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टमाटर का बिगड़ा मिजाज
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
Updated Thu, 16 Jun 2016 09:23 PM IST
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tomatoes
- फोटो : getty images
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मांग के मुकाबले आपूर्ति कम होने के कारण बाजार में टमाटर का मिजाज बिगड़ा हुआ है। रिटेल बाजार में टमाटर की कीमतें साठ से सत्तर रुपये प्रति किलो के आसपास हैं। माहिरों का कहना है कि आने वाले दस पंद्रह दिन तक भाव यूं ही चढ़े रहेंगे।
पंजाब की टमाटर की फसल खत्म हो चुकी है, ऐसे में अब सारा बोझ हिमाचल प्रदेश पर आ गया है। उत्तर भारत में टमाटर की अधिकतर आपूर्ति हिमाचल से ही हो रही है। नासिक और बंगलूरू से नई खेप आने के बाद कीमतों में नरमी का रुख बनेगा।
पंजाब फ्रूट एंड वेजिटेबल कमीशन एजेंट्स एसोसिएशन के महासचिव अमरवीर सिंह का कहना है कि लुधियाना मंडी में हिमाचल प्रदेश से रोजाना दो हजार क्रेट (प्रति क्रेट 25 किलो) टमाटर की आपूर्ति हो रही है। मांग चार हजार क्रेट की है। इसी कारण कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। मई में टमाटर का रिटेल दाम दस रुपये किलो था और मंडी में भाव तीन रुपये किलो था। आज मंडी का भाव तीस रुपये और रिटेल में साठ रुपये किलो है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में फसल बेहतर नहीं है। इसलिए दिल्ली भी तेज है।
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देश में टमाटर का कुल उत्पादन वर्ष 2015-16 (जुलाई से जून) में 18.28 मिलियन टन रहने का अनुमान है। जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 16.38 मिलियन टन हुआ था। माहिर कहते हैं कि बाजार में नई फसल जुलाई में आती है, इसलिए जून के दौरान टमाटर महंगा हो ही जाता है। बेमौसमी बारिश के चलते अगले साल टमाटर का उत्पादन कुछ कम रह सकता है।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में सब्जी विभाग के माहिर डॉ. शैलेष जिंदल का कहना है कि सूबे में करीब 7580 हेक्टेयर रकबे में टमाटर की खेती की जाती है। सूबे में 1.86 लाख टन टमाटर पैदा किया जाता है। पंजाब में टमाटर की एक फसल फरवरी में और दूसरी जुलाई में बिजाई की जाती है।
फरवरी की फसल मई के अंत तक खत्म हो जाती है। अब नई फसल नवंबर में बाजार में आएगी। डॉ. जिंदल का कहना है कि टमाटर की शेल्फ लाइफ काफी कम है। इसलिए इसे पांच-छह दिन से अधिक स्टोर नहीं किया जा सकता। इसलिए मांग और आपूर्ति पर ही बाजार टिका है।
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पंजाब की टमाटर की फसल खत्म हो चुकी है, ऐसे में अब सारा बोझ हिमाचल प्रदेश पर आ गया है। उत्तर भारत में टमाटर की अधिकतर आपूर्ति हिमाचल से ही हो रही है। नासिक और बंगलूरू से नई खेप आने के बाद कीमतों में नरमी का रुख बनेगा।
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पंजाब फ्रूट एंड वेजिटेबल कमीशन एजेंट्स एसोसिएशन के महासचिव अमरवीर सिंह का कहना है कि लुधियाना मंडी में हिमाचल प्रदेश से रोजाना दो हजार क्रेट (प्रति क्रेट 25 किलो) टमाटर की आपूर्ति हो रही है। मांग चार हजार क्रेट की है। इसी कारण कीमतों में उछाल देखा जा रहा है। मई में टमाटर का रिटेल दाम दस रुपये किलो था और मंडी में भाव तीन रुपये किलो था। आज मंडी का भाव तीस रुपये और रिटेल में साठ रुपये किलो है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में फसल बेहतर नहीं है। इसलिए दिल्ली भी तेज है।
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देश में टमाटर का कुल उत्पादन वर्ष 2015-16 (जुलाई से जून) में 18.28 मिलियन टन रहने का अनुमान है। जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 16.38 मिलियन टन हुआ था। माहिर कहते हैं कि बाजार में नई फसल जुलाई में आती है, इसलिए जून के दौरान टमाटर महंगा हो ही जाता है। बेमौसमी बारिश के चलते अगले साल टमाटर का उत्पादन कुछ कम रह सकता है।
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में सब्जी विभाग के माहिर डॉ. शैलेष जिंदल का कहना है कि सूबे में करीब 7580 हेक्टेयर रकबे में टमाटर की खेती की जाती है। सूबे में 1.86 लाख टन टमाटर पैदा किया जाता है। पंजाब में टमाटर की एक फसल फरवरी में और दूसरी जुलाई में बिजाई की जाती है।
फरवरी की फसल मई के अंत तक खत्म हो जाती है। अब नई फसल नवंबर में बाजार में आएगी। डॉ. जिंदल का कहना है कि टमाटर की शेल्फ लाइफ काफी कम है। इसलिए इसे पांच-छह दिन से अधिक स्टोर नहीं किया जा सकता। इसलिए मांग और आपूर्ति पर ही बाजार टिका है।