{"_id":"61d2d24b4f2da84fe71da057","slug":"most-of-sleepers-of-up-and-down-railway-tracks-between-ludhiana-and-dhandari-railway-station-have-become-dilapidated","type":"story","status":"publish","title_hn":"खतरे में जिंदगी: जर्जर रेलवे ट्रैक पर दौड़ रही वंदे भारत एक्सप्रेस, जर्जर हो चुके हैं ज्यादातर स्लीपर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खतरे में जिंदगी: जर्जर रेलवे ट्रैक पर दौड़ रही वंदे भारत एक्सप्रेस, जर्जर हो चुके हैं ज्यादातर स्लीपर
Mon, 03 Jan 2022 04:09 PM IST
निवेदिता वर्मा
अमित जेतली, संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
अमित जेतली, संवाद न्यूज एजेंसी, लुधियाना
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 03 Jan 2022 04:09 PM IST
सार
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक लुधियाना से लेकर ढंडारी रेलवे स्टेशन के बीच अप और डाउन ट्रैक पर 24 घंटे में 150 से यात्री ट्रेनों का आवागमन होता है, जिसमें करीब डेढ़ लाख लोग सफर करते है। ऐसे में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जर्जर स्लीपर को तत्काल बदलने की आवश्यकता है।
विज्ञापन
लुधियाना में मेन ट्रैक की हालत।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
विस्तार
पंजाब की आर्थिक राजधानी लुधियाना रेलवे स्टेशन से होकर गुजरने वाली राजधानी और शताब्दी समेत 150 से ज्यादा ट्रेनों पर बेपटरी होने का खतरा मंडरा रहा है। लुधियाना से लेकर ढंडारी रेलवे स्टेशन के बीच अप और डाउन ट्रैक के अधिकतर स्लीपर जर्जर हो चुके हैं। इतना ही नहीं ट्रैक और स्लीपर के बीच अहम भूमिका निभाने वाले सेफ्टी क्लिप भी कई जगह गायब हैं। यदि रेल अधिकारियों ने समय रहते खामियों को दूर नहीं किया तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
इसी खस्ताहाल रेलवे ट्रैक से वंदे भारत एक्सप्रेस, राजधानी और शताब्दी समेत कई वीआईपी ट्रेनें गुजरती हैं। ट्रेनों की गति अधिक होने के कारण ट्रैक कभी भी अपनी जगह से खिसक सकता है और ट्रेन बेपटरी हो सकती है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक यहां से 24 घंटे में 150 से यात्री ट्रेनों का आवागमन होता है, जिसमें करीब डेढ़ लाख लोग सफर करते है। ऐसे में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जर्जर स्लीपर को तत्काल बदलने की आवश्यकता है।
सूत्रों के अनुसार इसके लिए सीधे तौर पर इंजीनियरिंग विभाग जिम्मेदार है। इंजीनियरिंग विभाग की ओर से ट्रैक चेकिंग के कार्य को पूरी गंभीरता से नहीं किया जाता, जिसके चलते टूटे स्लीपर तथा पेनड्रोल क्लिप गायब होने के बारे में समय रहते पता नहीं चल पाता। ऊपर से ट्रेन परिचालन विभाग भी अपनी समझदारी का परिचय देते हुए खस्ताहाल ट्रैक से ट्रेनें पास करवा देता है, जिससे हादसा होने की संभावना बढ़ जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
इसी खस्ताहाल रेलवे ट्रैक से वंदे भारत एक्सप्रेस, राजधानी और शताब्दी समेत कई वीआईपी ट्रेनें गुजरती हैं। ट्रेनों की गति अधिक होने के कारण ट्रैक कभी भी अपनी जगह से खिसक सकता है और ट्रेन बेपटरी हो सकती है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक यहां से 24 घंटे में 150 से यात्री ट्रेनों का आवागमन होता है, जिसमें करीब डेढ़ लाख लोग सफर करते है। ऐसे में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जर्जर स्लीपर को तत्काल बदलने की आवश्यकता है।
विज्ञापन
सूत्रों के अनुसार इसके लिए सीधे तौर पर इंजीनियरिंग विभाग जिम्मेदार है। इंजीनियरिंग विभाग की ओर से ट्रैक चेकिंग के कार्य को पूरी गंभीरता से नहीं किया जाता, जिसके चलते टूटे स्लीपर तथा पेनड्रोल क्लिप गायब होने के बारे में समय रहते पता नहीं चल पाता। ऊपर से ट्रेन परिचालन विभाग भी अपनी समझदारी का परिचय देते हुए खस्ताहाल ट्रैक से ट्रेनें पास करवा देता है, जिससे हादसा होने की संभावना बढ़ जाती है।
विज्ञापन
ट्रेनों का संचालन होने के कारण थोड़ी बहुत टूट फूट होती रहती है। किसी तरह की अनहोनी से बचने के लिए रेलवे के कर्मचारी लगातार ट्रैक का निरीक्षण करते हैं। यदि उन्हें किसी जगह पर कोई कमी दिखाई देती है तो वह तत्काल विभागीय अधिकारियों को सूचित करने के साथ कंट्रोल को मैसेज देते हैं। - सीमा शर्मा, डीआरएम फिरोजपुर रेल मंडल।