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Dussehra: श्रीराम के आठ क्विंटल के सिंहासन को कंधों पर उठाकर घुमाता है मेहरा परिवार, 200 साल पुरानी है परंपरा
Sat, 12 Oct 2024 08:54 AM IST
निवेदिता वर्मा
राजीव शर्मा, संवाद, लुधियाना (पंजाब)
राजीव शर्मा, संवाद, लुधियाना (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sat, 12 Oct 2024 08:54 AM IST
सार
उच्चा पिंड सुनेत एवं पमाल के महिंदर सिंह ठेकेदार कहते हैं कि वे 70 साल से डोले को अपने भाइयों एवं रिश्तेदारों संग उठा रहे हैं। उनके पिता बाबू राम भी यहीं कार्य करते थे। परमिंदर एवं जगरूप ने कहा कि उनकी आने वाली पीढ़ी भी इस परंपरा को कायम रखेगी।
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लुधियाना में दशहरे से पहले निकाला जाता है श्रीराम का डोला
- फोटो : संवाद
विस्तार
वक्त के बदलने से लोग बदलते हैं, उनके मिजाज बदलते हैं, लेकिन हजारों साल से चली आ रही परंपराएं नहीं बदलती। परंपराओं की धरोहर को हर पीढ़ी के लोग पूरी शिद्दत से निभाते हैं और इसे पूरी श्रद्धा के साथ अगली पीढ़ी को सौंपते हैं। तभी तो हर पीढ़ी के लोग इनसे जुड़े रह कर खुद को खुशनसीब मानते हैं, ऐसी ही धार्मिक परंपराओं को संजो कर रखने वाले लोगों पर प्रभु कृपा भी बनी रहती है।
लुधियाना में भी दशहरे से पहले प्रभु श्री राम के डोले (सिंहासन) की यात्रा निकालने की परंपरा 200 साल से भी पुरानी है। आज भी शहर में शारदीय नवरात्रों के अवसर पर ठाकुरद्वारा नौहरियां से प्रभु श्री राम की सिंहासन यात्रा पूरी श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ निकाली जाती है। दूर दूर से लोग इस यात्रा को देखने आते हैं और प्रभु का आशीर्वाद पाते हैं।
शारदीय नवरात्रों के दिनों में यह उत्सव मनाया जाता है। नवरात्र से लेकर दशहरे तक एक ही परिवार के बारह लोग अपने कंधों पर प्रभु श्री राम के सिंहासन को उठाकर ठाकुरद्वारा से विभिन्न क्षेत्रों से होते हुए दरेसी के रामलीला मैदान में पहुंचते हैं। यहां पर भव्य रामायण का आयोजन होता है। दरेसी से प्रभु के सिंहासन को यहीं लोग वापस ठाकुरद्वारा लाते हैं और यह सिलसिला दस-ग्यारह दिन तक चलता है। गांव उच्चा पिंड सुनेत का मेहरा परिवार चार पीढि़यों से इस डोले की सेवा कर रहा है।
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लुधियाना में भी दशहरे से पहले प्रभु श्री राम के डोले (सिंहासन) की यात्रा निकालने की परंपरा 200 साल से भी पुरानी है। आज भी शहर में शारदीय नवरात्रों के अवसर पर ठाकुरद्वारा नौहरियां से प्रभु श्री राम की सिंहासन यात्रा पूरी श्रद्धा एवं धूमधाम के साथ निकाली जाती है। दूर दूर से लोग इस यात्रा को देखने आते हैं और प्रभु का आशीर्वाद पाते हैं।
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शारदीय नवरात्रों के दिनों में यह उत्सव मनाया जाता है। नवरात्र से लेकर दशहरे तक एक ही परिवार के बारह लोग अपने कंधों पर प्रभु श्री राम के सिंहासन को उठाकर ठाकुरद्वारा से विभिन्न क्षेत्रों से होते हुए दरेसी के रामलीला मैदान में पहुंचते हैं। यहां पर भव्य रामायण का आयोजन होता है। दरेसी से प्रभु के सिंहासन को यहीं लोग वापस ठाकुरद्वारा लाते हैं और यह सिलसिला दस-ग्यारह दिन तक चलता है। गांव उच्चा पिंड सुनेत का मेहरा परिवार चार पीढि़यों से इस डोले की सेवा कर रहा है।
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