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बिजली महंगी करने के प्रस्ताव पर भड़के उद्यमी
अमर उजाला, लुधियाना
Updated Mon, 03 Feb 2014 10:08 PM IST
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पंजाब में बिजली की दरों में संशोधन के प्रस्ताव पर होमवर्क के लिए सोमवार को पंजाब स्टेट इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन ने पावर मुख्यालय में बिजली उपभोक्ताओं के साथ बैठक की।
उनके सुझाव और समस्याओं को जाना। इस अवसर पर यूनाइटेड साइकिल एंड पार्ट्स मैन्यूफेक्चरर्स एसोसिएशन (यूसीपीएमए) से जुड़े साइकिल उद्यमियों ने कमीशन के खिलाफ प्रदर्शन किया, जबकि इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन ऑफ नार्थ इंडिया और फॉस्टर मैन्यूफेक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इस बैठक का बायकाट किया। दोनों संगठनों ने रेगुलेटरी कमीशन को किसी तरह के सुझाव नहीं दिए।
बैठक में तमाम औद्योगिक संगठनों ने एक सुर में बिजली की कीमतों में वृद्धि के प्रस्ताव का जमकर विरोध किया और साफ किया कि प्रबंधकीय एवं वितरण और ट्रांसमिशन में बदलाव करके नुकसान को खत्म किया जा सकता है। विभिन्न औद्योगिक संगठनों के सुझाव, विरोध और समस्याओं से संबंधित ज्ञापन कमीशन ने आगे विचार के लिए स्वीकार किए हैं।
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कमीशन की चेयरपर्सन रोमिला दुबे ने कहा कि सभी समस्याओं और सुझावों पर उच्चस्तर पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद 18 फरवरी को फिर से बैठक करके सभी समस्याओं का हल निकालने का प्रयास किया जाएगा। इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन ने बैठक का बायकाट किया।
संगठन के प्रधान केके गर्ग का आरोप है कि कमीशन अपना काम पूरी ईमानदारी से नहीं निभा रहा है। औद्योगिक संगठनों से सुझाव लेना महज एक औपचारिकता है, इन पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। हालत यह है कि हर साल दरें बढ़ रही हैं, नतीजतन उत्तर क्षेत्र में सबसे महंगी बिजली पंजाब में है। संगठन ने मांग की है कि किसी रिटायर्ड जज को कमीशन का चेयरमैन नियुक्त किया जाए।
यूसीपीएमए के प्रधान चरणजीत सिंह विश्वकर्मा की अध्यक्षता में उद्यमियों ने कमीशन के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। विश्वकर्मा ने कहा कि चीन में लाइन लॉस 4 फीसदी हैं, जबकि यहां पर 17 फीसदी हैं। इनको कम करने की जरूरत है। पंजाब में कृषि क्षेत्र 29 फीसदी और औद्योगिक क्षेत्र 32 फीसदी बिजली की खपत कर रहा है। जबकि कृषि से राजस्व निल और औद्योगिक क्षेत्र से 50 फीसदी है। चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कामर्शियल अंडरटेकिंग्स ने भी बिजली की दरों में प्रस्तावित वृद्धि का विरोध किया है। चैंबर के महासचिव उपकार सिंह ने सभी आंकड़ों के साथ कमीशन को यह समझाने का प्रयास किया कि बिजली विभाग के सिस्टम को दुरुस्त करके ही सारे घाटे को पूरा किया जा सकता है।
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उनके सुझाव और समस्याओं को जाना। इस अवसर पर यूनाइटेड साइकिल एंड पार्ट्स मैन्यूफेक्चरर्स एसोसिएशन (यूसीपीएमए) से जुड़े साइकिल उद्यमियों ने कमीशन के खिलाफ प्रदर्शन किया, जबकि इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन ऑफ नार्थ इंडिया और फॉस्टर मैन्यूफेक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने इस बैठक का बायकाट किया। दोनों संगठनों ने रेगुलेटरी कमीशन को किसी तरह के सुझाव नहीं दिए।
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बैठक में तमाम औद्योगिक संगठनों ने एक सुर में बिजली की कीमतों में वृद्धि के प्रस्ताव का जमकर विरोध किया और साफ किया कि प्रबंधकीय एवं वितरण और ट्रांसमिशन में बदलाव करके नुकसान को खत्म किया जा सकता है। विभिन्न औद्योगिक संगठनों के सुझाव, विरोध और समस्याओं से संबंधित ज्ञापन कमीशन ने आगे विचार के लिए स्वीकार किए हैं।
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कमीशन की चेयरपर्सन रोमिला दुबे ने कहा कि सभी समस्याओं और सुझावों पर उच्चस्तर पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद 18 फरवरी को फिर से बैठक करके सभी समस्याओं का हल निकालने का प्रयास किया जाएगा। इंडक्शन फर्नेस एसोसिएशन ने बैठक का बायकाट किया।
संगठन के प्रधान केके गर्ग का आरोप है कि कमीशन अपना काम पूरी ईमानदारी से नहीं निभा रहा है। औद्योगिक संगठनों से सुझाव लेना महज एक औपचारिकता है, इन पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता। हालत यह है कि हर साल दरें बढ़ रही हैं, नतीजतन उत्तर क्षेत्र में सबसे महंगी बिजली पंजाब में है। संगठन ने मांग की है कि किसी रिटायर्ड जज को कमीशन का चेयरमैन नियुक्त किया जाए।
यूसीपीएमए के प्रधान चरणजीत सिंह विश्वकर्मा की अध्यक्षता में उद्यमियों ने कमीशन के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया। विश्वकर्मा ने कहा कि चीन में लाइन लॉस 4 फीसदी हैं, जबकि यहां पर 17 फीसदी हैं। इनको कम करने की जरूरत है। पंजाब में कृषि क्षेत्र 29 फीसदी और औद्योगिक क्षेत्र 32 फीसदी बिजली की खपत कर रहा है। जबकि कृषि से राजस्व निल और औद्योगिक क्षेत्र से 50 फीसदी है। चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कामर्शियल अंडरटेकिंग्स ने भी बिजली की दरों में प्रस्तावित वृद्धि का विरोध किया है। चैंबर के महासचिव उपकार सिंह ने सभी आंकड़ों के साथ कमीशन को यह समझाने का प्रयास किया कि बिजली विभाग के सिस्टम को दुरुस्त करके ही सारे घाटे को पूरा किया जा सकता है।