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Ludhiana News: जेल में पुलिस इंस्पेक्टर की मौत, सीबीआई कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा

Mon, 17 Nov 2025 10:10 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 17 Nov 2025 10:10 PM IST
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Police inspector dies in jail, sentenced to life imprisonment by CBI court
अमर उजाला ब्यूरो
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जालंधर। पटियाला जेल में बंद पंजाब पुलिस के पूर्व इंस्पेक्टर सीता राम की मौत हो गई। वह जालंधर के रहने वाले थे। उनके साथी सूबा सिंह की चंद दिन पहले जेल में हत्या कर दी गई थी। सोमवार को सीता राम ने जेल में दम तोड़ दिया। 1993 के फर्जी मुठभेड़ मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।उन्हें मार्च 2025 में मोहाली की एक विशेष सीबीआई अदालत ने यह सजा सुनाई थी।
सीता राम उस समय तरनतारन के पट्टी पुलिस स्टेशन में एसएचओ (थाना प्रभारी) थे उनको 1993 में गुरदेव सिंह और सुखवंत सिंह नामक दो युवकों के फर्जी मुठभेड़ में हत्या करने का दोषी पाया गया था। सीबीआई अदालत ने सीता राम को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या), 201 (साक्ष्य नष्ट करना) और 218 (सरकारी कर्मचारी द्वारा गलत रिकॉर्ड बनाना) के तहत दोषी ठहराया और आजीवन कारावास की सजा दी। उन्हें 2.7 लाख का जुर्माना भी लगाया गया जिसमें से 1.5 लाख प्रत्येक मृतक के परिवार को मुआवजे के रूप में दिए जाने थे इसी मामले में एक अन्य पुलिसकर्मी कांस्टेबल राजपाल को भी 5 साल जेल की सजा सुनाई गई थी।
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बनाई थी एनकाउंटर की फर्जी कहानी
30 जनवरी 1993 को गुरदेव सिंह उर्फ देबा निवासी गलीलीपुर तरनतारन को पुलिस चौकी करण तरनतारन के इंचार्ज एएसआई नौरंग सिंह के नेतृत्व में एक पुलिस पार्टी ने उसके घर से उठाया था जबकि 5 फरवरी 1993 को एक अन्य युवक सुखवंत सिंह को एएसआई दीदार सिंह के नेतृत्व वाली पुलिस टीम ने पट्टी थाना क्षेत्र के बाम्हणीवाला गांव से उसके घर से उठा लिया था। बाद में दोनों को 6 फरवरी 1993 को थाना पट्टी के भागूपुर क्षेत्र में एक मुठभेड़ में मार दिखाया। पुलिस ने अपनी कहानी में बताया कि पुलिस पार्टी ने नाका लगाया हुआ था। दोनों नौजवान ट्रैक्टर पर आ रहे थे। जब पुलिस ने इन्हें रोकने की कोशिश की तो उन्होंने पुलिस पर फायरिंग कर दी। पुलिस ने जवाबी फायरिंग की, इसमें दोनों मारे गए। थाना पट्टी तरनतारन में एफआईआर दर्ज की गई। वहीं, पुलिस ने दोनों मृतकों के शवों का अंतिम संस्कार लावारिस हालत में कर दिया। इसके बाद उनके परिवारों को सौंपा नहीं गया। उस समय पुलिस ने दावा किया था कि दोनों युवक हत्या, फिरौती जैसे अपराधों में मामलों में शामिल थे। अदालत में यह कहानी फेल साबित हुई।
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