इस्सेवाल गैंगरेप मामला: धमकी और करोड़ों का लालच दिया, मगर बहादुरी से लड़ती रही पीड़िता, मां बोली- ऐतिहासिक फैसला
पीड़िता की मां ने बताया कि बेशक मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया लेकिन घटना की रात पुलिस के गैर जिम्मेदाराना रवैये से पुलिस विभाग से मोह भंग हो गया है।
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पीड़िता की मां ने कहा कि इस ऐतिहासिक फैसले ने जहां एक तरफ उनकी बेटी को इंसाफ दिया है, वहीं हर बेटी को बहादुरी से दरिंदों के खिलाफ डटकर लड़ने की प्रेरणा भी दी है। उन्होंने कहा कि उनके दिल और दिमाग से मानो बहुत बड़ा बोझ हलका हो गया है। पिछले तीन साल से ठीक से सोई नहीं।
एक अनजाना डर उन्हें हर वक्त खौफ में जीने को विवश कर रखता था। अब वो शांति से जी सकेंगी। पीड़िता की मां ने रोते हुए कहा कि अब वह बेटी की शादी के बारे में सोच सकते हैं। इससे पहले अगर वह बेटी से शादी की बात भी करते तो वह इस बारे में बात भी नहीं करना चाहती थी। उन्होंने बताया कि पीड़िता जब डेढ़ साल की थी तो पति की अचानक मौत हो गई।
प्राइवेट स्कूल मे टीचर की नौकरी कर उसे पाला। पीड़िता अकेली औलाद थी जिसे हर खुशी देने की कोशिश की। दोनों सुकून से जिंदगी काट रहे थे, लेकिन 9 फरवरी 2019 की उस रात के बाद जिंदगी नरक बन गई। हर समय एक डर बना रहता। एक आहट भी दोनों को दहला जाती। बेटी ने खाना पीना छोड़ दिया। खुद को घर में कैद कर लिया। अब लगता है जिंदगी फिर से पटरी पर आ जाएगी। बेटी उस दुख को कभी भुला तो नहीं सकती लेकिन सोमवार के इस ऐतिहासिक फैसले से दुख कुछ कम जरूर होगा।
पीड़िता ने ठुकरा दी पंजाब पुलिस की नौकरी
पीड़िता की मां ने बताया कि बेशक मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया लेकिन घटना की रात पुलिस के गैर जिम्मेदाराना रवैये से पुलिस विभाग से मोह भंग हो गया है। बेटी हमेशा कहती है कि अगर घटना की रात दाखा पुलिस ने मुस्तैदी दिखाई होती तो आरोपी उसी रात पकड़े जाते और उसके साथ दुष्कर्म की घटना न होती।
आरोपियों ने उसे और उसके दोस्त को अगवा करने के बाद उनके एक अन्य दोस्त को फोन कर दो लाख रुपये फिरौती की मांग की थी। उनका दोस्त तुरंत थाना दाखा पहुंचा था लेकिन वहां मौजूद थाना प्रभारी और अन्य पुलिस कर्मियों ने कार्रवाई करने में कई घंटों लगा दिया। दाखा पुलिस उनके दोस्त को लेकर घटनास्थल के पास पहुंच भी गई थी लेकिन बिना उनकी तलाश किए औपचारिकता पूरी कर वापस लौट गई। पीड़िता की मां ने कहा इसी कारण सरकार बेटी ने पुलिस की नौकरी ठुकरा दी।
कई धमकियां मिलीं, लालच दिया लेकिन पीछे नहीं हटी पीड़िता
अदालत के फैसले को पीड़िता ने ऐतिहासिक बताया। तीन वर्षों के दौरान पीड़िता को जान से मारने की धमकी दी गई, जब इससे बात नहीं बनी तो उसे करोड़ों रुपये का लालच तक दिया गया। इसके बावजूद वह बहादुरी से लड़ती रही।
जेल में बंद आरोपियों के रिश्तेदारों और करीबियों ने बार-बार जान से मारने की धमकी देकर पीड़िता को गवाही से मुकरने को कहा। जब इससे बात नहीं बनी तो करोड़ों रुपये देने का लालच दिया लेकिन पीड़िता ने बहादुरी से सबका मुकाबला किया। धमकी और रुपये का लालच देने वाले मुख्य आरोपी जगरूप सिंह रुपी के पिता मलकीत सिंह और अन्य के खिलाफ लुधियाना के थाना सराभा नगर में अलग से मुकदमा दर्ज करवाया। मुख्य गवाह के घर में घुसकर धमकाने के आरोप में एक मुकदमा थाना दाखा में भी दर्ज हुआ। इतना सब कुछ होने के बावजूद पीड़िता, उसका दोस्त और मुख्य गवाह बहादुरी से मुकदमा लड़ते रहे।
एसआईटी की प्रमुख रहीं तत्कालीन आईजी और मौजूदा एडीजीपी वी नीरजा ने कहा कि 8 मार्च महिला दिवस से पहले आया फैसला पीड़िता की बहादुरी को समर्पित है। फैसले से सभी महिलाओं को अत्याचार के खिलाफ लड़ने की ताकत मिलेगी। वी नीरजा ने बताया कि मुख्य आरोपी जगरूप सिंह रुपी के मोबाइल फोन से 12 से अधिक महिलाओं के साथ दुष्कर्म किए जाने के सनसनीखेज सुबूत मिले थे।
आरोपी 2017 से महिलाओं को अगवा कर सामूहिक दुष्कर्म, लूट और फिरौती वसूली के अपराध करते आ रहे थे। लोक लाज के डर से कोई महिला रिपोर्ट करने नहीं आई। इनमें कई महिलाएं 45 या उससे भी अधिक उम्र की थी। आरोपियों ने जनवरी 2019 में भी हर सप्ताहांत पर कई महिलाओं से दुष्कर्म किया था फिर 9 फरवरी 2019 की रात इस्सेवाल सामूहिक दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया और यह अपराध इस गैंग का आखिरी अपराध बन गया। पीड़िता ने बहादुरी दिखाई और आगे आकर कई और महिलाओं को इसका शिकार होने से बचा लिया।