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झगड़े में दस्तार उतरने के बाद नहीं मिला इंसाफ
Updated Thu, 04 Jan 2018 10:17 PM IST
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झगड़े में दस्तार उतरने के बाद नहीं मिला इंसाफ
प्रेस कांफ्रेंस कर दी संघर्ष की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहगढ़ साहिब।
सरहिंद के रमदास नगर निवासी राजवीर सिंह ने एक झगड़े में पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अगर इंसाफ न मिला तो मजबूरन में हाईकोर्ट की ओर रुख करना पड़ेगा। प्रेस कांफ्रेंस में राजबीर सिंह ने बताया कि एक नवंबर 2017 को सुबह उनका पड़ोसी जगीर सिंह छत पर चढ़कर उनके साथ गाली गलौज करने लगा था। उसकी गाली गलौज रोकने के लिए जैसे ही राजवीर के दोस्त कमल सिंह गया तो बाहर गली में उनका झगड़ा हो गया और कमल की दस्तार उतरकर नीचे गिर गई। जिसकी शिकायत उन्होंने सरहिंद थाना में कर दी। जैसे ही उसके पारिवारिक सदस्य पुलिस को शिकायत देकर वापस घर लौटे तो दोनों पक्षों में दस्तार उतारने को लेकर फिर झगड़ा हो गया और दोनों पक्ष सिविल अस्पताल में दाखिल हो गए।
राजवीर ने कहा कि इस झगड़े में वह शामिल नहीं था और सिविल अस्पताल के डाक्टरों व पुलिस पर आरोप लगाते उसने कहा कि पुलिस ने उस पर और परिवार के अन्य लोगों पर मारपीट का झूठा मामला दर्ज कर दिया। इस झगड़े में उसके पिता जसवीर सिंह भी घायल हो गए थे। राजवीर ने कहा कि मामले की जांच कर रहे एसएचओ प्रदीप सिंह ने अपनी जांच में एसएसपी को सौंपी रिपोर्ट में बताया था कि झगड़े में विरोधी पक्ष के लोग भी जख्मी हुए थे और जगीर सिंह के भाई दर्शन सिंह की बाजू टूट गई थी। ये मामला झगड़े की सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दर्ज किया गया था। इसके बाद राजबीर सिंह ने एसएसपी अलका मीना को शिकायत दी थी। इसके बाद डीएसपी (डी) की जांच के बाद पुलिस ने राजवीर सिंह को निर्दोष करार दिया था। लेकिन इस संबंध में कोई इसका लिखित सबूत नहीं दिया था। इस पर राजवीर सिंह अपनी जिद पर अड़ गया कि जिन लोगों ने उसका नाम झगड़े में लिया है पुलिस उन पर 295ए के तहत मामला दर्ज किया जाए। राजवीर सिंह मुताबिक झगड़े को दो महीने बीत गए पुलिस विरोधी पक्ष के लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। गत 21 नवंबर को डीसी दफ्तर पर वह धरना भी दे चुके हैं। डीसी ने एसएसपी को शिकायत मार्क भी की थी उसके बाद तीन बार एसएसपी को मिल चुके हैं, जहां अभी तक उन्हें कोई इंसाफ नहीं मिला।
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प्रेस कांफ्रेंस कर दी संघर्ष की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
फतेहगढ़ साहिब।
सरहिंद के रमदास नगर निवासी राजवीर सिंह ने एक झगड़े में पुलिस पर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अगर इंसाफ न मिला तो मजबूरन में हाईकोर्ट की ओर रुख करना पड़ेगा। प्रेस कांफ्रेंस में राजबीर सिंह ने बताया कि एक नवंबर 2017 को सुबह उनका पड़ोसी जगीर सिंह छत पर चढ़कर उनके साथ गाली गलौज करने लगा था। उसकी गाली गलौज रोकने के लिए जैसे ही राजवीर के दोस्त कमल सिंह गया तो बाहर गली में उनका झगड़ा हो गया और कमल की दस्तार उतरकर नीचे गिर गई। जिसकी शिकायत उन्होंने सरहिंद थाना में कर दी। जैसे ही उसके पारिवारिक सदस्य पुलिस को शिकायत देकर वापस घर लौटे तो दोनों पक्षों में दस्तार उतारने को लेकर फिर झगड़ा हो गया और दोनों पक्ष सिविल अस्पताल में दाखिल हो गए।
राजवीर ने कहा कि इस झगड़े में वह शामिल नहीं था और सिविल अस्पताल के डाक्टरों व पुलिस पर आरोप लगाते उसने कहा कि पुलिस ने उस पर और परिवार के अन्य लोगों पर मारपीट का झूठा मामला दर्ज कर दिया। इस झगड़े में उसके पिता जसवीर सिंह भी घायल हो गए थे। राजवीर ने कहा कि मामले की जांच कर रहे एसएचओ प्रदीप सिंह ने अपनी जांच में एसएसपी को सौंपी रिपोर्ट में बताया था कि झगड़े में विरोधी पक्ष के लोग भी जख्मी हुए थे और जगीर सिंह के भाई दर्शन सिंह की बाजू टूट गई थी। ये मामला झगड़े की सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दर्ज किया गया था। इसके बाद राजबीर सिंह ने एसएसपी अलका मीना को शिकायत दी थी। इसके बाद डीएसपी (डी) की जांच के बाद पुलिस ने राजवीर सिंह को निर्दोष करार दिया था। लेकिन इस संबंध में कोई इसका लिखित सबूत नहीं दिया था। इस पर राजवीर सिंह अपनी जिद पर अड़ गया कि जिन लोगों ने उसका नाम झगड़े में लिया है पुलिस उन पर 295ए के तहत मामला दर्ज किया जाए। राजवीर सिंह मुताबिक झगड़े को दो महीने बीत गए पुलिस विरोधी पक्ष के लोगों पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। गत 21 नवंबर को डीसी दफ्तर पर वह धरना भी दे चुके हैं। डीसी ने एसएसपी को शिकायत मार्क भी की थी उसके बाद तीन बार एसएसपी को मिल चुके हैं, जहां अभी तक उन्हें कोई इंसाफ नहीं मिला।
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