फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Ludhiana News ›   Sant Longowal's anniversary will become a weapon to establish political dominance

Ludhiana News: सियासी वर्चस्व कायम करने का हथियार बनेगी संत लोंगोवाल की बरसी

Mon, 18 Aug 2025 06:55 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 18 Aug 2025 06:55 PM IST
विज्ञापन
Sant Longowal's anniversary will become a weapon to establish political dominance
फोटो
विज्ञापन

-शिअद बादल, नए अकाली दल ने भीड़ जुटाने को कसी कमर
---
सुशील कुमार
सुनाम। पंजाब में अमन, शांति की स्थापना के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की पुण्यतिथि को अकाली नेता अपना राजनीति वर्चस्व कायम करने का हथियार बनाते नजर आ रहे हैं। जहां एक ओर यह दिन उनकी बलिदानी विरासत को याद करने और एकता का संदेश देने का अवसर है, वहीं दूसरी ओर अकाली दलों की आपसी खींचतान और नेतृत्व संघर्ष इसे राजनीतिक अखाड़े में तब्दील करने पर तुला है।
संत लोंगोवाल की बरसी (20 अगस्त) के जरिये अकाली नेता अपनी खोई सियासी ज़मीन को पाने की जद्दोजहद करते दिखाई देंगे। गुटों के बंटे अकाली दल के दिग्गज नेता अलग-अलग आयोजन की तैयारी में जुटे हैं। शिअद व नए अकाली दल समेत अन्य दल अपने स्तर पर आयोजन कर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। यह आयोजन सूबे की अकाली और पंथक सियासत की दिशा व दशा तय करेगा। सत्तापक्ष समेत तमाम सियासी दलों की नजरें इस बरसी समारोह पर टिक गई हैं। बरसी समारोह के जरिये एक तरफ शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल शक्ति प्रदर्शन करेंगे। वहीं, सुखबीर के नेतृत्व को चुनौती दे रहे अकाली नेता ज्ञानी हरप्रीत सिंह, परमिंदर सिंह ढींडसा, गोबिंद सिंह लोंगोवाल, प्रो. प्रेम सिंह चंदूमाजरा आदि अपने नए दल को नई धार देकर स्थापित करने का प्रयास करेंगे। नए दल के गठन के बाद अकाली सियासत का पारा चढ़ गया है।
विज्ञापन

सुखबीर बादल के नेतृत्व को चुनौती देने वाले अकाली नेताओं के कड़े मिजाज को साफ तौर पर देखा जा सकता है। ये नेता इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में दिखाई दे रहे हैं। सियासी जानकार मानते हैं कि ये अकाली नेता, पंथक एजेंडे पर पहरा देने का हवाला देकर सुखबीर बादल के दावे को कमजोर करना और अकाली दल बादल से ज्यादा भीड़ जुटाकर उन्हें कमजोर साबित करने की कोशिश करेंगे। वे अकाली एजेंडे के जरिये ही बादल को मात देना चाहते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

⁠दूसरी तरफ सुखबीर बादल और उनके समर्थकों ने बरसी को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। बादल ने बरसी को व्यापक स्तर पर मनाने के आदेश दिए हैं। पार्टी संत लोंगोवाल की बरसी समागम में ज्यादा से ज्यादा भीड़ एकत्रित करके विरोधियों को कड़ा संदेश देना चाहती है। इसी के मद्देनजर बादल दल के नेताओं ने पूरा जोर लगा दिया है।

20 अगस्त, 1985 को हुई थी लोंगोवाल की हत्या
संत लोंगोवाल 1980 के आतंकवाद के दौर के समय शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष थे। 20 अगस्त, 1985 को संत लोंगोवाल की संगरूर के शेरपुर में हत्या कर दी गई थी। उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी से 24 जुलाई, 1985 को पंजाब के हितों को लेकर समझौता किया था जिसे राजीव-लोंगोवाल समझौते का नाम दिया गया था। शिरोमणि अकाली दल लंबे समय से शहीद संत लोंगोवाल की बरसी मनाता आ रहा है। कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार में कांग्रेस भी बरसी मनाती रही है। आप सरकार ने भी बरसी पर रक्तदान शिविर का आयोजन करती है। ⁠बहरहाल, संत हरचंद सिंह लोंगोवाल की पुण्यतिथि राजनीतिक दिखावे का नहीं, आत्मचिंतन का अवसर होनी चाहिए। सभी राजनीतिक दलों के लिए अपने-अपने हितों से ऊपर उठकर पंजाब के व्यापक हित में एकजुट होने का अवसर है। यदि सियासी दल वास्तव में उनकी विरासत का सम्मान करना चाहते हैं तो उन्हें आपसी खींचतान छोड़कर मिलकर यह संकल्प लेना होगा कि पंजाब फिर कभी वैसी त्रासदी का शिकार नहीं होगा जिसके खिलाफ लोंगोवाल ने अपनी जान दी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed