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Ludhiana: अखाड़ा गांव में ढाई साल पुराना बायोगैस फैक्टरी विवाद खत्म, अब गांव के बाहर पंचायती जमीन पर लगेगी

Fri, 23 Jan 2026 08:48 AM IST
निवेदिता वर्मा संवाद न्यूज एजेंसी, जगरांव (पंजाब)
संवाद न्यूज एजेंसी, जगरांव (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 23 Jan 2026 08:48 AM IST
सार

अखाड़ा गांव के लोग शुरू से ही इस बायोगैस फैक्टरी का विरोध कर रहे थे। इस दौरान कई बार पुलिस प्रशासन और ग्रामीण आमने-सामने आए। संघर्ष में गांव की महिलाओं और बच्चों ने भी अहम भूमिका निभाई और सरकारी दबाव का डटकर मुकाबला किया।

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dispute over biogas factory in Akhara village ended administration finally giving in unity of villagers
गांव अखाड़ा में हुई पंचायत - फोटो : संवाद

विस्तार

जगरांव के नजदीकी गांव अखाड़ा में बन रही बायोगैस फैक्टरी को लेकर पिछले ढाई साल से चला आ रहा विवाद समाप्त हो गया। गांव निवासियों की एकजुटता और लगातार संघर्ष के आगे प्रशासन को झुकना पड़ा, जिसके चलते अब यह बायोगैस फैक्टरी गांव से बाहर पंचायती जमीन पर शिफ्ट की जाएगी।

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इसके साथ ही गांव में करीब दो करोड़ रुपये के विकास कार्यों को भी मंजूरी दे दी गई है। फैसले के बाद पिछले ढाई वर्षों से फैक्टरी के सामने चल रहा दिन-रात का धरना आज समाप्त कर दिया गया।
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इस संबंध में जगरांव प्रशासन की ओर से एसडीएम उपिंदरजीत कौर, जगराओं पुलिस की ओर से एसपी रमनिंदर सिंह, डीएसपी जसविंदर सिंह ढींडसा, इंस्पेक्टर सुरजीत सिंह, थाना सदर के इंचार्ज, संघर्ष कमेटी के प्रतिनिधि गुरतेज सिंह, गांव पंचायत और गांव प्रतिनिधियों की एक जॉइंट मीटिंग आयोजित की गई। बैठक में बड़ी संख्या में गांववासी भी मौजूद रहे।
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गौरतलब है कि अखाड़ा गांव के लोग शुरू से ही इस बायोगैस फैक्टरी का विरोध कर रहे थे। इस दौरान कई बार पुलिस प्रशासन और ग्रामीण आमने-सामने आए। संघर्ष में गांव की महिलाओं और बच्चों ने भी अहम भूमिका निभाई और सरकारी दबाव का डटकर मुकाबला किया।

इतना ही नहीं, विरोध के चलते ग्रामीणों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार भी किया था, जिसके कारण गांव में एक भी वोट नहीं पड़ा। मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया, जिससे विवाद और अधिक उलझता चला गया।

आखिरकार लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर और जगरांव पुलिस अधिकारियों के साथ कई दौर की बैठकों के बाद बायोगैस फैक्टरी को गांव से बाहर शिफ्ट करने पर सहमति बनी। अब यह फैक्टरी अखाड़ा पंचायत की जमीन पर गांव से बाहर स्थापित की जाएगी, जबकि मौजूदा फैक्टरी स्थल पर कम्युनिटी हॉल बनाया जाएगा।

समझौते के तहत गांव की अन्य मांगों को भी स्वीकार किया गया है, जिनमें गांव ढोलन से गुरुद्वारा साहिब तक सड़क का निर्माण, तालाब को झील के रूप में विकसित करना, पंचायत घरों में सोलर सिस्टम लगाना, नशा मुक्ति केंद्र की स्थापना, ड्रेन पुल की साफ सफाई और नई पुलिया, लाइब्रेरी सहित कई विकास कार्य शामिल हैं।

इस मौके पर एसडीएम उपिंदरजीत कौर ने कहा कि यह संतोष की बात है कि ढाई साल से चला आ रहा विवाद आपसी सहमति से समाप्त हुआ है। उन्होंने बताया कि गांव के विकास कार्यों के लिए रेगुलर टेंडर जारी कर दिए गए हैं।



वहीं संघर्ष कमेटी के प्रतिनिधि गुरतेज सिंह ने कहा कि यह संघर्ष गांववासियों की बड़ी जीत है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान गांव के लोगों, महिलाओं और बच्चों ने पुलिस लाठीचार्ज के बावजूद डटकर मुकाबला किया और कई लोगों ने खून बहाकर अपने हक की लड़ाई लड़ी, जिसकी बदौलत आज यह ऐतिहासिक फैसला सामने आया।

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