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Punjab: हाथों में चूड़ा...आंखों में आंसू, 6 माह पहले हुई थी प्रीतपाल की शादी, पत्नी से किया वादा नहीं हुआ पूरा

Sun, 10 Aug 2025 12:55 PM IST
अंकेश ठाकुर संवाद न्यूज एजेंसी, समराला/लुधियाना
संवाद न्यूज एजेंसी, समराला/लुधियाना Published by: अंकेश ठाकुर Updated Sun, 10 Aug 2025 12:55 PM IST
सार

देश के लिए बलिदान देने वाले लुधियाना जिले के सैन्य जवान प्रीतपाल सिंह की छह महीने पहले शादी हुई थी। पत्नी के हाथ से मेहंदी का रंग भी नहीं उतरा था और हाथों में लाल चूड़ा पहने उनकी पत्नी गहरे सदमे में हैं। 

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Ludhiana jawan Preetpal Singh martyred in terrorist encounter in Jammu Kashmir he married six months ago
बलिदानी प्रीतपाल सिंह की पत्नी के हाथों में लाल चूड़ा। - फोटो : संवाद

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में बलिदान हुए लुधियाना जिले के मानुपुर गांव के जवान प्रीतपाल सिंह (29) ने शुक्रवार देर रात वीरगति प्राप्त की। मात्र छह महीने पहले शादी के बंधन में बंधे प्रीतपाल की शहादत की खबर से गांव में शोक की लहर दौड़ गई। 

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26 फरवरी 2025 को प्रीतपाल की शादी मानुपुर की ही मनप्रीत कौर से हुई थी। शादी के दो महीने बाद अप्रैल में वे ड्यूटी पर लौट गए। अगस्त के आखिर में वे छुट्टी लेकर घर आने वाले थे। प्रीतपाल सिंह ने पत्नी से वादा किया था कि वह अपनी पहली दिवाली एक साथ मनाएंगे। यह उनकी पत्नी के साथ पहली दिवाली होती लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। परिवार और पत्नी को उम्मीद थी कि इस बार के त्योहार वे साथ मनाएंगे लेकिन अब उनकी जगह सिर्फ यादें रह गई हैं।
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बलिदानी के बड़े भाई मनप्रीत सिंह ने बताया कि शुक्रवार को उनकी प्रीतपाल से फोन पर आखिरी बार बात हुई थी। उन्होंने बताया था कि आतंकियों को पकड़ने के लिए ऑपरेशन चल रहा है और गोलीबारी जारी है। शनिवार सुबह यूनिट के एक साथी ने फोन कर बताया कि प्रीतपाल घायल हो गए हैं और अस्पताल में भर्ती हैं लेकिन कुछ ही देर बाद यूनिट के एक अधिकारी का फोन आया कि आपके भाई ने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। ये सुनते ही मेरे पैरों तले से जमीन खिसक गई, मैं कुछ बोल ही नहीं पाया।
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अभी नहीं उतरी पत्नी के हाथों की मेहंदी
जैसे ही बलिदान की खबर गांव पहुंची तो पूरे इलाके में सन्नाटा छा गया। मानुपुर के लोग घर-घर से निकलकर शहीद के घर पहुंचे। परिजन, रिश्तेदार और ग्रामीण सबकी आंखें नम थीं। पत्नी मनप्रीत कौर गुमसुम बैठी थीं, हाथों की मेहंदी और लाल चूड़ा देखकर लोग रो पड़े। गांव में सिर्फ एक ही चर्चा थी कि हमारा लाल देश के लिए कुर्बान हो गया। प्रीतपाल सिंह का पार्थिव शरीर रविवार को मानुपुर पहुंचेगा जहां सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया जाएगा। गांव में शहीद की अंतिम यात्रा की तैयारी शुरू हो चुकी है। सैकड़ों लोग उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए जुटने लगे हैं। मानुपुर का यह वीर सपूत भले ही आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी शहादत हमेशा आने वाली पीढ़ियों को देश सेवा का संदेश देती रहेगी।


अब भी गूंज रहे शब्द... चिंता मत करना, मैं जल्दी लौटूंगा
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि प्रीतपाल बचपन से ही सेना में भर्ती होने का सपना देखते थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने 2015 में सेना ज्वाइन की और हमेशा ड्यूटी को सबसे ऊपर रखा। शादी के बाद भी उन्होंने देश सेवा के जज्बे में कोई कमी नहीं आने दी। उनके दोस्त बताते हैं कि प्रीतपाल हमेशा हंसमुख, मददगार और बहादुर थे। ऑपरेशन पर निकलते समय भी उन्होंने घर वालों को हौसला दिया और कहा था- चिंता मत करना, मैं जल्दी लौटूंगा।

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