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सुप्रीम कोर्ट ने किया दखल देने से इंकार, इस्सेवाल सामूहिक दुष्कर्म मामले में मुख्य आरोपी की जमानत रद्द करने की याचिका खारिज
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हलवारा ( लुधियाना)। इस्सेवाल सामूहिक दुष्कर्म मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से मुख्य आरोपी जगरूप सिंह रूपी को जमानत दिए जाने के खिलाफ पीड़िता की ओर से उसकी जमानत रद्द करवाने को दाखिल याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया है। साथ ही हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार करते हुए निचली अदालत को मुकदमा जल्द से जल्द निपटाने का आदेश दिया है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 22 दिसंबर 2020 को 6 में से एक मुख्य आरोपी जगरूप सिंह रूपी को जमानत पर रिहा कर दिया था। पीड़िता ने अपने निजी वकील हरदयाल इंदर सिंह ग्रेवाल और पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट की सीनियर वकील रीता कोहली ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के खिलाफ अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपील पर सुनवाई से ही इंकार करते हुए निचली अदालत को इसे जल्द निपटाने को कहा है। उधर, जिला लुधियाना ग्रामीण के एसएसपी चरणजीत सिंह सोहल ने बताया कि स्टेट की फाइल को आज एडवोकेट जनरल से मंजूरी मिल गई है। सरकार की तरफ से सरकारी वकील एस रोहतगी सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करेंगी। उम्मीद है याचिका जल्द लिस्ट हो जाएगी।
उल्लेखनीय है कि 9 फरवरी 2019 की रात लुधियाना के इस्सेवाल गांव के समीप नहर के पास 6 आरोपियों ने पीड़िता और उसके दोस्त को उस वक्त अगवा कर लिया था, जब वो कार मे घूमने जा रहे थे। आरोपियों ने रात 8.30 से सुबह 4 बजे तक पीड़िता से दुष्कर्म किया था। दोनों से मारपीट की फिरौती मांगी। थाना दाखा में 10 फरवरी 2019 को मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले में मे जगरूप सिंह रूपी, सादिक अली, सुरमु, अजय उर्फ लल्लन उर्फ ब्रिज नंदन, सैफ अली और एक नाबालिग को गिरफ्तार कर 40 दिन के अंदर ही चालान भी पेश कर दिया था। प्रदेश सरकार ने भी मामले को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के सुपुर्द कर दिया था।
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लुधियाना की जिला अदालत की स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट की जज रश्मि शर्मा इस पर सुनवाई कर रही हैं। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और डीजीपी दिनकर गुप्ता ने चार महीने में केस का फैसला आने का एलान किया था। फैसला तो नहीं आया लेकिन मुख्य आरोपी जगरूप सिंह रूपी हाईकोर्ट से जमानत पाने में सफल हो गया।
सीनियर वकील रीता कोहली ने बताया की सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच के जज जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस नजीर जी ने याचिका का आज ही निपटारा करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए उसमें हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका अस्वीकार करते हुए निचली अदालत को केस जल्द से जल्द निपटाने का आदेश दिया है। अब सरकार की तरफ से दायर की जा रही याचिका पर सब की नजर है।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने 22 दिसंबर 2020 को 6 में से एक मुख्य आरोपी जगरूप सिंह रूपी को जमानत पर रिहा कर दिया था। पीड़िता ने अपने निजी वकील हरदयाल इंदर सिंह ग्रेवाल और पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट की सीनियर वकील रीता कोहली ने सुप्रीम कोर्ट में जमानत के खिलाफ अपील की थी। सुप्रीम कोर्ट ने अपील पर सुनवाई से ही इंकार करते हुए निचली अदालत को इसे जल्द निपटाने को कहा है। उधर, जिला लुधियाना ग्रामीण के एसएसपी चरणजीत सिंह सोहल ने बताया कि स्टेट की फाइल को आज एडवोकेट जनरल से मंजूरी मिल गई है। सरकार की तरफ से सरकारी वकील एस रोहतगी सुप्रीम कोर्ट में पैरवी करेंगी। उम्मीद है याचिका जल्द लिस्ट हो जाएगी।
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उल्लेखनीय है कि 9 फरवरी 2019 की रात लुधियाना के इस्सेवाल गांव के समीप नहर के पास 6 आरोपियों ने पीड़िता और उसके दोस्त को उस वक्त अगवा कर लिया था, जब वो कार मे घूमने जा रहे थे। आरोपियों ने रात 8.30 से सुबह 4 बजे तक पीड़िता से दुष्कर्म किया था। दोनों से मारपीट की फिरौती मांगी। थाना दाखा में 10 फरवरी 2019 को मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने मामले में मे जगरूप सिंह रूपी, सादिक अली, सुरमु, अजय उर्फ लल्लन उर्फ ब्रिज नंदन, सैफ अली और एक नाबालिग को गिरफ्तार कर 40 दिन के अंदर ही चालान भी पेश कर दिया था। प्रदेश सरकार ने भी मामले को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के सुपुर्द कर दिया था।
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लुधियाना की जिला अदालत की स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट की जज रश्मि शर्मा इस पर सुनवाई कर रही हैं। मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और डीजीपी दिनकर गुप्ता ने चार महीने में केस का फैसला आने का एलान किया था। फैसला तो नहीं आया लेकिन मुख्य आरोपी जगरूप सिंह रूपी हाईकोर्ट से जमानत पाने में सफल हो गया।
सीनियर वकील रीता कोहली ने बताया की सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच के जज जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस नजीर जी ने याचिका का आज ही निपटारा करते हुए हाईकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए उसमें हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका अस्वीकार करते हुए निचली अदालत को केस जल्द से जल्द निपटाने का आदेश दिया है। अब सरकार की तरफ से दायर की जा रही याचिका पर सब की नजर है।