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पीएयू ने दस साल बाद जारी की गन्ने की नई किस्म
अमर उजाला, लुधियाना
Updated Wed, 12 Mar 2014 11:02 PM IST
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पंजाब कृषि विश्वविद्यालय ने करीब दस साल के बाद गन्ने की नई किस्म सीओपीवी-91 जारी की है। इस किस्म के जरिये प्रति एकड़ जमीन से 410 क्विंटल तक झाड़ लिया जा सकता है जो मौजूदा किस्म सीओजे-64 और सीओजे-85 से चालीस फीसदी ज्यादा है।
सूबे में गन्ने की खेती को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है। इसके अलावा भी पीएयू ने धान की पीआर-123, बासमती की पूसा-1509, सोयाबीन, कॉटन एफएमडीएच-9, बाजरा की पीएचबी-2884, मेंथा की कोसी और मक्की पीएमएच-8 की भी नई किस्में जारी की हैं। 14 मार्च से पीएयू में लगने वाले दो दिवसीय किसान मेले में किसानों को इन नई किस्मों से अवगत कराकर उनको इनकी खेती के लिए प्रेरित किया जाएगा।
पीएयू के डायरेक्टर रिसर्च डा. एसएस गोसल का कहना है कि पंजाब में कुछ निजी मिलों के अलावा कोआपरेटिव सेक्टर में कुल 22 चीनी मिल हैं। गन्ने की कमी के कारण इनमें से केवल 16 ही चल पा रही हैं। चीनी के उत्पादन को बढ़ाने और मिलों में जान फूंकने के मकसद से पीएयू के माहिरों ने गन्ने की नई आधुनिक किस्म को जारी किया है। सीओपीवी-91 मिड कैटेगरी की किस्म है।
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इसमें जनवरी के दौरान ही 17 फीसदी से अधिक मिठास पाई जा सकती है। यह किस्म रत्त्ता रोग का मुकाबला करने में भी पूरी तरह से सक्षम है। फिलहाल किसानों को गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य भी 300 रुपये दिया जा रहा है। नई किस्म से राज्य में गन्ने की खेती को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही चीनी मिलों के लिए सूबे में ही कच्चा माल उपलब्ध होगा।
डा. गोसल ने कहा कि पीएयू ने सोयाबीन की नई किस्म एसएल-958 जारी की है। इसमें 41.7 फीसदी प्रोटीन, 20.2 फीसदी ऑयल की मात्रा है। यह किस्म पकने में 142 दिन का वक्त लेती है। इस किस्म के जरिये प्रति एकड़ से 7.3 क्विंटल ग्रेन पाया जा सकता है। इस किस्म के जरिये सूबे में सोयाबीन की खेती को बढ़ावा मिलेगा और विविधिकरण की दिशा में आगे कदम बढ़ाए जा सकेंगे।
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सूबे में गन्ने की खेती को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया गया है। इसके अलावा भी पीएयू ने धान की पीआर-123, बासमती की पूसा-1509, सोयाबीन, कॉटन एफएमडीएच-9, बाजरा की पीएचबी-2884, मेंथा की कोसी और मक्की पीएमएच-8 की भी नई किस्में जारी की हैं। 14 मार्च से पीएयू में लगने वाले दो दिवसीय किसान मेले में किसानों को इन नई किस्मों से अवगत कराकर उनको इनकी खेती के लिए प्रेरित किया जाएगा।
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पीएयू के डायरेक्टर रिसर्च डा. एसएस गोसल का कहना है कि पंजाब में कुछ निजी मिलों के अलावा कोआपरेटिव सेक्टर में कुल 22 चीनी मिल हैं। गन्ने की कमी के कारण इनमें से केवल 16 ही चल पा रही हैं। चीनी के उत्पादन को बढ़ाने और मिलों में जान फूंकने के मकसद से पीएयू के माहिरों ने गन्ने की नई आधुनिक किस्म को जारी किया है। सीओपीवी-91 मिड कैटेगरी की किस्म है।
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इसमें जनवरी के दौरान ही 17 फीसदी से अधिक मिठास पाई जा सकती है। यह किस्म रत्त्ता रोग का मुकाबला करने में भी पूरी तरह से सक्षम है। फिलहाल किसानों को गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य भी 300 रुपये दिया जा रहा है। नई किस्म से राज्य में गन्ने की खेती को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही चीनी मिलों के लिए सूबे में ही कच्चा माल उपलब्ध होगा।
डा. गोसल ने कहा कि पीएयू ने सोयाबीन की नई किस्म एसएल-958 जारी की है। इसमें 41.7 फीसदी प्रोटीन, 20.2 फीसदी ऑयल की मात्रा है। यह किस्म पकने में 142 दिन का वक्त लेती है। इस किस्म के जरिये प्रति एकड़ से 7.3 क्विंटल ग्रेन पाया जा सकता है। इस किस्म के जरिये सूबे में सोयाबीन की खेती को बढ़ावा मिलेगा और विविधिकरण की दिशा में आगे कदम बढ़ाए जा सकेंगे।