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लुधियाना में बढ़ते प्रदूषण पर जताई चिंता
अमर उजाला, लुधियाना
Updated Tue, 04 Feb 2014 09:58 PM IST
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट के लुधियाना चेप्टर की ओर से लोधी क्लब में सेमिनार आयोजित किया गया। इसमें लुधियाना में बढ़ रहे वायु, पानी एवं ध्वनि प्रदूषण पर चिंता जताई और इसके समाधान तलाशने का प्रयास किया। आर्किटेक्ट्स का मानना है कि शहर की गैर योजनाबद्ध तरीके से हो रही ग्रोथ प्रदूषण बढ़ाने में बड़ा कारण है। प्लानिंग के साथ शहर का विकास करके, लोगों को जागरूक करके, पर्यावरण संतुलन की दिशा में काम करके ही प्रदूषण कम किया जा सकता है।
सेमिनार में इंस्टीट्यूट से निकलने वाले जनरल के एडिटर सुरिंदर कुमार के अलावा एचएस बोपाराय, राजन तांगड़ी, संजय गोयल समेत कई माहिरों ने अपने विचार रखे। सुरिंदर ने कहा कि येल विश्वविद्यालय की ताजा स्टडी में यह साफ हुआ है कि भारत के कई शहर विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों की कतार में शुमार हैं। दिल्ली और बीजिंग विश्व के सबसे प्रदूषित शहर हैं। लुधियाना विश्व का चौथा सबसे प्रदूषित शहर है।
कई दशकों के प्रयासों के बावजूद बुड्ढा नाला की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। सौ मीटर नीचे तक का पानी पीने योग्य नहीं है। ध्वनि प्रदूषण भी अपनी सभी सीमाएं लांघ चुका है। मेट्रो ट्रेन, इलेक्ट्रिक बस, बुड्ढा नाला की समस्या, पंद्रह साल पुराने वाहनों को कंडम करना, कारों पर नई नीति बनाना, लोगों पर वाहन रखने की सीमा तय करना, अधिक से अधिक पौधे लगाना, हरियाली को बढ़ावा देकर ही इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। इस अवसर पर बिमलदीप सिंह, योगेश सिंगला, एसडी सिंह, जेएस कलसी और हरिंदर बोपाराय मौजूद रहे।
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सेमिनार में इंस्टीट्यूट से निकलने वाले जनरल के एडिटर सुरिंदर कुमार के अलावा एचएस बोपाराय, राजन तांगड़ी, संजय गोयल समेत कई माहिरों ने अपने विचार रखे। सुरिंदर ने कहा कि येल विश्वविद्यालय की ताजा स्टडी में यह साफ हुआ है कि भारत के कई शहर विश्व के सबसे प्रदूषित शहरों की कतार में शुमार हैं। दिल्ली और बीजिंग विश्व के सबसे प्रदूषित शहर हैं। लुधियाना विश्व का चौथा सबसे प्रदूषित शहर है।
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कई दशकों के प्रयासों के बावजूद बुड्ढा नाला की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। सौ मीटर नीचे तक का पानी पीने योग्य नहीं है। ध्वनि प्रदूषण भी अपनी सभी सीमाएं लांघ चुका है। मेट्रो ट्रेन, इलेक्ट्रिक बस, बुड्ढा नाला की समस्या, पंद्रह साल पुराने वाहनों को कंडम करना, कारों पर नई नीति बनाना, लोगों पर वाहन रखने की सीमा तय करना, अधिक से अधिक पौधे लगाना, हरियाली को बढ़ावा देकर ही इस समस्या का समाधान निकाला जा सकता है। इस अवसर पर बिमलदीप सिंह, योगेश सिंगला, एसडी सिंह, जेएस कलसी और हरिंदर बोपाराय मौजूद रहे।
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