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हलवारा एयरपोर्ट: किसानों की गैरहाजिरी में सरकार ने सुना दिया जमीन का अवॉर्ड

Sat, 08 Feb 2020 10:48 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो कंवरपाल, हलवारा ( पंजाब)
कंवरपाल, हलवारा ( पंजाब) Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Sat, 08 Feb 2020 10:48 AM IST
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halwara airport land acquisition dispute
फाइल फोटो।

अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हलवारा के लिए जमीन अधिग्रहण के मामले में शुक्रवार को भूमि अधिग्रहण कलेक्टर ने किसानों की गैरहाजिरी में मुआवजा राशि घोषित कर दी। 161.27 एकड़ जमीन की एवज में सरकार किसानों को 39.40 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि देगी। 15 दिन में किसानों को अपने दस्तावेज दिखाकर मुआवजा राशि उठाने के आदेश जारी किए गए हैं।

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ऐसा न होने की सूरत में पूरी राशि को रेफरेंस कोर्ट (जिला सेशन जज) में जमा करवा दिया जाएगा। वही 15 दिन के बाद प्रशासन किसी भी समय पुलिस बल के साथ जमीन अधिग्रहण कर सकता है। इस फैसले के बाद गांव एतिआणा के किसानों में रोष बढ़ गया है। उनका साफ कहना है कि वह किसी अधिकारी को जमीन में घुसने नहीं देंगे चाहे उन्हें कोई भी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े।
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गौर हो कि एयरफोर्स स्टेशन हलवारा में केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट तैयार करने की योजना तैयार की थी। एयरपोर्ट के लिए सरकार को लगभग 161.27 एकड़ जमीन और चाहिए थी। जमीन अधिग्रहण का जिम्मा पंजाब सरकार को सौंपा गया था। प्रशासन और किसानों के बीच बातचीत के लिए तीला कंपनी को मध्यस्थ बनाया गया था। वीरवार को भूमि अधिग्रहण कलेक्टर की तरफ से किसानों को अवॉर्ड सुनने के लिए शुक्रवार को बुलाया गया था।

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इसके लिए बाकायदा नोटिस भेजे गए थे लेकिन किसानों ने प्रशासन के इन नोटिस को लिया नहीं, बल्कि 134 किसानों ने अधिकारियों को एक प्रस्ताव की कॉपी भेज दी थी। इसमें किसानों ने अपनी जमीन देने से साफ मना कर दिया था। शुक्रवार को भूमि अधिग्रहण कलेक्टर भूपिंदर सिंह ने किसानों की गैर हाजिरी में ही मुआवजा राशि की घोषणा कर दी।

161.27 एकड़ जमीन के बदले किसानों को 39.40 करोड़ रुपये की राशि मिलेगी। यह राशि 90 परिवारों में विभाजित होगी। इस राशि में पुनर्वास भत्ता, आर्थिक सर्वे (घर, ट्यूबवेल और अन्य चीजें) भी शामिल हैं। हिसाब लगाएं तो यह मुआवजा राशि 22 लाख रुपये प्रति एकड़ से भी कम बैठती है।

कुर्बानी देंगे, जमीन नहीं
सरकार के इस फैसले के बाद गांव एतिआणा के किसानों का आक्रोश बढ़ गया है। किसान सोहन सिंह कलकत्ता के अनुसार यह जमीन उनके पुरखों की है, इस गांव को शहीदों के गांव के नाम से जाना जाता है। वह किसी कीमत पर अपनी जमीन सरकार को नहीं देंगे। इसके लिए चाहे उन्हें अपनी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े।

सरकार के इस तानाशाही फैसले के खिलाफ आसपास के 25 गांवों के लोग भी हैं, जो उनके साथ संघर्ष करने को तैयार है। किसान सोहन सिंह ने कहा कि पहले उनके पास कई राजनीतिक दल आ रहे थे, परंतु वह इसे राजनीतिक रंग नहीं देना चाहते थे। अब वह राजनीतिक पार्टियों का सहारा भी लेंगे और इस मामले को अदालत में लेकर जाएंगे।

शुक्रवार को 161.27 एकड़ जमीन की मुआवजा राशि घोषित कर दी गई है, इससे सिंबोलिक तौर पर हमारा कब्जा हो गया है। हालांकि सभी किसानों को बुलाया गया था, लेकिन वह नहीं आए। अवॉर्ड से संबंधित रपट माल विभाग के पटवारी को भी भेज दी गई है। 15 दिन के अंदर किसान अपनी मुआवजा राशि ले जा सकते है। ऐसा नहीं करने पर पूरी राशि को रेफरेंस कोर्ट (जिला सेशन जज) में जमा करवा दिया जाएगा। इसके बाद प्रशासन पुलिस सुरक्षा बल के साथ जमीन का कब्जा लेगा। भूपिंदर सिंह, भूमि अधिग्रहण कलेक्टर

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