/बठिंडा
Updated Tue, 13 Sep 2016 10:37 PM IST
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बठिंडा में ईजीएस/एआईई अध्यापक यूनियन पंजाब के सदस्य मानसा पुल से छलांग लगते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री से पैनल मीटिंग का वादा पूरा न होने पर तीन टीचर सुखविंदर सिंह, अंग्रेज सिंह और राजविंदर कौर ने मंगलवार की देर शाम ओवरब्रिज से छलांग लगाकर जान देने की कोशिश की।
तीनों को साथी अध्यापकों ने किसी तरह बचाया।
इससे पूर्व शहीद किरणजीत कौर ईजीएस/एआईई अध्यापक यूनियन की अगुवाई में टीचरों ने रोष मार्च करते बठिंडा-मानसा व डबवाली रोड जाम किया। इस वजह से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं जिला प्रशासन ने नेशनल हाईवे पर लगे जाम को देखते हुए ट्रैफिक रूट डायवर्ट कर दिया।
इस दौरान संगठन के राज्य नेता गगन अबोहर, सुखचैन मानसा, कुलवंत कुमारी, सतविंद्र फरीदकोट ने कहा कि वह 2003 से बच्चों को पढ़ा रहे हैं, वहीं सरकार उनका भविष्य तबाह करने पर तुली है। उनको स्कूलों में भर्ती करने के साथ शिक्षा में सुधार हुआ है। वह अपने रोजगार को स्थायी करवाने के लिए लगातार संघर्ष करते आ रहे हैं।
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मई और जून माह में तपती गर्मी में उन्होंने गांव सैनेवाला (जैतो), गोनियाना कलां में लगातार 48 दिन तक टंकी पर चढ़कर रोष प्रदर्शन किए, लेकिन बठिंडा प्रशासन ने पैनल मीटिंग का भरोसा दिलाकर धरना समाप्त करवाया। प्रशासन की ओर से आज तक कोई भी पैनल मीटिंग नहीं हुई। फिर संगठन की ओर से 7 अगस्त को जिला स्तरीय अर्थी फूंक प्रदर्शन किए गए। 15 अगस्त को भी बठिंडा में गुप्त एक्शन करना था।
प्रशासन ने झुकते 27 अगस्त की मुख्यमंत्री से पैनल मीटिंग तय करवा दी गई, परंतु वह भी अभी तक नहीं करवाई गई। इस वजह से उन्हें आज का राज्य स्तरीय प्रोग्राम करना पड़ रहा है। धरने में सुखचैन ने कहा कि पंजाब सरकार ने उन्हें स्पेशल ईटीटी करवाई है। उन्हें पॉलिसी में लाकर रेगुलर करना उनका कानूनी हक है।
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तीनों को साथी अध्यापकों ने किसी तरह बचाया।
इससे पूर्व शहीद किरणजीत कौर ईजीएस/एआईई अध्यापक यूनियन की अगुवाई में टीचरों ने रोष मार्च करते बठिंडा-मानसा व डबवाली रोड जाम किया। इस वजह से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। वहीं जिला प्रशासन ने नेशनल हाईवे पर लगे जाम को देखते हुए ट्रैफिक रूट डायवर्ट कर दिया।
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इस दौरान संगठन के राज्य नेता गगन अबोहर, सुखचैन मानसा, कुलवंत कुमारी, सतविंद्र फरीदकोट ने कहा कि वह 2003 से बच्चों को पढ़ा रहे हैं, वहीं सरकार उनका भविष्य तबाह करने पर तुली है। उनको स्कूलों में भर्ती करने के साथ शिक्षा में सुधार हुआ है। वह अपने रोजगार को स्थायी करवाने के लिए लगातार संघर्ष करते आ रहे हैं।
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मई और जून माह में तपती गर्मी में उन्होंने गांव सैनेवाला (जैतो), गोनियाना कलां में लगातार 48 दिन तक टंकी पर चढ़कर रोष प्रदर्शन किए, लेकिन बठिंडा प्रशासन ने पैनल मीटिंग का भरोसा दिलाकर धरना समाप्त करवाया। प्रशासन की ओर से आज तक कोई भी पैनल मीटिंग नहीं हुई। फिर संगठन की ओर से 7 अगस्त को जिला स्तरीय अर्थी फूंक प्रदर्शन किए गए। 15 अगस्त को भी बठिंडा में गुप्त एक्शन करना था।
प्रशासन ने झुकते 27 अगस्त की मुख्यमंत्री से पैनल मीटिंग तय करवा दी गई, परंतु वह भी अभी तक नहीं करवाई गई। इस वजह से उन्हें आज का राज्य स्तरीय प्रोग्राम करना पड़ रहा है। धरने में सुखचैन ने कहा कि पंजाब सरकार ने उन्हें स्पेशल ईटीटी करवाई है। उन्हें पॉलिसी में लाकर रेगुलर करना उनका कानूनी हक है।