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Ludhiana News: कनाडा के क्यूबेक में नगर कीर्तन समेत सभी धार्मिक जुलूस पर प्रतिबंध की तैयारी, विरोध शुरू
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-धार्मिक मामलों में दखलअंदाजी पर सिख संस्थाओं ने जताई चिंता
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सुरिंदर पाल
जालंधर। कनाडा के क्यूबेक में जल्द ही नगर कीर्तन समेत सभी धार्मिक जुलूस पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इससे सिख समुदाय में काफी रोष है। क्यूबेक में कई गुरुद्वारे हैं जिनमें मॉन्ट्रियल स्थित गुरुद्वारा साहिब कलगीधर दरबार और मॉन्ट्रियल के लासेल स्थित गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार शामिल हैं। 2021 में हडसन में भी एक नया गुरुद्वारा खुला था जो इस क्षेत्र में बढ़ती सिख आबादी ने तैयार करवाया गया था।
क्यूबेक के 32वें प्रीमियर फ्रांस्वा लेगॉल्ट की सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक गतिविधियों को रोकने की योजना बनाई है जिसके अनुसार नगर कीर्तन, सड़कों पर नमाज अदा करने और गुड फ्राइडे पर क्रॉस जुलूस नहीं निकाला जा सकेगा। यह बिल इसी माह पेश किया जा रहा है। कई सिख संस्थाएं इसके विरोध में सक्रिय हो गई हैं। हाल ही में क्यूबेक की एक स्वायत्त समिति ने प्रांत में धर्मनिरपेक्षता को मजबूत करने के लिए 50 सिफारिशें की थीं। अपनी 300 पन्नों की रिपोर्ट में समिति ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता का दायरा सीमित किया जाना चाहिए और डे केयर वर्कर्स को भी धार्मिक प्रतीक पहनने पर प्रतिबंध के दायरे में लाया जाना चाहिए।
समिति ने यह भी सिफारिश की है कि सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक गतिविधियों पर निर्णय लेने का अधिकार संबंधित नगर पालिकाओं को दिया जाना चाहिए। दूसरी ओर कनाडाई सिविल लिबर्टीज एसोसिएशन ने क्यूबेक सरकार की योजना को धार्मिक स्वतंत्रता में सीधा हस्तक्षेप बताया है। गौरतलब है कि क्यूबेक में विधेयक 21 के तहत, सार्वजनिक क्षेत्र के सिख कर्मचारियों के पगड़ी, दाढ़ी या सिर पर स्कार्फ पहनने पर प्रतिबंध लगाने की कोशिशें पहले ही की जा चुकी हैं। क्यूबेक की अपील अदालत ने विधेयक 21 को बरकरार रखा है और अब यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में है। कनाडा में सिख चिंतक सुखविंदर सिंह का कहना है कि क्यूबेक फ्रेंच बहुसंख्यक लोगों का इलाका है लेकिन वहां पर सिखों की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है। यह चिंता का विषय है कि नगर कीर्तन पर प्रतिबंध लग जाएगा और यह सीधा धार्मिक मर्यादा में दखलंदाजी है जिसको लेकर सिख संस्थाएं काफी चिंतित है।
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सुरिंदर पाल
जालंधर। कनाडा के क्यूबेक में जल्द ही नगर कीर्तन समेत सभी धार्मिक जुलूस पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इससे सिख समुदाय में काफी रोष है। क्यूबेक में कई गुरुद्वारे हैं जिनमें मॉन्ट्रियल स्थित गुरुद्वारा साहिब कलगीधर दरबार और मॉन्ट्रियल के लासेल स्थित गुरुद्वारा गुरु नानक दरबार शामिल हैं। 2021 में हडसन में भी एक नया गुरुद्वारा खुला था जो इस क्षेत्र में बढ़ती सिख आबादी ने तैयार करवाया गया था।
क्यूबेक के 32वें प्रीमियर फ्रांस्वा लेगॉल्ट की सरकार ने सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक गतिविधियों को रोकने की योजना बनाई है जिसके अनुसार नगर कीर्तन, सड़कों पर नमाज अदा करने और गुड फ्राइडे पर क्रॉस जुलूस नहीं निकाला जा सकेगा। यह बिल इसी माह पेश किया जा रहा है। कई सिख संस्थाएं इसके विरोध में सक्रिय हो गई हैं। हाल ही में क्यूबेक की एक स्वायत्त समिति ने प्रांत में धर्मनिरपेक्षता को मजबूत करने के लिए 50 सिफारिशें की थीं। अपनी 300 पन्नों की रिपोर्ट में समिति ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता का दायरा सीमित किया जाना चाहिए और डे केयर वर्कर्स को भी धार्मिक प्रतीक पहनने पर प्रतिबंध के दायरे में लाया जाना चाहिए।
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समिति ने यह भी सिफारिश की है कि सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक गतिविधियों पर निर्णय लेने का अधिकार संबंधित नगर पालिकाओं को दिया जाना चाहिए। दूसरी ओर कनाडाई सिविल लिबर्टीज एसोसिएशन ने क्यूबेक सरकार की योजना को धार्मिक स्वतंत्रता में सीधा हस्तक्षेप बताया है। गौरतलब है कि क्यूबेक में विधेयक 21 के तहत, सार्वजनिक क्षेत्र के सिख कर्मचारियों के पगड़ी, दाढ़ी या सिर पर स्कार्फ पहनने पर प्रतिबंध लगाने की कोशिशें पहले ही की जा चुकी हैं। क्यूबेक की अपील अदालत ने विधेयक 21 को बरकरार रखा है और अब यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में है। कनाडा में सिख चिंतक सुखविंदर सिंह का कहना है कि क्यूबेक फ्रेंच बहुसंख्यक लोगों का इलाका है लेकिन वहां पर सिखों की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है। यह चिंता का विषय है कि नगर कीर्तन पर प्रतिबंध लग जाएगा और यह सीधा धार्मिक मर्यादा में दखलंदाजी है जिसको लेकर सिख संस्थाएं काफी चिंतित है।
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