{"_id":"6964f7b3ad50591fe403ee8c","slug":"seniority-or-promotion-cannot-be-denied-on-the-basis-of-minor-penalties-high-court-ludhiana-news-c-16-1-pkl1098-921264-2026-01-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"मामूली सजा के आधार पर वरिष्ठता या पदोन्नति से वंचित नहीं किया जा सकता: हाईकोर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मामूली सजा के आधार पर वरिष्ठता या पदोन्नति से वंचित नहीं किया जा सकता: हाईकोर्ट
विज्ञापन
-अक्टूबर 2025 को जारी की गई वरिष्ठता सूची को हाईकोर्ट ने किया रद्द
-याचिकाकर्ता को मामूली सजा के आधार पर कनिष्ठों से रखा गया था नीचे
-- -
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि मामूली दंड के आधार पर किसी सरकारी कर्मचारी को न तो वरिष्ठता सूची में नीचे किया जा सकता है और न ही उसे समय पर पदोन्नति से वंचित रखा जा सकता है।
अदालत ने कहा कि एक वार्षिक वेतनवृद्धि को बिना भविष्य प्रभाव के रोकने जैसी मामूली सजा का कर्मचारी की वरिष्ठता या पदोन्नति पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने 23 अक्टूबर 2025 को जारी वरिष्ठता सूची को रद्द कर दिया जिसमें याचिकाकर्ता अधिकारी को केवल मामूली सजा के आधार पर उसके कनिष्ठों से नीचे रखा गया था।
याचिकाकर्ता ने पंजाब सरकार और अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ याचिका दायर कर उक्त वरिष्ठता सूची को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता धीरज चावला ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति वर्ष 1999 में प्लानिंग ऑफिसर के पद पर हुई थी। वर्ष 2011 में उसे सहायक टाउन प्लानर के पद पर पदोन्नति दी गई। 12 दिसंबर 2019 को उस पर एक वार्षिक वेतनवृद्धि को बिना भविष्य प्रभाव के रोकने की मामूली सजा दी गई थी। इसके बावजूद वह असिस्टेंट टाउन प्लानर्स की अंतिम वरिष्ठता सूची में दूसरे स्थान पर था।
विज्ञापन
अक्टूबर 2020 में जब उसके कनिष्ठ अधिकारियों को म्युनिसिपल टाउन प्लानर के पद पर पदोन्नत किया गया तो याचिकाकर्ता को नजरअंदाज कर दिया गया। बाद में दिसंबर 2021 में उसे पदोन्नति तो दी गई लेकिन अक्टूबर 2025 में जारी नई वरिष्ठता सूची में फिर से उसे उसके कनिष्ठों से नीचे दर्शा दिया गया। यह सब केवल उसी मामूली सजा के आधार पर किया गया। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी मांग की कि उसकी पदोन्नति अक्टूबर 2020 से प्रभावी मानी जाए और उसे सीनियर टाउन प्लानर पद के लिए भी विचार किया जाए क्योंकि वह पंजाब म्युनिसिपल कॉरपोरेशन सर्विसेज (भर्ती एवं सेवा शर्तें) नियम-2020 (संशोधित) के तहत पूरी तरह पात्र है।
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यह कानूनी स्थिति अब पूरी तरह स्थापित है और इसमें कोई विवाद नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामूली सजा को पदोन्नति या वरिष्ठता में बाधा नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को उसी तिथि से म्युनिसिपल टाउन प्लानर पद पर पदोन्नत माना जाए जिस दिन उसके तत्काल कनिष्ठों को पदोन्नति दी गई थी।
विज्ञापन
-याचिकाकर्ता को मामूली सजा के आधार पर कनिष्ठों से रखा गया था नीचे
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि मामूली दंड के आधार पर किसी सरकारी कर्मचारी को न तो वरिष्ठता सूची में नीचे किया जा सकता है और न ही उसे समय पर पदोन्नति से वंचित रखा जा सकता है।
अदालत ने कहा कि एक वार्षिक वेतनवृद्धि को बिना भविष्य प्रभाव के रोकने जैसी मामूली सजा का कर्मचारी की वरिष्ठता या पदोन्नति पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। इस टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट ने 23 अक्टूबर 2025 को जारी वरिष्ठता सूची को रद्द कर दिया जिसमें याचिकाकर्ता अधिकारी को केवल मामूली सजा के आधार पर उसके कनिष्ठों से नीचे रखा गया था।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता ने पंजाब सरकार और अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ याचिका दायर कर उक्त वरिष्ठता सूची को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता धीरज चावला ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता की नियुक्ति वर्ष 1999 में प्लानिंग ऑफिसर के पद पर हुई थी। वर्ष 2011 में उसे सहायक टाउन प्लानर के पद पर पदोन्नति दी गई। 12 दिसंबर 2019 को उस पर एक वार्षिक वेतनवृद्धि को बिना भविष्य प्रभाव के रोकने की मामूली सजा दी गई थी। इसके बावजूद वह असिस्टेंट टाउन प्लानर्स की अंतिम वरिष्ठता सूची में दूसरे स्थान पर था।
विज्ञापन
अक्टूबर 2020 में जब उसके कनिष्ठ अधिकारियों को म्युनिसिपल टाउन प्लानर के पद पर पदोन्नत किया गया तो याचिकाकर्ता को नजरअंदाज कर दिया गया। बाद में दिसंबर 2021 में उसे पदोन्नति तो दी गई लेकिन अक्टूबर 2025 में जारी नई वरिष्ठता सूची में फिर से उसे उसके कनिष्ठों से नीचे दर्शा दिया गया। यह सब केवल उसी मामूली सजा के आधार पर किया गया। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी मांग की कि उसकी पदोन्नति अक्टूबर 2020 से प्रभावी मानी जाए और उसे सीनियर टाउन प्लानर पद के लिए भी विचार किया जाए क्योंकि वह पंजाब म्युनिसिपल कॉरपोरेशन सर्विसेज (भर्ती एवं सेवा शर्तें) नियम-2020 (संशोधित) के तहत पूरी तरह पात्र है।
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि यह कानूनी स्थिति अब पूरी तरह स्थापित है और इसमें कोई विवाद नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामूली सजा को पदोन्नति या वरिष्ठता में बाधा नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को उसी तिथि से म्युनिसिपल टाउन प्लानर पद पर पदोन्नत माना जाए जिस दिन उसके तत्काल कनिष्ठों को पदोन्नति दी गई थी।