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चौकी प्रभारी और मुंशी पर कत्ल का मामला दर्ज, फरार
ब्यूरो/अमर उजाला, बरनाला
Updated Thu, 12 May 2016 09:23 PM IST
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बरनाला में धरने पर बैठा पीड़ित परिवार
- फोटो : अमर उजाला
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पुलिस चौकी हंडियाया के अंदर बुधवार रात को सल्फास की गोलियां खाने से नौजवान बलदेव सिंह की मौत होने पर पुलिस चौकी हंडियाया के प्रभारी चरणजीत सिंह व चौकी के मुंशी सौदागर सिंह के खिलाफ कत्ल का मामला दर्ज कर लिया गया है।
दोनों आरोपी पुलिस अधिकारी मौके से फरार हो गए। उनकी गिरफ्तारी के लिए वीरवार को मृतक बलदेव सिंह का शव रखकर धरना दिया गया। मृतक के परिजन और धरनाकारी मांग कर रहे हैं कि जब तक आरोपी पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक मृतक बलदेव सिंह का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
आरोपी पुलिस अधिकारियों पर कत्ल का मामला दर्ज करवाने वाले सुखविंदर सिंह बबली ने एफआईआर में लिखवाया कि वे अपने साथी सुखपाल सिंह के साथ 11 मई को शाम को करीब साढ़े 7 बजे हंडियाया चौक में जा रहा था। जब वे हंडियाया नाके पर पहुंचे तो पुलिस चौकी हंडियाया प्रभारी चरणजीत सिंह नौजवान बलदेव सिंह को घेरकर उससे मारपीट कर रहे थे। वे उसे पीटते पीटते पुलिस चौकी ले गए।
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उन्होंने बलदेव सिंह के सगे भाई पंच लाभ सिंह को इसकी जानकारी फोन पर दी। लाभ सिंह ने कहा कि आप पुलिस चौकी पहुंचो वह भी पहुंचता है। जब वह पुलिस चौकी पहुंचे तो बलदेव सिंह से पुलिस चौकी का मुंशी सौदागर सिंह मारपीट कर रहा था। सौदागर सिंह ने बलदेव की जेब से 19000 हजार रुपये व उसका मोबाइल फोन निकालवा कर उसे हवालात में बंद कर दिया और सुखविंदर सिंह को बाहर भेज दिया।
कुछ देर बाद मृतक बलदेव सिंह का भाई लाभ सिंह वहां आ गया। जब वे दोबारा चौकी के अंदर गए तो बलदेव सिंह उलटियां रहा था और उसके पास कुछ सल्फास की गोलियां पड़ी थीं। उन्होंने चौकी के मुंशी सौदागर सिंह से पूछा तो उसने सल्फास की कुछ गोलियां उठाकर बाहर फेंक दीं और मौके पर चौकी इंचार्ज चरणजीत सिंह को बुला लिया।
बलदेव सिंह की हालत गंभीर देखकर चौकी इंचार्ज चरणजीत सिंह उनकी सहायता से उसे प्राइवेट नर्सिंग होम में ले गया, जहां डाक्टर ने बलदेव की हालत गंभीर देखते हुए उसे जवाब दे दिया। तब वे बलदेव को सिविल अस्पताल बरनाला ले गए। वहां दाखिल करवाने के बाद चौकी इंचार्ज चरणजीत सिंह मौके से फरार हो गया और थाना मुंशी सौदागर सिंह भी चौकी छोड़कर भाग गया।
सिविल अस्पताल के डाक्टरों ने बलदेव सिंह की हालत गंभीर देखते हुए उसे राजिंदरा अस्पताल पटियाला रेफर कर दिया, लेकिन बरनाला-पटियाला मुख्यमार्ग की हालत खस्ता देखते हुए वे उसको डीएमसी लुधियाना के लिए लेकर निकल पडे़, लेकिन रास्ते में रायकोट के पास बलदेव सिंह दम तोड़ गया। मृतक बलदेव सिंह के सगे भाई मौजूदा पंच लाभ सिंह ने आरोप लगाया कि उसके भाई की मौत के जिम्मेवार चौकी इंचार्ज चरणजीत सिंह और मुंशी सौदागर सिंह हैं, जिन्होंने उसके भाई के साथ धक्का कर उसे मौत के घाट उतार दिया।
किसान संगठनों ने दिया धरना
किसान संगठनों ने एकत्रित होकर सिविल अस्पताल में धरना लगा दिया। धरनाकारियों ने एलान किया कि जब तक आरोपी पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक बलदेव सिंह का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। खबर लिखे जाने तक आरोपी पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी नहीं हुई थी, जिस कारण मृतक का अंतिम संस्कार नहीं हो पाया था और धरना जारी था।
