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झोटा हत्याकांड: मानसा मेडिकल हाॅल में सीबीआई की दबिश, मोहाली फैक्टरी के साथ जुड़ा लिंक; पिता ने रखी नई मांग
Sat, 24 Oct 2026 03:09 PM IST
Nivedita
भारत भूषण मित्तल, मानसा/बठिंडा
भारत भूषण मित्तल, मानसा/बठिंडा
Published by: Nivedita
Updated Sat, 24 Oct 2026 03:09 PM IST
सार
परविंदर झोटा की पत्नी मनप्रीत कौर ने कहा कि मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक का इस्तीफा इंसाफ कमेटी और उनके परिवार की मांग है। उन्होंने कहा कि इस घटना के लिए नैतिक रूप से वे ही जिम्मेदार हैं।
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झोटा हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के 11 दिन बाद भी गतिरोध बरकरार है। इंसाफ कमेटी और एसआईटी के बीच शुक्रवार को तीसरी बैठक बेनतीजा रही। शनिवार को झोटा के पिता ने नई मांग की है। उन्होंने सरकार से मानसा के एसएसपी वैभव शर्मा को बदलने की मांग की है।
वहीं मानसा के एक मेडिकल से जुड़े बड़े गोदाम पर सीबीआई की रेड पिछले कई घंटे से चल रही है। सूत्र बताते है कि आरोपी अश्वनी ने सीबीआई पूछताछ में खुलासा किया है, कि मानसा मेडिकल हाॅल नाम की दुकान पर कुछ दवाएं पड़ी हैं, जिसके बाद सीबीआई टीम शुक्रवार एवं शनिवार की आधी रात मानसा पहुंची। टीम ने काफी देर तक जांच पड़ताल की। टीम के साथ सस्पेंड चल रहा ड्रग इंस्पेक्टर नरेश कुमार भी था।
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सूत्रों के अनुसार, दुकान से कुछ दवाएं लेने के बाद टीम श्मशान घाट रोड पर मानसा मेडिकल हाल के गोदाम में जांच पड़ताल करने में जुटी हुई है।
मोहाली जिस फैक्टरी से आरोपी अश्वनी नशे के कैप्सूल लेकर आता था, उस फैक्टरी का लिंक भी मानसा मेडिकल हाल के साथ जुड़ रहा है, जिसके चलते सीबीआई ने रेड की है।
कमेटी ने मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक के इस्तीफे की अपनी मुख्य मांग दोहराई। एसआईटी ने इस मांग को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया। इसके बाद इंसाफ कमेटी ने मांग की कि उसके पास ऐसी समिति भेजी जाए जिसके पास मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक के इस्तीफे की मांग पूरी करने का अधिकार हो। एसआईटी ने इंसाफ कमेटी की बारह अन्य मांगें स्वीकार करने का भरोसा दिया। हालांकि, मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक के इस्तीफे पर कोई सहमति नहीं बन सकी।
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वहीं मानसा के एक मेडिकल से जुड़े बड़े गोदाम पर सीबीआई की रेड पिछले कई घंटे से चल रही है। सूत्र बताते है कि आरोपी अश्वनी ने सीबीआई पूछताछ में खुलासा किया है, कि मानसा मेडिकल हाॅल नाम की दुकान पर कुछ दवाएं पड़ी हैं, जिसके बाद सीबीआई टीम शुक्रवार एवं शनिवार की आधी रात मानसा पहुंची। टीम ने काफी देर तक जांच पड़ताल की। टीम के साथ सस्पेंड चल रहा ड्रग इंस्पेक्टर नरेश कुमार भी था।
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सूत्रों के अनुसार, दुकान से कुछ दवाएं लेने के बाद टीम श्मशान घाट रोड पर मानसा मेडिकल हाल के गोदाम में जांच पड़ताल करने में जुटी हुई है।
मोहाली जिस फैक्टरी से आरोपी अश्वनी नशे के कैप्सूल लेकर आता था, उस फैक्टरी का लिंक भी मानसा मेडिकल हाल के साथ जुड़ रहा है, जिसके चलते सीबीआई ने रेड की है।
कमेटी ने मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक के इस्तीफे की अपनी मुख्य मांग दोहराई। एसआईटी ने इस मांग को अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया। इसके बाद इंसाफ कमेटी ने मांग की कि उसके पास ऐसी समिति भेजी जाए जिसके पास मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक के इस्तीफे की मांग पूरी करने का अधिकार हो। एसआईटी ने इंसाफ कमेटी की बारह अन्य मांगें स्वीकार करने का भरोसा दिया। हालांकि, मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक के इस्तीफे पर कोई सहमति नहीं बन सकी।
