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बैंस के ताल ठोंकने से सियासी खलबली
लुधियाना।
Updated Fri, 14 Feb 2014 11:25 PM IST
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लोकसभा चुनावों की दस्तक के साथ ही पंजाब की आर्थिक राजधानी में भी चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। इस बीच शिरोमणि अकाली दल का दामन छोड़ कर पिछले विधानसभा चुनाव में आजाद उम्मीदवार के तौर पर भारी बहुमत से जीत दर्ज कराने वाले विधायक सिमरजीत सिंह बैंस ने भी चुनाव मैदान में उतरने के संकेत दिए हैं।
माना जा रहा है कि उनके इस इरादे ने चुनावी गलियारे में खलबनी मचा दी है। यदि उन्होंने चुनावी अखाड़े में कदम रखा को तय है कि कई दिग्गजों का राजनीतिक समीकरण बिगड़ सकता है। बैंस के चुनाव मैदान में उतरने से लुधियाना में मुकाबला अकाली भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और बैंस के बीच हो सकता है।
हालांकि आम आदमी पार्टी ने एचएस फुल्का को अपना उम्मीदवार तय कर दिया है। इसलिए मुकाबला और रोचक होने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। काबिलेगौर है कि विस चुनाव में अकाली दल का साथ छोड़ने के बाद बैंस ब्रदर्स ने आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ कर कांग्रेस एवं अकाली दल को धूल चटा दी थी।
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सिमरजीत सिंह बैंस से वरिष्ठ अकाली नेता एवं पूर्व काबिना मंत्री हीरा सिंह गाबड़िया को आत्म नगर सीट से करीब 28 हजार वोट से मात दी थी। जबकि उनके भाई बलविंदर सिंह बैंस ने पूर्व मेयर एवं अकाली उम्मीदवार हाकम सिंह ग्यासपुरा को लुधियाना दक्षिण सीट से 32,500 वोट से हराया था।
इस तरह से वोट बैंक पर नजर डाले तो बैंस ब्रदर्स के पास उनके अपने इलाके में बड़ा जनाधार है। ऐसे में कहा जा रहा है कि बैंस के लोकसभा चुनाव लड़ने का सीधा असर अकाली दल के वोट बैंक पर पड़ सक ता है। इस बीच सिमरजीत सिंह बैंस ने कहा है कि वे विस चुनाव भी जनता के कहने पर लड़े। अब यदि जनता कहेगी तो वह आजाद उम्मीदवार के तौर पर ही लोकसभा चुनाव में भी भाग्य आजमाएंगे।
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माना जा रहा है कि उनके इस इरादे ने चुनावी गलियारे में खलबनी मचा दी है। यदि उन्होंने चुनावी अखाड़े में कदम रखा को तय है कि कई दिग्गजों का राजनीतिक समीकरण बिगड़ सकता है। बैंस के चुनाव मैदान में उतरने से लुधियाना में मुकाबला अकाली भाजपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और बैंस के बीच हो सकता है।
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हालांकि आम आदमी पार्टी ने एचएस फुल्का को अपना उम्मीदवार तय कर दिया है। इसलिए मुकाबला और रोचक होने की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। काबिलेगौर है कि विस चुनाव में अकाली दल का साथ छोड़ने के बाद बैंस ब्रदर्स ने आजाद उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ कर कांग्रेस एवं अकाली दल को धूल चटा दी थी।
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सिमरजीत सिंह बैंस से वरिष्ठ अकाली नेता एवं पूर्व काबिना मंत्री हीरा सिंह गाबड़िया को आत्म नगर सीट से करीब 28 हजार वोट से मात दी थी। जबकि उनके भाई बलविंदर सिंह बैंस ने पूर्व मेयर एवं अकाली उम्मीदवार हाकम सिंह ग्यासपुरा को लुधियाना दक्षिण सीट से 32,500 वोट से हराया था।
इस तरह से वोट बैंक पर नजर डाले तो बैंस ब्रदर्स के पास उनके अपने इलाके में बड़ा जनाधार है। ऐसे में कहा जा रहा है कि बैंस के लोकसभा चुनाव लड़ने का सीधा असर अकाली दल के वोट बैंक पर पड़ सक ता है। इस बीच सिमरजीत सिंह बैंस ने कहा है कि वे विस चुनाव भी जनता के कहने पर लड़े। अब यदि जनता कहेगी तो वह आजाद उम्मीदवार के तौर पर ही लोकसभा चुनाव में भी भाग्य आजमाएंगे।