लुधियाना: श्री कृष्ण बलराम यात्रा स्टेट फेस्टिवल घोषित, सीएम चन्नी ने बताया गीता से अपना खास रिश्ता
पंजाब में 38.49 फीसदी हिंदू वोट बैंक है। भारतीय जनता पार्टी का चाहे पंजाब के ग्रामीण एरिया में बड़ा जनाधार नहीं है, लेकिन शहरी एरिया में हिंदू वोट बैंक को अपना मानती है। अकाली दल से अलग होने के बाद अब भाजपा की नजर इसी हिंदू वोट बैंक पर है।
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आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर हर राजनीतिक दल हिंदू वोट बैंक को अपनी तरफ खींचने का भरसक प्रयास कर रहा है। बीते कुछ समय से हिंदू वोट बैंक साधने के लिए राजनीतिक दलों के आला नेता मंदिरों में माथा टेकने जा रहे है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है कि पंजाब में 38.49 फीसदी हिंदू वोट बैंक है, जो अगली विधानसभा में किसी दल का गणित बिगाड़ सकता है।
रविवार को लुधियाना पहुंचे सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने हिंदू वोट को साधने के लिए बहुत बड़ा एलान किया है। चन्नी ने लुधियाना में होने वाली श्री कृष्ण बलराम यात्रा को स्टेट फेस्टिवल घोषित कर दिया है। यही नहीं उन्होंने इस्कान मंदिर के लिए 2.51 करोड़ रुपये देने की घोषणा की है। सीएम चन्नी ने कहा कि वह पिछले 25 साल से प्रतिदिन गीता के एक श्लोक का उच्चारण जरूर करते हैं क्योंकि उन्हें एक व्यक्ति ने ऐसा करने के लिए प्रेरित किया था। श्लोक उच्चारण से उन्हें बड़ी शांति महसूस होती है।
कांग्रेस को हिंदू वोट बैंक छिटकने का डर
विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपने अपने दांव पेंच लगा रहे हैं। कुछ समय पहले सभी दलों का फोकस अनुसूचित जाति वोट बैंक पर था लेकिन कांग्रेस ने सबसे पहले बाजी मारते कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटा चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम का ताज पहना अन्य दलों से यह मुद्दा छीन लिया है। ऐसे में अब पंजाब के सियासतदानों में हिंदू वोट बैंक को साधने की होड़ लग गई है। इसके पीछे जातीय समिकरण को समझना होगा। पंजाब में 38.49 फीसदी हिंदू, 31.94 फीसदी अनुसूचित जाति, 19 फीसदी जट्ट सिख और 10.57 फीसदी अन्य है। सत्तासीन कांग्रेस सरकार के पास कोई बड़ा हिंदू चेहरा नहीं है। हालांकि सुनील जाखड़ एक बड़ा चेहरा थे, लेकिन वह अब पार्टी से कुछ नाराज चल रहे हैं। सीएम का ताज पहनने के बाद सीएम चन्नी सीधे केदारनाथ यात्रा करने के लिए चले गए थे। सूत्रों की मानें तो इस समय कांग्रेस को हिंदू वोट बैंक के छिटकने का सबसे बड़ा डर बना हुआ है।
भाजपा हिंदू वोट बैंक को मानती है अपना आधार
भारतीय जनता पार्टी का चाहे पंजाब के ग्रामीण एरिया में बड़ा जनाधार नहीं है, लेकिन शहरी एरिया में हिंदू वोट बैंक को अपना मानती है। अकाली दल से अलग होने के बाद अब भाजपा की नजर इसी हिंदू वोट बैंक पर है। वहीं भाजपा से अलग होने के बाद अकाली दल के लिए भी हिंदू वोट पर पकड़ बनाए रखना एक चुनौती है। क्योंकि पंजाब की 45 सीट ऐसी है, जहां पर 60 फीसदी से ज्यादा आबादी हिंदू समुदाय की है। इसलिए सभी राजनीतिक दल इस समय हिंदू वोट बैंक को रिझाने में जुटे है।