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सम्मान के लिए करूंगा सियासत : परमिंदर
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ोटो: 05एसजीआरपी02: संगरूर में अपने निवास स्थान पर समर्थकों को संबोधित करते परमिंदर ढींढसा।
- फोटो : SANGOOR
अकाली दल के विधायक दल के नेता से त्याग पत्र देने वाले प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा ने साफ किया कि वह अपने पिता सुखदेव सिंह ढींढसा के ‘सैद्धांतिक स्टेंड’ के साथ चट्टान की तरह खडे़ हैं। पार्टी की अंदरूनी कमियों को दूर करने का प्रयास जारी रहेगा। ढींढसा रविवार को निवास स्थान पर पहुंचे समर्थकों को संबोधित कर रहे थे।
परमिंदर ढींढसा ने कहा कि उनके पिता सुखदेव सिंह ढींढसा का उन पर किसी तरह का दबाव नहीं था। अपना फैसला लेने वह खुद सक्षम हैं। सीनियर ढींढसा ने उनके समक्ष स्पष्ट किया था कि सियासत के लिए इज्जत को दांव पर नहीं लगाना है। इज्जत के लिए सियासत करनी है और अकाली दल को मजबूत बनाना ही उनका लक्ष्य है। परमिंदर ने कहा कि उनका किसी व्यक्ति विशेष से मनमुटाव नहीं है। वरिष्ठ नेता चाहते हैं कि पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक व्यवस्था लागू नहीं होनी चाहिए। पार्टी के भीतर सामूहिक विचार करके फैसले होने चाहिए।
बेअदबी मामले को लेकर उन्होंने कहा कि अकाली दल के सत्ता में रहते हुए बेअदबी के मामले हुए थे, लिहाजा लोगों की भावनाओं की कद्र करते हुए खेद व्यक्त किया जाना चाहिए था। विरोधियों की ओर से उनके विधायक पद से त्याग पत्र देने की मांग संबंधी परमिंदर ढींढसा ने कहा कि जनता ने उन्हें विधायक बनाया है। जनता कहेगी तो वह जरूर विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे। 2017 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल के ज्यादातर वह अपने निजी रसूख के चलते विधायक निर्वाचित हुए थे।
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अकाली सियासत की तस्वीर बदलना तय
पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा की ओर अपने पिता सुखदेव सिंह ढींढसा के साथ चट्टान की तरह खडे़ रहने के एलान से जहां अकाली दल की मुसीबतें बढ़ गई हैं, वहीं मालवा इलाके में अकाली सियासत की तस्वीर बदलना तय माना जा रहा है। जूनियर ढींढसा ने अप्रत्यक्ष तौर पर इशारों में अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व पर सवाल उठाए। रविवार को उनके निवास स्थान पर सुनाम, लहरागागा, दिडबा व मालेरकोटला से भारी संख्या में समर्थक पहुंचे और ढींढसा परिवार के साथ रहने की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने सीधे रूप से बादल परिवार पर निशाना नहीं साधा लेकिन पार्टी के अंदर लोकतांत्रिक प्रणाली लागू होने की वकालत की। इस दौरान पावरकाम के पूर्व एएम गुरबचन सिंह बच्ची, मालेरकोटला से पूर्व मंत्री अब्दुल गफार, वरिष्ठ नेता सुखवंत सिंह सराओ, एसजीपीसी सदस्य हरदेव सिंह रोगला व मलकीत सिंह चंगाल हाजिर रहे।
फोटो: 05एसजीआरपी02: संगरूर में अपने निवास स्थान पर समर्थकों को संबोधित करते परमिंदर ढींढसा।
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परमिंदर ढींढसा ने कहा कि उनके पिता सुखदेव सिंह ढींढसा का उन पर किसी तरह का दबाव नहीं था। अपना फैसला लेने वह खुद सक्षम हैं। सीनियर ढींढसा ने उनके समक्ष स्पष्ट किया था कि सियासत के लिए इज्जत को दांव पर नहीं लगाना है। इज्जत के लिए सियासत करनी है और अकाली दल को मजबूत बनाना ही उनका लक्ष्य है। परमिंदर ने कहा कि उनका किसी व्यक्ति विशेष से मनमुटाव नहीं है। वरिष्ठ नेता चाहते हैं कि पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक व्यवस्था लागू नहीं होनी चाहिए। पार्टी के भीतर सामूहिक विचार करके फैसले होने चाहिए।
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बेअदबी मामले को लेकर उन्होंने कहा कि अकाली दल के सत्ता में रहते हुए बेअदबी के मामले हुए थे, लिहाजा लोगों की भावनाओं की कद्र करते हुए खेद व्यक्त किया जाना चाहिए था। विरोधियों की ओर से उनके विधायक पद से त्याग पत्र देने की मांग संबंधी परमिंदर ढींढसा ने कहा कि जनता ने उन्हें विधायक बनाया है। जनता कहेगी तो वह जरूर विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे। 2017 के विधानसभा चुनाव में अकाली दल के ज्यादातर वह अपने निजी रसूख के चलते विधायक निर्वाचित हुए थे।
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अकाली सियासत की तस्वीर बदलना तय
पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा की ओर अपने पिता सुखदेव सिंह ढींढसा के साथ चट्टान की तरह खडे़ रहने के एलान से जहां अकाली दल की मुसीबतें बढ़ गई हैं, वहीं मालवा इलाके में अकाली सियासत की तस्वीर बदलना तय माना जा रहा है। जूनियर ढींढसा ने अप्रत्यक्ष तौर पर इशारों में अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व पर सवाल उठाए। रविवार को उनके निवास स्थान पर सुनाम, लहरागागा, दिडबा व मालेरकोटला से भारी संख्या में समर्थक पहुंचे और ढींढसा परिवार के साथ रहने की घोषणा की। इस दौरान उन्होंने सीधे रूप से बादल परिवार पर निशाना नहीं साधा लेकिन पार्टी के अंदर लोकतांत्रिक प्रणाली लागू होने की वकालत की। इस दौरान पावरकाम के पूर्व एएम गुरबचन सिंह बच्ची, मालेरकोटला से पूर्व मंत्री अब्दुल गफार, वरिष्ठ नेता सुखवंत सिंह सराओ, एसजीपीसी सदस्य हरदेव सिंह रोगला व मलकीत सिंह चंगाल हाजिर रहे।
फोटो: 05एसजीआरपी02: संगरूर में अपने निवास स्थान पर समर्थकों को संबोधित करते परमिंदर ढींढसा।