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यूपी के अनामिका कांड जैसा मामला पंजाब में भी आया, स्कूल क्लर्क ने किया एक करोड़ का घोटाला

Fri, 19 Jun 2020 12:01 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, नंगल(पंजाब)
अमर उजाला, नंगल(पंजाब) Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Fri, 19 Jun 2020 12:01 PM IST
सार

  • क्लर्क ने फर्जी टीचर का खाता बनाया
  • नकली बिलों से किया एक करोड़ का घपला
  • प्रधानाचार्य सहित क्लर्क के खिलाफ मामला दर्ज

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school Clerk created fake teacher's account and fake bill made scam of one crore
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

यूपी के अनामिका कांड की तरह पंजाब में भी एक मामला सामने आया है। सरकारी स्कूल के क्लर्क ने एक करोड़ का घोटाला कर डाला। उपमंडल नंगल के गांव कुलग्रां के सरकारी हाई स्कूल में एक करोड़ रुपये के घपले का मामला सामने आया है। नंगल पुलिस ने उपमंडल नंगल के गांव कुलग्रां के सरकारी हाई स्कूल के क्लर्क और प्रधानाचार्य के खिलाफ लगभग एक करोड़ का घपला करने का केस दर्ज किया है।
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मामले के अनुसार, क्लर्क स्कूल के बिलों से छेड़छाड़ कर और जाली बिल बनवाकर यह राशि अपने दो बैंक खातों में ट्रांसफर भी कराता रहा। यही नहीं आरोपी ने एक साइंस टीचर का फर्जी खाता भी खोल रखा था, जिसकी सैलरी सहित कई लाभ वह उठा रहा था। वित्त विभाग ने भी इसकी जांच करवाना मुनासिब नहीं समझा।
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इस तरह हुआ खुलासा
जिला शिक्षा अधिकारी राज कुमार खोसला ने कहा कि मामले का खुलासा तब हुआ जब ऑडिट विभाग को कुछ गड़बड़ियां मिलीं। इसके बाद ऑडिट विभाग डीईओ को शिकायत की और जांच के लिए जिला स्तरीय कमेटी का गठन किया गया। इसमें प्रिंसिपल मेजर सिंह व प्रिंसिपल अवतार सिंह जांच अधिकारी थे।

जांच के बाद 11 मई 2020 को जिला पुलिस प्रमुख को क्लर्क व स्कूल के प्रधानाचार्य के खिलाफ शिकायत की और 16 जून को नंगल पुलिस ने क्लर्क राजीव कुमार व स्कूल के प्रधानाचार्य सुरेश कुमार के खिलाफ 99 लाख 27 हजार 517 रुपये के घपले का मामला दर्ज किया। उन्होंने बताया कि जांच में पाया है कि आरोपी क्लर्क ने घपले की राशि एसबीआई बैंक के दो खातों में जमा करवाई थी।

सभी बिल क्लर्क बनाता और प्रिंसिपल के साइन करवा लेता

पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के अनुसार स्कूल के समस्त कर्मियों का वेतन व अन्य बिलों का भुगतान वित्त कार्यालय में होता है। इसमें जीपीएफ सहित सभी बिल क्लर्क बनाता था और विभाग की ओर से जारी डोंगल से नेट चलाकर बिल पास करवाने के साथ साथ हार्ड कापी पर स्कूल के प्रिंसिपल से हस्ताक्षर भी करा लेता।

स्कूल प्रिंसिपल कैश बुक में स्कूल से संबंधित कर्मचारियों के नाम देखकर ही हस्ताक्षर करता रहा। जबकि ईसीएस (इलेक्ट्रानिक क्लीयरेंस सर्विस) से मिलान नहीं किया। यही नहीं आरोपी क्लर्क राजीव कुमार ने एक फर्जी साइंस टीचर के नाम से खुद एक खाता बना रखा था। जब एक ही बार में उसके जीपीएफ खाते से 18 लाख रुपये की राशि निकालकर अपने बैंक खाते में जमा करवाई तो ऑडिट विभाग को शक हुआ।

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क्लर्क इस खाते में आने वाली पूरी सैलरी समेत सभी लाभ ले रहा था। मामला जब शिक्षा विभाग के निदेशक के ध्यान में आया तो उन्होंने तुरंत कार्रवाई कर आरोपी क्लर्क के बैंक खाते सील करवा दिए। पूरे मामले में स्कूल प्रधानाचार्य की लापरवाही सामने आ रही है। वहीं वित्त कार्यालय नंगल पर भी सवालिया निशान लगने लगे हैं।

अनुकंपा के आधार पर कर रहा नौकरी

जानकारी के अनुसार, क्लर्क को अनुकंपा के आधार पर अपनी माता की नौकरी 15 सितंबर 2006 मिली थी और 9 अगस्त 2018 तक उसने इसी स्कूल में काम किया। इसके बाद उसकी बदली सरकारी स्कूल काहनपुर खुही में हो गई, बावजूद इसके 31 अक्तूबर 2018 तक सरकारी हाई स्कूल के बिल तैयार किए और वित्त कार्यालय से पास भी करवाए।

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इसका कारण यह बताया जा रहा है कि स्कूल में क्लर्क की पोस्ट न होने के कारण उसे ही बिल तैयार करने के लिए बुलाया जाता रहा। मामले की जांच कर रहे थाना प्रभारी इंस्पेक्टर पवन चौधरी से संपर्क किया तो उन्होंने बताया कि क्लर्क व स्कूल प्रधानाचार्य के खिलाफ आईपीसी की 1860 की धारा 409, 420, 465, 467, 468 व 471 के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

दोनों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं। कुल 99,27,517 रुपये का घपला हुआ है।
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