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25 अक्तूबर को होगा झाडू फूंक प्रदर्शन
कमेटी ने संघर्ष जारी रखने का एलान किया है। कमेटी 25 अक्तूबर को राज्य भर में झाड़ू फूंक प्रदर्शन करेगी। कमेटी ने ख्याला में बनने वाले ट्रॉमा सेंटर का नाम परविंदर झोटा के नाम पर रखने की भी मांग की। एसआईटी ने कहा कि सेंटर बनने के बाद नामकरण पर विचार किया जाएगा जिस पर कमेटी सहमत नहीं हुई।
इंसाफ कमेटी ने पंजाब सरकार पर नशे के खिलाफ युद्ध चलाने के बावजूद विधानसभा में परविंदर झोटा को केवल श्रद्धांजलि देने का आरोप लगाया। कमेटी ने कहा कि इस हत्या और नशे पर बहस होनी चाहिए थी। एसआईटी की अगुवाई कर रही अपनीत रियात ने बताया कि सरकार ने इंसाफ कमेटी की कई मांगें मान ली हैं। सरकार ने बिना डॉक्टर की पर्ची के प्रीगाबालीन की बिक्री पर रोक लगा दी है। परिवार को सुरक्षा देने और नई मांगों पर भी विचार किया जा रहा है।
परविंदर झोटा की पत्नी मनप्रीत कौर ने कहा कि मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक का इस्तीफा इंसाफ कमेटी और उनके परिवार की मांग है। उन्होंने कहा कि इस घटना के लिए नैतिक रूप से वे ही जिम्मेदार हैं। शुक्रवार को अभिनेता सोनू सूद और मालविका सूद ने भी परिवार से मिलकर दुख साझा किया। इस मौके पर कई किसान नेताओं और अन्य हस्तियों ने भी संबोधित किया।
कमेटी ने संघर्ष जारी रखने का एलान किया है। कमेटी 25 अक्तूबर को राज्य भर में झाड़ू फूंक प्रदर्शन करेगी। कमेटी ने ख्याला में बनने वाले ट्रॉमा सेंटर का नाम परविंदर झोटा के नाम पर रखने की भी मांग की। एसआईटी ने कहा कि सेंटर बनने के बाद नामकरण पर विचार किया जाएगा जिस पर कमेटी सहमत नहीं हुई।
इंसाफ कमेटी ने पंजाब सरकार पर नशे के खिलाफ युद्ध चलाने के बावजूद विधानसभा में परविंदर झोटा को केवल श्रद्धांजलि देने का आरोप लगाया। कमेटी ने कहा कि इस हत्या और नशे पर बहस होनी चाहिए थी। एसआईटी की अगुवाई कर रही अपनीत रियात ने बताया कि सरकार ने इंसाफ कमेटी की कई मांगें मान ली हैं। सरकार ने बिना डॉक्टर की पर्ची के प्रीगाबालीन की बिक्री पर रोक लगा दी है। परिवार को सुरक्षा देने और नई मांगों पर भी विचार किया जा रहा है।
परविंदर झोटा की पत्नी मनप्रीत कौर ने कहा कि मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक का इस्तीफा इंसाफ कमेटी और उनके परिवार की मांग है। उन्होंने कहा कि इस घटना के लिए नैतिक रूप से वे ही जिम्मेदार हैं। शुक्रवार को अभिनेता सोनू सूद और मालविका सूद ने भी परिवार से मिलकर दुख साझा किया। इस मौके पर कई किसान नेताओं और अन्य हस्तियों ने भी संबोधित किया।
पंजाब में नशे के लिए केंद्र और पंजाब दोनों जिम्मेदार: राकेश टिकैत
पंजाब में लगातार बढ़ रहे नशे के प्रसार के लिए केंद्र और पंजाब, दोनों सरकारें समान रूप से जिम्मेदार हैं। नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह ‘झोटा’ की हत्या केवल एक नौजवान की जान जाने का मामला नहीं है; बल्कि यह नशे के खिलाफ लड़ने वालों की सुरक्षा और सरकारों की जवाबदेही से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। यह बात भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय नेता राकेश टिकैत ने मानसा में परविंदर सिंह ‘झोटा’ के लिए न्याय की मांग को लेकर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कही।
टिकैत ने कहा कि नशे के कारोबार को खत्म करना दोनों प्रशासनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकारें नशे को जड़ से खत्म करने को लेकर गंभीर हैं, तो नशा तस्करों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब के युवाओं को नशे से बचाने के लिए केवल घोषणाएं करने के बजाय, जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई करने की जरूरत है।
किसान नेता ने जोर देकर कहा कि परविंदर सिंह ‘झोटा’ द्वारा शुरू की गई नशा-विरोधी लड़ाई को बीच में नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने इस आंदोलन को और व्यापक तथा मजबूत बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि संघर्ष को तेज किया जाना चाहिए ताकि न केवल ‘झोटा’ की हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा मिले, बल्कि नशा तस्करों के खिलाफ भी निर्णायक कार्रवाई हो सके।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पंजाब के युवाओं की जिंदगी से जुड़ा यह मुद्दा किसी एक परिवार या संगठन तक सीमित नहीं है। नशे की वजह से बर्बाद हो रहे परिवारों और अपने बेटों को खोने वाले माता-पिता का दर्द पूरे समाज का दर्द है। उन्होंने कहा कि किसानों, मजदूरों, युवाओं और सामाजिक संगठनों को मिलकर नशे के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
राकेश टिकैत ने कहा कि परविंदर सिंह झोटा के परिवार को न्याय दिलाने और नशीले पदार्थों के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए चल रहे संघर्ष को और तेज किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि इस लड़ाई का असली मकसद सिर्फ एक हत्या के मामले में न्याय पाना ही नहीं है, बल्कि एक ऐसा माहौल बनाना भी है, जहां नशीले पदार्थों के खिलाफ आवाज उठाने वाले किसी भी अन्य युवा को अपनी जान न गंवानी पड़े।
पंजाब में लगातार बढ़ रहे नशे के प्रसार के लिए केंद्र और पंजाब, दोनों सरकारें समान रूप से जिम्मेदार हैं। नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परविंदर सिंह ‘झोटा’ की हत्या केवल एक नौजवान की जान जाने का मामला नहीं है; बल्कि यह नशे के खिलाफ लड़ने वालों की सुरक्षा और सरकारों की जवाबदेही से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है। यह बात भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय नेता राकेश टिकैत ने मानसा में परविंदर सिंह ‘झोटा’ के लिए न्याय की मांग को लेकर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कही।
टिकैत ने कहा कि नशे के कारोबार को खत्म करना दोनों प्रशासनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सरकारें नशे को जड़ से खत्म करने को लेकर गंभीर हैं, तो नशा तस्करों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि पंजाब के युवाओं को नशे से बचाने के लिए केवल घोषणाएं करने के बजाय, जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई करने की जरूरत है।
किसान नेता ने जोर देकर कहा कि परविंदर सिंह ‘झोटा’ द्वारा शुरू की गई नशा-विरोधी लड़ाई को बीच में नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने इस आंदोलन को और व्यापक तथा मजबूत बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि संघर्ष को तेज किया जाना चाहिए ताकि न केवल ‘झोटा’ की हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा मिले, बल्कि नशा तस्करों के खिलाफ भी निर्णायक कार्रवाई हो सके।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पंजाब के युवाओं की जिंदगी से जुड़ा यह मुद्दा किसी एक परिवार या संगठन तक सीमित नहीं है। नशे की वजह से बर्बाद हो रहे परिवारों और अपने बेटों को खोने वाले माता-पिता का दर्द पूरे समाज का दर्द है। उन्होंने कहा कि किसानों, मजदूरों, युवाओं और सामाजिक संगठनों को मिलकर नशे के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
राकेश टिकैत ने कहा कि परविंदर सिंह झोटा के परिवार को न्याय दिलाने और नशीले पदार्थों के कारोबार पर लगाम लगाने के लिए चल रहे संघर्ष को और तेज किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि इस लड़ाई का असली मकसद सिर्फ एक हत्या के मामले में न्याय पाना ही नहीं है, बल्कि एक ऐसा माहौल बनाना भी है, जहां नशीले पदार्थों के खिलाफ आवाज उठाने वाले किसी भी अन्य युवा को अपनी जान न गंवानी पड़े।