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बठिंडा में एम्स के लिए पीएयू ने दी 175 एकड़ जमीन

Fri, 20 Nov 2015 10:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना Updated Fri, 20 Nov 2015 10:38 PM IST
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बठिंडा में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (एम्स) बनाने के लिए
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पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) ने 175 एकड़ जमीन सरकार को दे दी है।

इसके बदले में पीएयू को रिसर्च के लिए तलवंडी साबो, रामपुरा फूल और अमृतसर में 162 एकड़ जमीन मिली है। यह जानकारी पीएयू के वाइस चांसलर डॉ. बलदेव सिंह ढिल्लों ने शुक्रवार को कमेटी रूम में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में दी।
वीसी ने दावा किया कि बठिंडा की जमीन कम उपजाऊ थी, जबकि बदले में मिली ज्यादा उपजाऊ जमीन मिली है।

पीएयू को शेखूपुरा एवं जीवन सिंह वाला तलवंडी साबो में 76 एकड़ का रिसर्च फार्म, रामपुरा फूल में 36 एकड़ का रिसर्च फार्म एवं अमृतसर के दयाल भरंग में 50 एकड़ का रिसर्च फार्म मिला है। इन रिसर्च फार्म में पानी एवं मिट्टी की क्वालिटी अलग-अलग है, नतीजतन यहां पर विभिन्न तरह की फसलों की रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा। इनमें गेहूं, धान के अलावा आलू, किन्नूू, काटन, बागवानी इत्यादि प्रमुख रहेंगी।

वीसी ने दावा किया कि तीन जगहों पर अलग-अलग जमीन मिलने से रिसर्च का काम प्रभावित नहीं होगा। इन फार्मों को तैयार करने के लिए भी पीएयू ने सरकार से फंड की मांग की है, लेकिन इस संबंध में वीसी ने खुलासा करने से इंकार कर दिया।

पराली जलाने से हो रहे वातावरण नुकसान पर वीसी ने कहा कि इस संबंध में किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है। किसानों को पराली के सही उपयोग के विकल्प बताए जा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में पराली जलाने के ट्रेंड में कमी आएगी। देश में दालों की किल्लत के कारण बढ़ते दामों के बारे में वीसी ने कहा कि दालों की कारगर मार्केटिंग न होने के कारण ही किसान इस तरफ ज्यादा तवज्जो नहीं दे रहे हैं।

पीएयू के डायरेक्टर रिसर्च  डॉ. बलविंदर सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से सिफारिश की धान की किस्मों के तहत रकबा लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2014-15 में 41.92 फीसदी और वर्ष 2015-16 में 53.36 फीसदी इलाके में सिफारिश की गई किस्मों की बीजाई की गई। इस अवसर पर रजिस्ट्रार डॉ. पीके खन्ना, डॉ. बलविंदर सिंह, डा. केएस थिंड मौजूद रहे।
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