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शहीदों के केस की फिर सुनवाई गुस्ताखी : शाही इमाम
ब्यूरो, अमर उजाला/लुधियाना
Updated Sat, 13 Feb 2016 09:52 PM IST
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लाहौर हाईकोर्ट के वकील इम्तियाज रशीद की तरफ से शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के मुकद्दमे की दोबारा सुनवाई करवाने पर शाही इमाम ने नाराजगी जताई है।
प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी लुधियानवी परिवार के सदस्य और पंजाब के शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने शनिवार को कहा कि शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव थापर के केस की आजादी के 70 साल बाद दोबारा से लाहौर हाईकोर्ट में सुनवाई करवाना स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों की शान में गुस्ताखी है। इसे किसी कीमत पर सहन नहीं किया जा सकता।
शाही इमाम ने कहा कि आजादी के 70 साल बाद भी सस्ती शोहरत हासिल करने वालों ने अपना गंदा खेल अभी बंद नहीं किया है। उन्होंने कहा कि इस केस की दोबारा सुनवाई दरअसल अंग्रेज सरकार के दामन पर लगे जुल्म के धब्बों को मिटाने की साजिश है।
शाही इमाम ने कहा कि गंदा खेल खेलने वाले और शहीदों के खून से सियासत करने वाले कान खोल कर सुन लें कि हम स्वतंत्रता संग्राम में जालिम अंग्रेजों के बागी थे, हैं और रहेंगे। इतिहास में हमसे यह दर्जा कोई अदालत नहीं छीन सकती। शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने अंग्रेज के सामने कंपनी सरकार से बगावत का एलान किया था, तो फिर अब ये लोग कौन होते हैं उन शहीदों की बातों को बदलने वाले। इस अवसर पर शाही इमाम के कई साथी भी मौजूद रहे।
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प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी लुधियानवी परिवार के सदस्य और पंजाब के शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने शनिवार को कहा कि शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव थापर के केस की आजादी के 70 साल बाद दोबारा से लाहौर हाईकोर्ट में सुनवाई करवाना स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों की शान में गुस्ताखी है। इसे किसी कीमत पर सहन नहीं किया जा सकता।
शाही इमाम ने कहा कि आजादी के 70 साल बाद भी सस्ती शोहरत हासिल करने वालों ने अपना गंदा खेल अभी बंद नहीं किया है। उन्होंने कहा कि इस केस की दोबारा सुनवाई दरअसल अंग्रेज सरकार के दामन पर लगे जुल्म के धब्बों को मिटाने की साजिश है।
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शाही इमाम ने कहा कि गंदा खेल खेलने वाले और शहीदों के खून से सियासत करने वाले कान खोल कर सुन लें कि हम स्वतंत्रता संग्राम में जालिम अंग्रेजों के बागी थे, हैं और रहेंगे। इतिहास में हमसे यह दर्जा कोई अदालत नहीं छीन सकती। शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने अंग्रेज के सामने कंपनी सरकार से बगावत का एलान किया था, तो फिर अब ये लोग कौन होते हैं उन शहीदों की बातों को बदलने वाले। इस अवसर पर शाही इमाम के कई साथी भी मौजूद रहे।
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