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लुधियाना गैस लीक की आंखों देखी: 'दूर भागा तभी जिंदा बचा, नहीं तो मौत निश्चित थी', भगवान ने बेटे को बचाया मगर..
Mon, 01 May 2023 11:14 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, लुधियाना (पंजाब)
अमर उजाला नेटवर्क, लुधियाना (पंजाब)
Published by: शाहरुख खान
Updated Mon, 01 May 2023 11:14 AM IST
सार
लुधियाना गैस लीक कांड के बाद टेलर की दुकान चलाने वाले शिव शंकर ने बताया कि दूर भागा तभी जिंदा बचा नहीं तो मौत निश्चित थी। आंखों देखा मंजर और महसूस किए पलों को जिंदगी भर भूलेंगे नहीं । उधर, संजय गुप्ता ने कहा कि भगवान ने बेटे को बचा लिया लेकिन करीबी मित्र का पूरा परिवार खत्म हो गया।
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Ludhiana Gas Leak
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
लुधियाना के ग्यासपुरा में गैस रिसाव वाली जगह के नजदीक टेलर की दुकान चलाने वाले शिव शंकर ने बताया कि रविवार को आंखों देखा मंजर और महसूस किए पलों को जिंदगी भर नहीं भूलेंगे। सुबह 7 बजे तक सबकुछ सामान्य था, फिर अचानक ऐसा लगा कि जैसे हवा में किसी ने जहर घोल दिया हो। दुर्गंध से दम घुटने लगा। वह दुकान बंद करके दूर खुली जगह पर भाग गए।
तभी पता चला कि दुकान के पास ही गैस का रिसाव हुआ है और कई लोगों की मौत हो गई है। यह सुनकर रूह कांप उठी। ऐसा लगा कि मौत छूकर गुजर गई है। सुबह का समय होने की वजह से अभी मार्केट पूरी नहीं खुली थी। तकरीबन एक घंटे बाद किसी तरह से हिम्मत करके दुकान पर वापस लौटे तो चारों तरफ चीख पुकार मची हुई थी।
पुलिस शवों को ले जा रही थी। इनमें से ज्यादातर लोग जानकार थे। उन्होंने कहा कि वे दुकान बंद करके दूर भागने की वजह से जिंदा बच गए, नहीं तो मौत निश्चित थी। ऐसा भयानक मंजर जिंदगी में आज तक कभी नहीं देखा था। भगवान ने उन्हें भले ही बचा लिया, लेकिन आसपास के जो लोग छोड़कर चले गए वे जिंदगी भर नहीं भूलेंगे।
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भगवान ने बेटे को बचाया, मगर करीबी मित्र का पूरा परिवार खत्म
लुधियाना के सिविल अस्पताल पहुंचे ग्यासपुरा के सूआ रोड निवासी और भाजपा के मंडल प्रधान संजय गुप्ता ने भरे मन से रविवार सुबह के भयानक मंजर को बयां किया। संजय ने बताया कि उनका घर हादसे वाली जगह से करीब 500 मीटर दूर है। गैस रिसाव से चंद मिनट पहले उनका बेटा उसी बूथ से दूध लेकर लौटा था।
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तभी पता चला कि दुकान के पास ही गैस का रिसाव हुआ है और कई लोगों की मौत हो गई है। यह सुनकर रूह कांप उठी। ऐसा लगा कि मौत छूकर गुजर गई है। सुबह का समय होने की वजह से अभी मार्केट पूरी नहीं खुली थी। तकरीबन एक घंटे बाद किसी तरह से हिम्मत करके दुकान पर वापस लौटे तो चारों तरफ चीख पुकार मची हुई थी।
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पुलिस शवों को ले जा रही थी। इनमें से ज्यादातर लोग जानकार थे। उन्होंने कहा कि वे दुकान बंद करके दूर भागने की वजह से जिंदा बच गए, नहीं तो मौत निश्चित थी। ऐसा भयानक मंजर जिंदगी में आज तक कभी नहीं देखा था। भगवान ने उन्हें भले ही बचा लिया, लेकिन आसपास के जो लोग छोड़कर चले गए वे जिंदगी भर नहीं भूलेंगे।
