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लापरवाही : लुधियाना में धूल फांक रही कोरोना टेस्टिंग मोबाइल क्लीनिक एंबुलेंस, सीएम अमरिंदर सिंह ने की थी शुरुआत

Thu, 08 Apr 2021 07:13 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लुधियाना (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Thu, 08 Apr 2021 07:13 PM IST
सार

  • 28 अगस्त 2020 को सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिखाई थी हरी झंडी 
  • जनवरी 2021 के बाद एक बार भी जिला प्रशासन ने नहीं किया इस्तेमाल 

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Ludhiana Administration not use Mobile Corona Testing Ambulance from January
सिटी बस अड्डे पर खड़ी एंबुलेंस। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पंजाब सरकार लगातार कोरोना की जांच बढ़ाने का आदेश दे रही है। बावजूद इसके कोरोना टेस्टिंग मोबाइल क्लीनिक और एंबुलेंस का जनवरी 2021 के बाद लुधियाना जिला प्रशासन ने एक बार भी इस्तेमाल नहीं किया है। बता दें कि मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने 28 अगस्त 2020 को इस सेवा का शुभारंभ किया था। इस सेवा को शुरू करने का उद्देश्य जांच में तेजी लाना था।

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अब कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर चल रही है लेकिन यह टेस्टिंग मोबाइल क्लीनिक शहर के हंबड़ा रोड पर धूल फांक रही है। अब इसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। यह मोबाइल क्लीनिक आधुनिक सुविधाओं से लैस है। 
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यह एंबुलेंस सन फाउंडेशन के चेयरमैन और विश्व पंजाबी संस्था के अंतरराष्ट्रीय प्रधान विक्रमजीत सिंह साहनी ने दान की थी। इसमें टेस्टिंग के हर आधुनिक इंतजाम हैं। जनवरी 2021 के पहले सप्ताह से एंबुलेंस को सिटी बस अड्डे में खड़ा कर दिया गया था। उसके बाद इसे दोबारा कभी नहीं चलाया गया। अब संक्रमण दोबारा तेजी से फैल रहा है, तब भी एंबुलेंस का इस्तेमाल प्रशासन नहीं कर रहा है। 

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यह सुविधाएं हैं

एंबुलेंस को तीन हिस्सों में बांटा गया है। पहले हिस्से में ड्राइवर के ठीक पीछे एक केबिन है। इसमें मेडिकल टीम के बैठने की सुविधा है। इसमें एयर कंडीशनर, स्वचलित सैनिटाइजर मशीन, एयर फ्यूरीफायर, टेस्टिंग का रिकॉर्ड रखने के लिए लैपटॉप, छोटा फ्रीज सहित कई अन्य सामान मौजूद है। इस कैबिन से दूसरी तरफ टेस्ट करने के लिए दो बड़े होल हैं, जिनके आगे दस्ताने लगे हैं।

दूसरा कैबिन संदिग्ध मरीजों के सैंपल लेने के लिए तैयार किया है। यहां उनके बैठने के लिए कुर्सी, एक एयर कंडीशनर, एलईडी स्क्रीन के अलावा स्वचलित सैनिटाइजर मशीन को लगाया गया है। बस के सबसे अंतिम छोर में दो बेड हैं। यहां पर मरीजों को लिटाया जा सकता है। ऑक्सीजन सिलिंडर की व्यवस्था भी है। सभी उपकरणों को संचालित करने के लिए एक जनरेटर भी है।

इस मामले को लेकर डीसी वरिंदर शर्मा के मोबाइल फोन पर कई बार संपर्क किया गया लेकिन उन्होंने मोबाइल कॉल का जबाव नहीं दिया। उनके व्हाट्सएप पर भी फोटो समेत इस मामले के बारे में पूछा गया। फिलहाल कोई जवाब नहीं आया है।

हमें प्रशासन ने दो बसें मुहैया करवाई थी। स्वास्थ्य विभाग इनका लगातार इस्तेमाल कर रहा है। कोरोना टेस्टिंग मोबाइल क्लीनिक और एंबुलेंस को सरकार ने सीधे प्रशासन को दिया था। इसलिए वह जिला प्रशासन के पास है। इसके संबंध में ज्यादा जानकारी जिला प्रशासन दे सकता है। डॉ. सुखजीवन कक्कड़, सिविल सर्जन लुधियाना ।

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