{"_id":"61325cd6a674fa3212185c60","slug":"ludhiana-session-court-dismisses-plea-of-capt-amarinder-singh-and-his-son","type":"story","status":"publish","title_hn":"लुधियाना: कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके बेटे की याचिका खारिज, आयकर से जुड़ा है मामला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लुधियाना: कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके बेटे की याचिका खारिज, आयकर से जुड़ा है मामला
Fri, 03 Sep 2021 11:13 PM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Fri, 03 Sep 2021 11:13 PM IST
सार
प्रवर्तन निदेशालय को आयकर मामलों की फाइलों का निरीक्षण करने की इजाजत देने वाले निचली अदालत के फैसलों को कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके बेटे ने सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी। शुक्रवार को सत्र न्यायालय ने कैप्टन और उनके बेटी की याचिका को खारिज कर दी है।
विज्ञापन
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह
- फोटो : twitter.com/capt_amarinder
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
अतिरिक्त सत्र न्यायधीश राजकुमार गर्ग की अदालत ने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके बेटे रणइंदर सिंह की ओर से ईडी (प्रवर्तन न्यायलय) को आयकर मामलों की फाइलों का निरीक्षण करने की इजाजत देने संबंधी फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी हैं। ईडी ने फेमा के तहत उनके पास लंबित एक जांच के संबंध में स्थानीय अदालत में लंबित फाइलों का निरीक्षण करने के लिए अर्जियां दायर की थीं।
विज्ञापन
तत्कालीन ड्यूटी मजिस्ट्रेट जसवीर सिंह की अदालत ने इन याचिकाओं को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री और उनके बेटे के खिलाफ लंबित आयकर से संबंधित फाइलों का निरीक्षण करने की इजाजत दी थी। 28 सितंबर 2020 को ईडी के अधिकारी इन फाइलों के निरीक्षण के लिए अदालत गए थे लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा था।
विज्ञापन
मुख्यमंत्री और उनके बेटे ने निचली अदालत के फैसले को सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी। अतिरिक्त सत्र न्यायधीश अतुल कसाना की अदालत ने उन्हें स्टे दे दिया था। मुख्यमंत्री ने याचिका में दावा किया था कि ईडी के पास इस मामले की जांच करने का कोई अधिकार नहीं है।
विज्ञापन
आयकर चोरी के कथित आरोपों के साथ आयकर विभाग की फौजदारी शिकायतें स्थानीय अदालत के समक्ष लंबित हैं। याचिका में दावा किया था कि उनका पक्ष जाने बिना आदेश पारित किया गया। इस तरह के आदेश को पारित किया जाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ था।