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भगवान ने बेटे को बचाया, मगर करीबी मित्र का पूरा परिवार खत्म
लुधियाना के सिविल अस्पताल पहुंचे ग्यासपुरा के सूआ रोड निवासी और भाजपा के मंडल प्रधान संजय गुप्ता ने भरे मन से रविवार सुबह के भयानक मंजर को बयां किया। संजय ने बताया कि उनका घर हादसे वाली जगह से करीब 500 मीटर दूर है। गैस रिसाव से चंद मिनट पहले उनका बेटा उसी बूथ से दूध लेकर लौटा था।
कुछ देर बाद पूरे इलाके में अजीब सी दुर्गंध फैल गई, जिसने आसपास के लोगों अपने चपेट में ले लिया। भगवान ने उनके बेटे को तो बचा लिया, लेकिन आस पड़ोस के कई लोग सदा के लिए छोड़कर चले गए। उनके करीबी मित्र और पास में ही स्थित आरती क्लीनिक के डाक्टर कविलाश यादव और उनका पूरा परिवार खत्म हो गया। कविलाश मूल रूप से बिहार के गया जिले के रहने वाले थे।
वह करीब 20 साल से ग्यासपुरा में क्लीनिक चला रहे थे। उनकी नीचे क्लीनिक और ऊपर रिहायश थी। गैस रिसाव वाली जगह के बिल्कुल पास कविलाश का क्लीनिक था, जिस कारण घर में सो रहा परिवार जहरीली गैस की जद में आ गया। कविलाश (40), उनकी पत्नी वर्षा (35), बेटे आर्यन (10), अभय (13) तथा बेटी कल्पना (16) सहित पूरा परिवार सदा के लिए मौत की नींद सो गया।
पुरानी घटनाओं से भी नहीं लिया सबक
लुधियाना औद्योगिक नगरी लुधियाना में फैक्टरियों में गैस रिसाव की घटनाएं आम हैं, लेकिन प्रशासन इससे कोई सबक नहीं ले रहा। कार्रवाई का आश्वासन होता है और चेकिंग का आश्वासन होता है, लेकिन एक्शन नहीं लिया जाता। महानगर में यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी अमोनिया गैस रिसाव हो चुकी है, जिसमें पांच लोग अपनी जान गवा चुके है।
लुधियाना औद्योगिक नगरी लुधियाना में फैक्टरियों में गैस रिसाव की घटनाएं आम हैं, लेकिन प्रशासन इससे कोई सबक नहीं ले रहा। कार्रवाई का आश्वासन होता है और चेकिंग का आश्वासन होता है, लेकिन एक्शन नहीं लिया जाता। महानगर में यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी अमोनिया गैस रिसाव हो चुकी है, जिसमें पांच लोग अपनी जान गवा चुके है।
इसके बाद भी संबंधित विभाग की तरफ से कोई जांच की गई और न ही किसी बड़ी फैक्टरी पर कार्रवाई हुई। महानगर में ऐसी कई फैक्ट्रियां हैं जो वेस्ट को सीधे सीवरेज में डालती हैं, लेकिन प्रशासन आंखें मूंद कर बैठा है।
जून 2015 में दोराहा पुल के नीचे अमोनिया गैस लेकर जा रहा कैंटर फंस गया था और देर रात को गैस लीकेज हो गई थी। जिस कारण करीब एक किलोमीटर तक एरिया में गैस का असर देखने को मिला था। कई लोगों को सांस लेने में दिक्कत आई थी। इस हादसे में पांच लोगों की जान चली गई थी, जबकि कई लोग बीमार हो गए थे।
उसके बाद नवंबर 2022 में आक्सीजन बनाने वाली वेल्सेट कंपनी में गैस स्टोरेज करते समय टैंकर का वॉल्व लीक हो गया था, जिसमें वहां गैस कई मजदूरों को चढ़ गई थी। जिस कारण करीब पांच मजदूरों की हालत खराब हो गई थी। इसके बावजूद भी प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया।