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Ludhiana News: कैप्टन अमरिंदर व बेटे रणइंदर को हाईकोर्झट का झटका, ईडी को विदेशी संपत्ति के दस्तावेज देखने की इजाजत
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-कहा- ईडी दस्तावेजों को देख सकती है लेकिन उन्हें सार्वजनिक नहीं कर सकती
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके बेटे रणइंदर सिंह को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी वह याचिका खारिज कर दी जिसमें निचली अदालत के आदेशों को चुनौती दी गई थी। इन आदेशों के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को कथित विदेशी संपत्ति और स्विस बैंक के खातों से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों का निरीक्षण करने की अनुमति दी थी।
न्यायमूर्ति त्रिभुवन दहिया ने अपने 16 पन्नों के आदेश में स्पष्ट किया कि ईडी को जांच के लिए न्यायिक अभिलेख देखने से रोकने वाली कोई कानूनी बाधा नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना इंडो-फ्रेंच डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट का उल्लंघन नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि ईडी दस्तावेजों को देख सकती है लेकिन उन्हें सार्वजनिक नहीं कर सकती जब तक कि कानूनी रूप से अनुमति न मिले।
2016 का है मामला
यह मामला वर्ष 2016 में आयकर विभाग की शिकायत से जुड़ा है जिसमें अमरिंदर और रणइंदर पर विदेशी संपत्ति को छिपाने और कर चोरी का आरोप लगाया गया था। आयकर विभाग ने धारा 277 आयकर अधिनियम, 1961 और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत गलत जानकारी देने और झूठी गवाही का मामला दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अमरिंदर सिंह विदेशी संपत्ति और बैंक खातों के वास्तविक लाभार्थी हैं। इनमें स्विट्जरलैंड स्थित एचएसबीसी प्राइवेट बैंक जेनेवा के खाते, दुबई की प्रॉपर्टी से जुड़े निवेश शामिल थे।
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हाईकोर्ट ने खारिज किया तर्क
अमरिंदर और रणइंदर ने दलील दी थी कि ये दस्तावेज गोपनीय शर्तों के साथ भारत को मिले थे और ईडी जो मूल प्राप्तकर्ता नहीं है, उन्हें नहीं देख सकती लेकिन हाईकोर्ट ने यह तर्क खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रों के बीच आपसी सहयोग का आधार गोपनीयता की ऐसी शर्तें नहीं हो सकतीं जो संवैधानिक कार्यवाही या आपराधिक जांच में बाधा डालें। अगर राज्य के पास प्रथमदृष्टया सबूत हैं तो नागरिकों को जानने का अधिकार है और राज्य की जिम्मेदारी है कि वह जांच करे।
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह और उनके बेटे रणइंदर सिंह को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी वह याचिका खारिज कर दी जिसमें निचली अदालत के आदेशों को चुनौती दी गई थी। इन आदेशों के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को कथित विदेशी संपत्ति और स्विस बैंक के खातों से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों का निरीक्षण करने की अनुमति दी थी।
न्यायमूर्ति त्रिभुवन दहिया ने अपने 16 पन्नों के आदेश में स्पष्ट किया कि ईडी को जांच के लिए न्यायिक अभिलेख देखने से रोकने वाली कोई कानूनी बाधा नहीं है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना इंडो-फ्रेंच डबल टैक्सेशन अवॉइडेंस एग्रीमेंट का उल्लंघन नहीं है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि ईडी दस्तावेजों को देख सकती है लेकिन उन्हें सार्वजनिक नहीं कर सकती जब तक कि कानूनी रूप से अनुमति न मिले।
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2016 का है मामला
यह मामला वर्ष 2016 में आयकर विभाग की शिकायत से जुड़ा है जिसमें अमरिंदर और रणइंदर पर विदेशी संपत्ति को छिपाने और कर चोरी का आरोप लगाया गया था। आयकर विभाग ने धारा 277 आयकर अधिनियम, 1961 और भारतीय दंड संहिता की धाराओं के तहत गलत जानकारी देने और झूठी गवाही का मामला दर्ज किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया कि अमरिंदर सिंह विदेशी संपत्ति और बैंक खातों के वास्तविक लाभार्थी हैं। इनमें स्विट्जरलैंड स्थित एचएसबीसी प्राइवेट बैंक जेनेवा के खाते, दुबई की प्रॉपर्टी से जुड़े निवेश शामिल थे।
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हाईकोर्ट ने खारिज किया तर्क
अमरिंदर और रणइंदर ने दलील दी थी कि ये दस्तावेज गोपनीय शर्तों के साथ भारत को मिले थे और ईडी जो मूल प्राप्तकर्ता नहीं है, उन्हें नहीं देख सकती लेकिन हाईकोर्ट ने यह तर्क खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रों के बीच आपसी सहयोग का आधार गोपनीयता की ऐसी शर्तें नहीं हो सकतीं जो संवैधानिक कार्यवाही या आपराधिक जांच में बाधा डालें। अगर राज्य के पास प्रथमदृष्टया सबूत हैं तो नागरिकों को जानने का अधिकार है और राज्य की जिम्मेदारी है कि वह जांच करे।