{"_id":"605cc5968ebc3e58fe369286","slug":"sarpanch-won-the-election-politics-became-an-international-smuggler-on-the-foot-politicians-and-police-officers-ludhiana-news-pkl4083529129","type":"story","status":"publish","title_hn":"2014 में सरपंच का चुनाव जीत रखा था सियासत में पैर, राजनेताओं और पुलिस अधिकारियों की शह पर अंतरराष्ट्रीय तस्कर बना राणो","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
2014 में सरपंच का चुनाव जीत रखा था सियासत में पैर, राजनेताओं और पुलिस अधिकारियों की शह पर अंतरराष्ट्रीय तस्कर बना राणो
विज्ञापन
लुधियाना। अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी में काबू गांव पायल का गुरदीप सिंह 2014 में सियासत में उतरा था। उसने सबसे पहले गांव से सरपंच का चुनाव लड़ा, इस चुनाव को जीतकर उसने पहली बार सियासत में कदम रखा। इसके बाद राणो ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। अकाली सरकार के समय अकाली नेताओं के साथ यारी रही तो कांग्रेस के सत्ता में आते ही उनसे अच्छे संबंध बना लिए। पहले राणो एक अकाली नेता की शह पर रेत के कारोबार में लग गया था। यहीं से शराब के कारोबार से जुड़ा। 2017 में वह पहली बार नशा तस्करों की संपर्क में आया।
वह आस्ट्रेलिया में बैठे नशा तस्कर तनवीर बेदी के संपर्क में आया और नशा तस्करी का खेल शुरू किया। करोड़ों की काली कमाई और लग्जरी लाइफ ने उसे सत्ता के गलियारों में रहने वाले नेताओं से लेकर पुलिस के आला अधिकारियों का करीबी बना दिया। राणो एक अंतरराष्ट्रीय नशा तस्कर बन गया था। छह नवंबर 2020 को हुई गिरफ्तारी के बाद राणो की संपत्ति और लग्जरी लाइफ देखकर हर कोई हैरान था।
बता दें कि एसटीएफ की गिरफ्त में आते ही राणो के संबंध में कई खुलासे हुए। लॉकडाउन के समय जब लोग पैसे के लिए तरस रहे थे, उस समय राणो ने 14 लग्जरी गाड़ियां खरीदीं, जिनकी कीमत करोड़ों में थी। राणो ने गांव में डेढ़ एकड़ में महलनुमा कोठी बनाई, जिसमें वह विदेश में बैठे सिंगरों को बुलाकर उनके गानों की शूटिंग करवाता था। रसूख दिखाने के लिए शिअद प्रधान सुखबीर बादल व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के ओएसडी अंकित बांसल, ओएसडी कैप्टन संदीप संधू व अन्य नेताओं के साथ फोटो खिंचवाकर वह सोशल मीडिया पर शेयर करता था। गिरफ्तारी के बाद उसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब चला, जिसमें राणो एक लग्जरी गाड़ी में बैठा है, उसका बाउंसर वीडियो बना रहा है। उसकी गाड़ी के आगे एक पुलिस की पायलट गाड़ी चल रही है। पुलिस के एक नाके पर खड़े पुलिस मुलाजिम उसे सैल्यूट मार रहे हैं। इसके बाद खुलासे होने लगे कि राणो की पहुंच पुलिस के कई आला अधिकारियों से है, जो उसे इस कारोबार में किसी न किसी तरह मदद कर रहे हैं। लॉकडाउन के समय राणो की गैंग ने पंजाब में लगभग 50 किलो नशा सप्लाई कर करोड़ों की काली कमाई की। इस धंधे में उसने अपने चचेरे भाई इकबाल सिंह को भी जोड़ा था।
विज्ञापन
अपहरण के मामले में पुलिस ने नहीं की कार्रवाई