दोनों पुलिस मुलाजिमों के खिलाफ कत्ल का मामला दर्ज कर दिया गया है। उनको जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। मृतक बलदेव सिंह के पास सल्फास की गोलियां कैसे आईं यह बात अभी जांच का हिस्सा है।
- गुरप्रीत सिंह तूर, जिला पुलिस मुखी
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दोनों आरोपी पुलिस अधिकारी मौके से फरार हो गए। उनकी गिरफ्तारी के लिए वीरवार को मृतक बलदेव सिंह का शव रखकर धरना दिया गया। मृतक के परिजन और धरनाकारी मांग कर रहे हैं कि जब तक आरोपी पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक मृतक बलदेव सिंह का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
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आरोपी पुलिस अधिकारियों पर कत्ल का मामला दर्ज करवाने वाले सुखविंदर सिंह बबली ने एफआईआर में लिखवाया कि वे अपने साथी सुखपाल सिंह के साथ 11 मई को शाम को करीब साढ़े 7 बजे हंडियाया चौक में जा रहा था। जब वे हंडियाया नाके पर पहुंचे तो पुलिस चौकी हंडियाया प्रभारी चरणजीत सिंह नौजवान बलदेव सिंह को घेरकर उससे मारपीट कर रहे थे। वे उसे पीटते पीटते पुलिस चौकी ले गए।
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उन्होंने बलदेव सिंह के सगे भाई पंच लाभ सिंह को इसकी जानकारी फोन पर दी। लाभ सिंह ने कहा कि आप पुलिस चौकी पहुंचो वह भी पहुंचता है। जब वह पुलिस चौकी पहुंचे तो बलदेव सिंह से पुलिस चौकी का मुंशी सौदागर सिंह मारपीट कर रहा था। सौदागर सिंह ने बलदेव की जेब से 19000 हजार रुपये व उसका मोबाइल फोन निकालवा कर उसे हवालात में बंद कर दिया और सुखविंदर सिंह को बाहर भेज दिया।
कुछ देर बाद मृतक बलदेव सिंह का भाई लाभ सिंह वहां आ गया। जब वे दोबारा चौकी के अंदर गए तो बलदेव सिंह उलटियां रहा था और उसके पास कुछ सल्फास की गोलियां पड़ी थीं। उन्होंने चौकी के मुंशी सौदागर सिंह से पूछा तो उसने सल्फास की कुछ गोलियां उठाकर बाहर फेंक दीं और मौके पर चौकी इंचार्ज चरणजीत सिंह को बुला लिया।
बलदेव सिंह की हालत गंभीर देखकर चौकी इंचार्ज चरणजीत सिंह उनकी सहायता से उसे प्राइवेट नर्सिंग होम में ले गया, जहां डाक्टर ने बलदेव की हालत गंभीर देखते हुए उसे जवाब दे दिया। तब वे बलदेव को सिविल अस्पताल बरनाला ले गए। वहां दाखिल करवाने के बाद चौकी इंचार्ज चरणजीत सिंह मौके से फरार हो गया और थाना मुंशी सौदागर सिंह भी चौकी छोड़कर भाग गया।
सिविल अस्पताल के डाक्टरों ने बलदेव सिंह की हालत गंभीर देखते हुए उसे राजिंदरा अस्पताल पटियाला रेफर कर दिया, लेकिन बरनाला-पटियाला मुख्यमार्ग की हालत खस्ता देखते हुए वे उसको डीएमसी लुधियाना के लिए लेकर निकल पडे़, लेकिन रास्ते में रायकोट के पास बलदेव सिंह दम तोड़ गया। मृतक बलदेव सिंह के सगे भाई मौजूदा पंच लाभ सिंह ने आरोप लगाया कि उसके भाई की मौत के जिम्मेवार चौकी इंचार्ज चरणजीत सिंह और मुंशी सौदागर सिंह हैं, जिन्होंने उसके भाई के साथ धक्का कर उसे मौत के घाट उतार दिया।
किसान संगठनों ने दिया धरना
किसान संगठनों ने एकत्रित होकर सिविल अस्पताल में धरना लगा दिया। धरनाकारियों ने एलान किया कि जब तक आरोपी पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता, तब तक बलदेव सिंह का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा। खबर लिखे जाने तक आरोपी पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी नहीं हुई थी, जिस कारण मृतक का अंतिम संस्कार नहीं हो पाया था और धरना जारी था।
दोनों पुलिस मुलाजिमों के खिलाफ कत्ल का मामला दर्ज कर दिया गया है। उनको जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा। मृतक बलदेव सिंह के पास सल्फास की गोलियां कैसे आईं यह बात अभी जांच का हिस्सा है।
- गुरप्रीत सिंह तूर, जिला पुलिस मुखी