6 जून 2020 को मलौद थाने में नशा तस्कर गुरदीप राणो पर शराब ठेकों में साथी रहे ओंकार सिंह को किडनैप करने का केस दर्ज हुआ था। राणो ने ओंकार सिंह को इसलिए किडनैप कर लिया था, क्योंकि उसे शक था कि उसके नशा तस्करी के कारोबार की भनक ओंकार सिंह को लग गई है और वह इसका शोर मचा रहा है। किडनैपिंग के बाद मारपीट कर ओंकार को रास्ते में फेंक दिया था। उस समय मलौद पुलिस ने गुरदीप राणो व उसके 5 साथियों पर धारा 365, 323, 341, 506, 148, 149 के अधीन केस दर्ज कर लिया था, लेकिन पुलिस ने राणो को गिरफ्तार नहीं किया। इसके ठीक पांच माह बाद छह नवंबर को एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार किया।
विज्ञापन
वह आस्ट्रेलिया में बैठे नशा तस्कर तनवीर बेदी के संपर्क में आया और नशा तस्करी का खेल शुरू किया। करोड़ों की काली कमाई और लग्जरी लाइफ ने उसे सत्ता के गलियारों में रहने वाले नेताओं से लेकर पुलिस के आला अधिकारियों का करीबी बना दिया। राणो एक अंतरराष्ट्रीय नशा तस्कर बन गया था। छह नवंबर 2020 को हुई गिरफ्तारी के बाद राणो की संपत्ति और लग्जरी लाइफ देखकर हर कोई हैरान था।
विज्ञापन
बता दें कि एसटीएफ की गिरफ्त में आते ही राणो के संबंध में कई खुलासे हुए। लॉकडाउन के समय जब लोग पैसे के लिए तरस रहे थे, उस समय राणो ने 14 लग्जरी गाड़ियां खरीदीं, जिनकी कीमत करोड़ों में थी। राणो ने गांव में डेढ़ एकड़ में महलनुमा कोठी बनाई, जिसमें वह विदेश में बैठे सिंगरों को बुलाकर उनके गानों की शूटिंग करवाता था। रसूख दिखाने के लिए शिअद प्रधान सुखबीर बादल व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह के ओएसडी अंकित बांसल, ओएसडी कैप्टन संदीप संधू व अन्य नेताओं के साथ फोटो खिंचवाकर वह सोशल मीडिया पर शेयर करता था। गिरफ्तारी के बाद उसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब चला, जिसमें राणो एक लग्जरी गाड़ी में बैठा है, उसका बाउंसर वीडियो बना रहा है। उसकी गाड़ी के आगे एक पुलिस की पायलट गाड़ी चल रही है। पुलिस के एक नाके पर खड़े पुलिस मुलाजिम उसे सैल्यूट मार रहे हैं। इसके बाद खुलासे होने लगे कि राणो की पहुंच पुलिस के कई आला अधिकारियों से है, जो उसे इस कारोबार में किसी न किसी तरह मदद कर रहे हैं। लॉकडाउन के समय राणो की गैंग ने पंजाब में लगभग 50 किलो नशा सप्लाई कर करोड़ों की काली कमाई की। इस धंधे में उसने अपने चचेरे भाई इकबाल सिंह को भी जोड़ा था।
विज्ञापन
अपहरण के मामले में पुलिस ने नहीं की कार्रवाई
6 जून 2020 को मलौद थाने में नशा तस्कर गुरदीप राणो पर शराब ठेकों में साथी रहे ओंकार सिंह को किडनैप करने का केस दर्ज हुआ था। राणो ने ओंकार सिंह को इसलिए किडनैप कर लिया था, क्योंकि उसे शक था कि उसके नशा तस्करी के कारोबार की भनक ओंकार सिंह को लग गई है और वह इसका शोर मचा रहा है। किडनैपिंग के बाद मारपीट कर ओंकार को रास्ते में फेंक दिया था। उस समय मलौद पुलिस ने गुरदीप राणो व उसके 5 साथियों पर धारा 365, 323, 341, 506, 148, 149 के अधीन केस दर्ज कर लिया था, लेकिन पुलिस ने राणो को गिरफ्तार नहीं किया। इसके ठीक पांच माह बाद छह नवंबर को एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार किया।